बुधवार, अगस्त 21, 2019
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आखिर ‘रुढ़िवादी’ शब्द का तात्पर्य क्या है?

जब हम खुद को रूढ़िवादी कहते हैं तो वास्तव में उसका क्या तात्पर्य है? मेरा मानना है की हम इससे चार चीज़ें दर्शाते है |

सबसे पहले कि हम तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर हमारे विचारों को खड़ा करते है। हम किसीकाल्पनिक दुनिया में रहने वाले उदारवादी नहीं हैं, हम मिथ्या प्रचारोंमें विश्वास करने वाले वामपंथी लोग नहीं हैं। एक रूढ़िवादी होने के नाते, दक्षिणपंथीहोने के नाते, हम मानते हैं की तथ्यों और आंकड़ों पर ही हमारी राय आधारित होनी चाहिए।

दूसरी बातयह है कि हम दुनिया को वैसे ही देखते हैं जैसा की वह हैं, हम दुनिया को वैसे नहीं देखते हैं जैसे हम उसे देखना चाहते हैं और यही वह बात है जो की उदारवादी या दूसरी मतों सेहमें अलग करती है, चाहे वह वामपंथी हो या किसी दूसरी तरह की मत हो। हम दुनिया को ठीक से देखते हैं, हम दुनिया को वैसे ही देखने की कोशिश करते हैं  जैसे की वह है। अब यह कर पाना बहुत कठिन काम है। क्योंकि हम सभी अपनी खुद की समझ, हमारी अपनी सामाजिक स्थिति के द्वारा में प्रभावित होते है, यह सब हमारे विचारों को प्रभावित करता हैं। तो यह दुनिया कोउसके असली रूप में देख पाना लगभग असंभव है, लेकिन ऐसा करने के लिए हम अपनी पूरी कोशिश लगा देते है।

तीसरी बात, हम यह मानते हैं कि स्वतंत्रता और आज़ादी महत्वपूर्ण है और इन चीज़ों की पूरी आवश्यकता है। लेकिन केवल यही एकमात्र महत्वपूर्णचीज़ें नहीं है। आजकल हम लोगों में बहुत सारे बहसहोते हुए देखते हैं, वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कहते हैं, वे कि स्वतंत्रता की बातें करते है, यह मेरा अधिकार है, मैं ऐसा करना चाहता हूं, मुझे आजादी चाहिए, हमारी कुख्यात आजादी का नारा हमें जेएनयू से मिलती हैं। उनका तर्क यह है कि सभ्यताओं कीवृद्धि पूर्ण स्वतंत्रता या अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता के कारण ही हुई है। लेकिनरूढ़िवादी होने के नातेहम उस से असहमत हैं। हम कहते हैं कि यह महत्वपूर्ण है, जबकि यह एकमात्र महत्वपूर्ण बात नहीं है। इसके अलावा अन्य कारक भी हैं |समाज में एक संतुलनबनी रहनी चाहिए|इसके बिनाकोई स्वतंत्रता नहीं है, एक राष्ट्र के बिना–एक मजबूत राष्ट्र के यह सब संभव नहीं है | एक राष्ट्र ही है जो आपकी स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने का वचन दे सकती है और आपको स्वतंत्रता देने की वचन दे सकती है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित रख पाने की भीवचन दे सकती है | अगर राष्ट्र नहीं रहा तोये सारी चीज़ें उपलब्ध नहीं होंगी |आप उनके बारे में केवलबात कर सकते हैं, आप विभिन्न अधिकारों के बारे में बात कर सकते हैं कि ‘यह मेरा अधिकार है , वह मेरा अधिकार है ‘ लेकिन वह अधिकार तब ही उपलब्ध होगा जब इसे राष्ट्रके द्वारा लिखित और वचनबद्ध किया जाता है, अन्यथा आपके अधिकारों को लागू करने के लिए कोई भी नहीं है | इसलिए हम एक मजबूत राष्ट्र में, और एक प्रभावी राष्ट्र मेंविश्वास करते हैं।

चौथी बात यह है कीभारत मेंहम मानते हैं कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति एक अनूठी चीज़ है जिनकी रक्षा होनी चाहिए, और इसका खुद का बचाव करने का अधिकार है और उसे पनपने का अधिकार है और इसके पास खुद को भी प्रचार करने का अधिकार है | यह उदारवादी पक्ष या वामपंथियों के धारणा|

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