शिवाजी के दक्षिण भारत के अभियान पर जाने का कारण

और ये करने के पश्चात्, राज्याभिषिक्त होने के पश्चात्, छत्रपति शिवाजी दक्षिण भारत के अभियान पर गये और एक ऐसे साम्राज्य का निर्माण किया जो कि जिञ्जी तक विस्तृत था, आप देख सकते हैं कि ये है छत्रपति शिवाजी द्वारा निर्मित मूल राज्य । ये स्वराज्य है, कारवार से नासिक के उत्तर तक विस्तृत, लगभग गुजरात की सीमा तक । परंटी १६७६ में वे दक्षिण भारत के अभियान पर गये अनेक कारणों से, जिनमें से एक ये था कि आदिल शाही राज्य में बहुत सम्पदा थी, आदिल शाही राज्य लगभग यहाँ था, इस भाग में । इस भाग के आस पास क़ुतुब शाही थी । और कुछ अर्ध-स्वतन्त्र हिन्दू राजा थे सुदूर दक्षिण में, तो एक कारण सम्पदा थी । दूसरा वे एक आपदाश्रय चाहते थे स्वराज्य के दक्षिण में, यदि उत्तर से आक्रमण हो तो कहाँ जाएँ ? वे घिरे हुये हैं और इसलिये पीछे लौटने के लिये एक स्थल की आवश्यकता है और इस प्रकार उन्होंने कोपबल, वेल्लोर और जिञ्जी जैसे स्थान अधिकृत किये ।

तञ्जोर मराठा, दुर्भाग्य से तञ्जोर मराठाओं से उनका एक छोटा कलह भी हुआ जो कि उनके सौतेले बन्धु थे परन्तु अन्त में उनका इस बड़े क्षेत्र पर अधिकार हुआ । ये रोचक बात है कि जिञ्जी का किला, जो कि तमिल नाडु में है, उनको बिना एक गोली चलाये या एक सिपाही को मारे प्राप्त हो गया था । आदिल शाही बीजापुर का एक हबशी या इथियोपियन अधिकारी जिञ्जी में था, उसका नाम अब्दुल मोहमाद सईद था और वो किले के अन्दर था जब छत्रपति शिवाजी ने उस किले को घेरा । इसी बीच, एक व्यक्ति यहाँ से चला, बीजापुर से, जिसका नाम शेर खान लोधी था और शिवाजी इनके बीच में कलह करवाने में सफल हुए और इस कारण उन्हें जिञ्जी का किला प्राप्त हुआ । ये किला बहुत महत्त्वपूर्ण बन जाता है, जब छत्रपति राजाराम का समय आता है । तो ये स्थिति शिवाजी ने निर्मित की थी जब तक उनका १६८० में देहांत हुआ । उन्होंने सारी नीतियाँ स्थापित कीं, उन्होंने ये सब विभिन्न क्षेत्र जीते और उस समय जैसे ही युद्ध आरम्भ होने वाला था, १६८० में उनका देहान्त हो गया ।

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