ब्रिटिश अपने अधीन समूचे क्षेत्र की राजस्व सूचना बनाते थे , यानी प्रत्येक क्षेत्र में क्या राजस्व लेना है ? कौन वो राजस्व देगा ? इस प्रकार व्यवस्थित सूचना बनाते थे | बाबरी मस्जिद के लिये पहली सैटलमेंट रिपोर्ट १८६१ में बनायी गई | इसका प्रति १० या १५ वर्षों में, परिस्थिति अनुसार, परिष्कार होता है | राजस्व सूची में सन् १८६१ के बाद से रामकोट ग्राम के लिये, बाबरी मस्जिद का  कोई उल्लेख नहीं है | ब्रिटिशों की १८६१ के बाद की राजस्व सूची में बाबरी मस्जिद का कोई उल्लेख नहीं है | वो भूमि सरकारी भूमि बतायी गई है और महंत लोग उसके अधिकारी | इस स्थिति को कभी कोई चुनौती नहीं दी गयी जब तक ब्रिटिश भारत में थे | इन सूचियों के सार्वजनिक होने पर भी बाबरी मस्जिद के किसी अधिकारी ने चुनौती नहीं दी , ना ही इस तथ्य को कि वो भूमि सरकारी है और महंत उसके स्वामि |

परन्तु और भी रोचक बात यह है कि पता नहीं कब किसी ने इन राजस्व के कागजों से छेड़छाड़ की है | तो जहाँ – जहाँ पर जन्म स्थान लिखा है , किसी ने बाबरी मस्जिद जोड़ दिया है | ये कैसे पता चलता है ? क्योंकि स्याही का रंग अलग – अलग है , अक्षरों की मोटाई, लेखनी की नोक की चौड़ाई, हस्तलेख, सब भिन्न है | कोई भी आदमी जाकर सरकारी कागज़ों में छेड़छाड़ नहीं कर सकता | वे यूँही कहीं पड़े नहीं रहते कि बस कोई भी गया और बदलकर आ गया | तो किसीने सारी व्यवस्था बनाकर ये होने दिया है | कब और कैसे ? पता नहीं | और भी रोचक बात ये है कि इन्हीं कागजों की एक प्रति एक दूसरे कार्यालय में उपलब्ध है और उसमें ऐसी कोई छेड़छाड़ दिखायी नहीं देती |

तो ये तो एक स्पष्ट उदाहरण है जहाँ साक्ष्यों के साथ गड़बड़ की गयी है | और एक प्रमाण है | १९४४ में संयुक्त प्रांत की सरकार ने सभी मस्जिदों की एक सूची निकाली | उस सूची में , मस्जिद का नाम , उसके निर्माण का वर्ष, किसने वो बनाई, और अन्तिम पंक्ति में वक्फ़ का नाम था जो उसकी देखरेख के लिये बनाया गया हो क्योंकि हर मस्जिद में देख रेख की, देख रेख के लिये पैसे की आवश्यकता होगी ही | तो एक वक्फ़ हमेशा ही होता है | उस वक्फ़ से होने वाली कमाई का प्रयोग उस मस्जिद की देखरेख के लिये किया जाता है | बाबरी मस्जिद के लिये कोई वक्फ़ नहीं था | बनाने वाले का नाम दिया है , बाबर | वर्ष दिया है १५२८ | परन्तु वक्फ़ कहाँ है ? वो नहीं दिया | तो अल्लाहाबाद उच्चनयायालय ने बाबरी मस्जिद का समर्थन करने वाले पक्ष को पूछा कि क्या तुम इसे समझा सकते हो | परन्तु वे लोग कोई उत्तर न दे सके | तो अलाहाबाद उच्चन्यायालय ने कहा कि आप लोगों के पक्ष में ये विशेष दुर्बलता है जो आप बाबरी के लिये बना हुआ कोई वक्फ़ नहीं दिखा सकते |