बुधवार, सितम्बर 26, 2018
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भारत का इतिहास महाद्वीपी ही नहीं, बल्कि वोह सामुद्रिक भी हैं

मेरे आज की चर्चा का विषय हैं, भारत का समुद्री इतिहास और मेरे हिसाब से यह विषय आपलोगों को इसलिए दिलचस्प लगेगी क्योकि, भारत का सामुद्रिक इतिहास इस जगत के महान सामुद्रिक इतिहासों में से एक हैं लेकिन दुर्भाग्यवश इतिहास की किताबों में हम भारत के महाद्वीपी इतिहास के बारें ही में जान पातें हैं उसके सामुद्रिक इतिहास के बारें में नहीं I तो यदि आप विशेषज्ञ हैं, आप को एक बार माफ़ भी किया जा सकता हैं यह मानने के लिए के भारत का इतिहास राजवंशों की एक श्रंखला हैं जिन्होंने पाटलिपुत्र पर राज्य किया, और फिर उन राजवंशियों का जिन्होंने दिल्ली पर राज्य किया, और वे लोग जो आज दिल्ली पर शासन कर रहें हैं I

तो मेरी धरना हैं कि मैं आपको इतिहास का दूसरा पहलू दिखा दू और यह कोई सैधांतिक भावात्मक पहलु नहीं हैं, क्योकि, इसके यथार्थ सम्बन्ध यह है कि हम अपने संसार के बारे में कैसे सोचतें हैं I क्योकि यदि हम अपने इतिहास का दृष्टिकोण सिर्फ महाद्वीपी रखेंगे तो यह मत तैयार होगा कि हम, हमारे पडौसी सिर्फ चाइना और पाकिस्तान तक ही सीमित हैं, पर वास्तव में अगर हम भारत की सामुद्रिक दृष्टिकोण से देखें तो असल में हमारे पडौसी एक तरफ इंडोनेशिया हैं और दूसरी तरफ ओमान I मैं श्री लंका और मालदीव्स की बात इस लिए नहीं कर रहा क्योकि शायद भारत का सामुद्रिक इतिहास दूर वियतनाम तक हो I भारत के सामुद्रिक इतिहास का परितंत्र इतना विशाल हैं और मैं आपको इसका एक अनुमान ही दे सकता हूँ I

मेरे पास ज्यादा समय नहीं हैं, मैं आपको एक लम्बी एकालाप से तंग नहीं करूंगा, मुझे अवश्य ही चयनात्मक रूप से विषय को रखना होगा, ताकि कहानी की धरा बनी रहें, आशा हैं की मैं आपको एक अंदाजा दे सकूंगा I संयोग वश आज मैं जो आप से कह रहा हूँ वोह कुछ हद तक मेरी किताब से ली गयी हैं जो इस वर्ष के उत्तरकाल में छापी जाएगी, उस किताब का नाम हैं अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया’स जियोग्राफी I इस किताब का मुख्य शीर्षक हैं लेकिन अभी तक हमने उसको तय नहीं किया हैं, मगर वोह हैं भारत के भूगोल का एक छोटा इतिहास I

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