गुरूवार, अगस्त 16, 2018
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कंबोडिया और वियतनाम के खमेर और चरमे संस्कृतियों का भारत से सम्बन्ध

तो एक कहानी हैं जो सामूहिक रूप से काम्बोसिया और वियतनाम आदि देशों के अभिलेखों में देखि जाती हैं, और इसके बहुत समय बाद अंकोर और चरमे साम्राज्य उभरे, मगर वोह कहानी कुछ इस प्रकार हैं – एक भारतीय ब्राह्मण था जिसका नाम कौडिन्य था जो समुद्री यात्रा कर रहा था जिस तट को आजकल दक्षिण वियतनाम और दक्षिण काम्बोसिया, मेकोंग नामक जगह पर और उसपर आक्रमण हुआ, वोह अपने जहाज में कुछ व्यापारियों के साथ थे और उनपर जलडाकूओ का आक्रमण हुआ और चुकी वे बहादुर थे, उन्होंने उन जलडाकूओ के साथ युद्ध किया और उन्हें भगा दिया I दुर्भाग्यवश उस युद्ध के कारण उनके जहाज में छेड़ हो गया उन्हें अपने जहाज की मरम्मत्त के लिए अपने कर्मीदल के साथ समुद्री तट पर आना पड़ा I तभी वहां का स्थानीय कबीला जो अपने आप को नाग कुटुम्भ का बताते थे, तय किया कि वे उनपर आक्रमण करेंगे I तो निःसंदेह उन्हें घेर लिया गया और कौण्डिन्य ने फिर से, एक बहादुर युवक होने के नाते अपनी तलवार निकाली अपने आपको बचाने के लिए I जब नाग कुटुम्भ की राजकुमारी ने उन्हें देखा तो उनसे प्रेम हो गया, उनका नाम, उन्हें कई नामों से जाना जाता हैं अलग अलग परंपरागत कथाओं में, मगर उनका नाम प्रायः सोम हैं, तो सोम – यानी जिसका चेहरा चाँद सा हों, कौडिन्य को देखा और उनसे प्रेम हो गया और उनके आगे विवाह प्रस्ताव रख दिया मुझे लगता हैं कौडिन्य के पास और कोई विकल्प नहीं था और उनसे विवाह कर एक राज वंश तो शुरू किया, इस वंश ने आगे चलकर, बहुत, बहुत वर्षों बाद अंकोर और खमेर संस्कृतियों की नीव राखी और निस्संदेह चरमे संस्कृति की नीव रक्खी दक्षिणी वियतनाम में I

इसमें आश्चर्यजनक बात यह हैं कि काफी हद तक यह वंश मात्रिवंशी थे मात्रिस्वामी नहीं I वे अपनी निशानी अपनी स्त्री जाती से ही खोजतें हैं, जो वाजिब भी हैं क्योकि आखिर कार कौडिन्य की उन्नति और प्रभुत्व पर दावा अपनी पत्नी के द्वारा ही था, और यह दिलचस्प बात हैं कि इस बात को आज भी हज़ारों सालों बाद भी याद रखा गया हैं, क्योकि आप साफ़ देख सकतें हैं की कई राजा सत्ता मैं अपनी स्त्री जाती के द्वारा ही आयें हैं I तो यह बात सन्निहित हैं और यह कहानी सुराग बन जाती है उस पौराणिक कथा की जिसपर अधिकतम साउथ ईस्ट एशिया की संस्कृतियाँ खडी हैं I वे सब मात्रिवंशी हैं और नाग की मूर्तियाँ भी महत्व रखते हैं I

तो आप देख सकतें हैं कि हर जगह, उत्तरी मलेशिया में एक प्रमुख स्थल हैं जिसका नाम भुजंग वैली है, जो एक ज़माने में कदरम राज्य कहलाया जाता हैं I अब आप सोचिये इस जगह को भुजंग वैली कहतें हैं, भुजंग का मतलब हैं नाग, और यह भुजंग हर जगह पायीं जाती हैं I बहुत, बहुत वर्षों बाद जब चोला राजा साउथ ईस्ट एशिया के साथ आयात के लिए बन्दरगाह बनातें हैं तो उस बन्दरगाह को क्या नाम देतें हैं ? नागापट्टिनम I

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