सोमवार, अक्टूबर 22, 2018
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जन्म का महात्म्य और हिन्दू धर्मं में गर्भपात को ब्रह्म्हाया क्यों माना गया हैं ?

जन्म इतना महतवपूर्ण क्यों हैं? हमारे हिन्दू सम्प्रदाय में जन्म देना एक पवित्र बात मानी गयी हैं, बहुत बड़े पुण्य की बात, एक धार्मिक क्रिया जिसका पुण्य बहुत महान हैं, क्यों ? क्योकि जन्म देना सिर्फ बच्चे पैदा करना नहीं हैं, जो आजकल की भाषा में माना गया हैं I वोह केवल बच्चे पैदा करने की क्रिया ही नहीं हैं I वोह एक प्रक्रिया हैं, एक जीव को अवकाश देने कि; सिर्फ पैदा करने की प्रक्रिया नहीं हैंI हिन्दू धर्मं में पुनः, पुनः जन्म का विश्वास हैं, जबतक की मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती; मोक्ष ही परम लक्ष्य हैं I मगर उनको यात्रा करनी पड़ती हैं, हर बार जन्म लेकर, इसीलिए हर जन्म एक जीव की जीवनयात्रा में महत्वपूर्ण होता हैं, एक जीव, कुछ जीवों के साथ जिनके साथ आपका एक कार्मिक संयोग होता हैं, एक रिश्ता बेटे की तरह यह बेटी की तरह, उस जीव को अवकाश प्रदान किया जाता हैं दैहिक संसार में और फिर प्रत्यक्ष होने का, और फिर आपकी यात्रा आगे बढ़तीं हैं, अपने कार्मिक यात्रा को पूर्ण करने की, मोक्ष के और पास जाने की I

तो यह जन्म एक महत्त्वपूर्ण बात हैं, जन्म देने की क्रिया को इसी कारन एक अत्यधिक महत्त्वपूर्ण धार्मिक क्रिया माना गया हैं, क्योकि आप जीवों को अवसर प्रदान कर रहें हैं अपनी यात्रा में आगे बढ़ने का I तो हम इसको, किन परिस्थितियों के कारण इस कार्य में व्यावधान आता हैं ? एक हैं गर्भपात; जब आप स्वेच्छा से निर्णय लेते हैं बच्चा न पैदा करने की, गर्भपात को हमारे परंपरा में ब्रह्महत्या के सामान माना गया हैं, क्यों ? यह ब्रह्महत्या क्या है ? आजकल के ज़माने में ब्राह्मण, जाती, यह सब ब्राह्मणों की बातें, आप सोच रहें होंगे कि यह सब क्या हैं I

ब्रह्महत्या को समझने के लिए आपको जानना होगा कि हमारे परंपरा में ब्राह्मण की परिभाषा क्या हैं I ब्राह्मण वोह हैं, हमारे स्मृतियाँ कह्ती हैं, विशेषकर मनुस्मृति, कहती हैं कि ब्राह्मण वोह हैं जो सबका मित्र होता हैं I ब्राह्मण वोह हैं जिससे किसी को भय नहीं होता क्योकि वोह मन, वाणी या आचरण से किसी को भी कष्ट नहीं पहुंचाता हैं, सही हैं ना ? और ब्राह्मण वोह हैं जो सदा सत्यवादी होता हैं, अहिंसात्मक होता हैं, जो सदा अपनी इन्द्रियों को सय्यम में रखता हैं, जो कभी अपराध नहीं करता, जो कभी अनैतिक कार्य नहीं करता I तो इस प्रकार उल्लेख किया गया हैं ब्राह्मणों के बारें में I ब्राह्मण वोह हैं जिसने ब्रह्म को जाना हैं, साधुता की मूर्ती हैं I तो जब कहा जाता हैं कि ब्रह्महत्या एक बहुत बड़ा पाप हैं, तो इसका तात्पर्य यह हैं कि एक निरपराध जीव को मारना एक बहुत बड़ा पाप हैं और वोह अजन्मा शिशु भी निरपराधी हैं और इसीलिए गर्भपात को एक बहुत बड़ा पाप माना गया हैं और उसे ब्रह्महत्या के बराबर माना गया हैं I

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