क्यूँ हमें अवश्य उस विचार को समझना चाहिये जिसने इस्लामिक आक्रान्ताओं का मार्गदर्शन किया

मुझे उसके आनन्द लेने में आपत्ति नहीं क्यूँकि मैं सोचता हूँ कि व्यक्तियों का निर्दोष या सदोष होना बहुत महत्त्वपूर्ण नहीं है, शायद यदि किसी न्यायाधीश को निर्णय करना हो तब उस समय के लिये वो इसे महत्त्वपूर्ण समझ सकता है ।

परन्तु ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह बिल्कुल महत्त्वपूर्ण नहीं है , जैसे औरंगज़ेब और उसकी बर्बरता पर चर्चा करना ऊर्जा व्यर्थ करना है । औरंगज़ेब का जो भी चरित्र रहा हो , आवश्यक यह है , ध्यान देने योग्य यह है कि वो एक निश्चित विचारधारा का पालन कर रहा था , उसने उसी विचारधारा को लागू किया और उस व्यक्ति विशेष के स्थान पर हमें  उस विचारधारा पर ध्यान देना चाहिए ।

एक वक्तव्य , जो कि एलेनोर रूज़वेल्ट का बताया जाता है पर शायद कम से कम सौ वर्ष और पुराना है , वो इस प्रकार है , “महान लोग विचारों पर चर्चा करते हैं , मध्यम लोग घटनाओं की चर्चा करते हैं और निम्न लोग व्यक्तियों की चर्चा करते हैं “। तो मैं औरंगज़ेब के या बाबर के निजी चरित्र की चर्चा , जोकि किसी महत्त्व की नहीं है , से बचता हूँ , परन्तु वो विचार जिनके पीछे ये लोग चले , वे बहुत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे विचार अब भी हैं और लोग अब भी उन विचारों से प्रभावित होते हैं । हम औरंगज़ेब या बाबर के बारे में तो कुछ नहीं कर सकते , परन्तु उन विचारों से लोगों को सावधान कर सकते हैं जो उन विचारों की ओर आकर्षित हों अपनी बुद्धि को बदलने के लिये ।

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