बुधवार, सितम्बर 26, 2018
Home > अल्पसंख्यकवाद और राजनीति > भारत में शरणार्थियों से व्यवहार करने की मानक प्रक्रिया प्रणाली

भारत में शरणार्थियों से व्यवहार करने की मानक प्रक्रिया प्रणाली

ऐसा कहना कि हमारे पास कोई विधि नहीं है जहाँ तक शरणार्थियों का प्रश्न है, शायद हमारे पास वो है जिसे मानक प्रक्रिया प्रणाली के नाम से जाना जाता है जो कि मेरे विचार से २९ दिसम्बर २०११ को लागू हुई, और बाद में राजग सरकार ने इसी मानक प्रक्रिया प्रणाली को लागू किया । मैं केवल इस मानक प्रक्रिया प्रणाली को पढ़कर सुनाता हूँ, जिससे कि ये उपयोगी हो जाये और चर्चा से संगत रहे क्योंकि ये भी एक ऎसी चीज है जो हमने सर्वोच्च न्यायालय के सम्मुख अपने पत्रों में उल्लिखित की है । ये भारत सरकार की ओर से है, गृह मन्त्रालय, ६ अगस्त २०१४ को, भारत में शरणार्थियों के लिये विधि, ये कहता है, और ये एक अनुच्छेद, शरणार्थियों के विषय में, अधिकांश रूप से भारत की स्थिति के योग और तत्त्व को संगृहीत करता है । तो बस इस पर ध्यान दीजिये ।

भारत संयुक्त राष्ट्र के १९५१ के शरणार्थियों की स्थिति के समझौते का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है । पहला बिंदु, कृपया इस पर ध्यान दें । तो हम इसके हस्ताक्षकर्त्ता नहीं हैं । अतः, जो भी दायित्व इसके हस्ताक्षरकर्त्ता के बनते हैं, वे हम पर लागू नहीं होते । ठीक, हमने इसकी पुष्टि नहीं की है, हमने हस्ताक्षर नहीं किया है, हम इस निश्चित सम्मलेन के सदस्य या हस्ताक्षरकर्त्ता नहीं हैं ।

दूसरा, १९६७ का संलेख भी । तो प्रत्येक विधान, अन्तर्राष्ट्रीय विधान, उसका एक मूल प्रलेख होता है और पुनः आपके पास अनुप्राप्त संलेख होते हैं जो कि उसके अनुगामी होते हैं । तो १९५१ के सम्मलेन में न ही हम कोई दल हैं न कोई हस्ताक्षरकर्त्ता और न हम १९६७ के संलेख का कोई दल हैं, पहला बिन्दु । अतः, जो दायित्व जो हस्ताक्षरकत्ताओं पर लागू होते हैं, हम पर लागू नहीं होते । दूसरा, शरणार्थियों को लेकर वर्त्तमान में कोई राष्ट्रीय विधि नहीं है अभी । ये भारत सरकार की स्थिति है जो कि एक सत्य है । सरकार ने उन विदेशी नागरिकों से व्यवहार करने के लिये, २९ दिसम्बर २०११ को एक मानक प्रक्रिया प्रणाली प्रेषित की है सभी राज्य सरकारों को, जो कि शरणार्थी होने का दावा करते हैं ।

तो केन्द्र सरकार ने दिसम्बर २०११ को एक मानक प्रक्रिया प्रणाली सभी राज्य सरकारों को भेजी है ये कहते हुये कि, भैया अगर आपके प्रदेशों में एक अवैध शरणार्थी आ जाता है या शरणार्थी आ जाता है उसके साथ आप कैसे व्यवहार करेंगे, उसके लिये आपका एक नमूना है । ये नमूना है, कृपया इसका पालन कीजिये । वो नमूना स्वीकार किया गया है और आज भी स्वीकार किया जाता है ।

रोहिंग्याओं के सम्बन्ध में हमारी स्थिति क्या उस मानक प्रक्रिया प्रणाली का उल्लंघन कर रही है ? केवल यही प्रश्न है जिसका मुझे उत्तर देना है क्यूँकि केवल यही स्थिति आज शरणार्थियों पर लागू होती है । ये मानक प्रक्रिया प्रणाली कहती है कि वे मामले जो कि प्रथमदृष्ट्या संहार के सुदृढ भय पर आधारित होकर सत्यापित हैं, वर्ग, सम्प्रदाय, लिंग, राष्ट्रीयता, संजाति, विशिष्ट सामाजिक समूह की सदस्यता या राजनैतिक धारणा, वे राज्य सरकार द्वारा गृह मन्त्रालय को भेजे जा सकते हैं, लम्बी कालावधि के वीजा की प्राप्ति हेतु, विहित सुरक्षा सत्यापन के पश्चात् ।

एक विदेशी जिसको लम्बी कालावधि के वीजा की अनुमति गृहमन्त्रालय द्वारा प्रदत्त है, उसको निजी क्षेत्र में जीविकोपार्जन की अनुमति होगी । अतः, क्या प्रक्रिया है ? राज्य सरकार गृहमन्त्रालय को एक निवेदन भेजेगी । केन्द्रीय गृह मन्त्रालय, ये कहते हुये कि एक निश्चित व्यक्ति या समूह, विहित सुरक्षा सत्यापन के पश्चात् एक लम्बी कालावधि के वीजा का अधिकारी है ।

Leave a Reply

%d bloggers like this: