राष्ट्र की भूमिकाएं क्या हैं और राष्ट्र को अपने नागरिकों को पूर्ण स्वतंत्रता क्यों नहीं देनी चाहिए

 

हम यह मानते है कि स्वतंत्रता, आज़ादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण रूप से महत्वपूर्ण है। हम यह भी कहते हैं कि पूर्ण स्वतंत्रता और पूर्ण आज़ादी अराजकता के सिवा और कुछ नहीं है | अगर सभी को इजाजत दी जाती है के वह अपनी अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी कर सके, तो यह सिर्फ अराजकता होगी | और रूढ़िवादी होने के नाते हम यह मानते हैं कि आज जो स्थिरता है, वह एक असाधारण परिस्थिति है। इतिहास में कुछ भी स्थिर नहीं है | इतिहास में कुछ भी शांतिपूर्ण नहीं है |

इतिहास के इन अवधियों को देखे तो जिस अवधि में हम भारतीय राष्ट्र की उपस्थिति से आज जी रहे हैं, मेरा विश्वास कीजिये कि यह एक असाधारण अवधि है। अन्यथा आपका इतिहास हमेशा हिंसक और अराजक रहा है – विभिन्न प्रकार की आक्रमण के कारण, विभिन्न शक्तियों के आने के कारण, विभिन्न प्रकार के जो आक्रमण चला हैं इन सभी के कारण; और यह दुनिया भर में सच है। प्रकृति शांतिपूर्ण नहीं है | दुनिया शांतिपूर्ण नहीं है | स्थिरता स्वाभाविक नहीं है | स्थिरता तो कृत्रिम तरीके से बनाई गई है | इसलिए हम स्वतंत्रता और स्वतंत्रता से सहमत होते हुए भी यह मानते हैं कि सुव्यवस्था और स्थिरता समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। और यही कारण है कि हमारे पास एक राष्ट्र है |

अब लोग कहते हैं कि भारत राष्ट्र एक दमनकारी राष्ट्र है। उदारवादियों में ऐसे बहुत से लोग कहते हैं कि भारतीय राष्ट्र बहुत ही दमनकारी है। वामपंथी लोग कहते हैं कि भारतीय राष्ट्र पूरी तरह से उखड फेकना चाहिए क्योंकि यह एक अशुभ रचना है। लेकिन परिभाषा से ही सभी राष्ट्र दमनकारी है | राष्ट्र अस्तित्व में क्यों आते हैं? दो चीजों की वजह से राष्ट्र अस्तित्व में आया। नंबर एक, लोगों की रक्षा करने के लिए | अपने लोगों को, जिनको उन्होंने अपने लोग कहकर वर्गीकृत किया है; और जो दूसरी चीज है वह सुनने में अच्छा नहीं लगता, लेकिन दूसरों के साथ युद्ध करने के लिए। अगर आप इतिहास में झाकके देखे तो यही राष्ट्र की उत्पत्ति है। आप कई अन्य सिद्धांतों को ले सकते हैं, जैसे कि मार्क्सवादीयों ने ऐसा कहा है या फिर वैसा बताया है, लेकिन मेरी राय में यह बात बहुत सरल है, अगर आप इतिहास में जितना संभव हो उतना पीछे झाकके देखे।

अब बात यह है की राष्ट्र बहुत ही दमनकारी है, और ऐसा उसके परिभाषा के कारण ही है। लेकिन हम राष्ट्र को सहन करते हैं, हमें राष्ट्र की आवश्यकता है। क्यूं? क्योंकि हम कुछ प्रकार की सुरक्षा और स्थिरता के बदले में हमारी कुछ स्वतंत्रता और आज़ादियों का सौदा करते हैं।

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