इंजीलवाद और हिन्दुओं की रक्षा भाषण के अंश स्वतन्त्रता आन्दोलन

पुर्तुगाली शाषण काल में हिन्दुओं के साथ हुए धार्मिक अत्याचार

 

फिर १६२० में, वाइसराय ने आदेशपत्र निकाला कि कोई भी हिन्दू पुर्तुगाली क्षत्र में ववाह नहीं कर सकतें I हिन्दुओं को जबरन नदी कि उस पार आदिल शाह के क्षेत्र में जाना पड़ता था विवाह हेतु I वे अपने बंधू-बांधवों का मृतसंस्कार भी नहीं कर सकतें थे I उन्हें नदी के मध्य में नौकाओं में अपने परिजनों का दाहसंस्कार करना पड़ता था क्योकि उन्हें द्वीप पर ऐसे अनुष्ठानो की अनुमति नहीं थी, केवल इसीलिए कि वे हिन्दू प्रथा थी और इसीलिए विधर्मी मानी जाती थी I हिन्दुओं का दुःख कोंकण भाषा के लोकगीत में दर्शाया गया हैं I मुझे नहीं मालूम आपमें से कितनों ने इस गीत को सुना होगा, बॉबी पिक्चर में यह गाना हैं I “आओ साहेबा पोल्तोदी वोइता दामू ना लग्नानी कोइता…..” आओ साहेबा पोल्तोदी वोइता, पोल्तोदी वोइता का अर्थ हैं, “मुझे नदी के उस पार जाना हैं” I वो पद ‘मुझे नदी के उस पार जाना है’ एक उदासीन अर्थ रखता हैं गोवा में, क्योकि इसका अर्थ हैं, मैं पुर्तुगाली क्षेत्र से पलायन करना चाहता हूँ, “मुझे नदी के उस पार जाना हैं, एक सुरक्षित क्षेत्र में जाना हैं” I और इसीलिए गायक गाता हैं “हाव साहिबा, पोल्तोदी वोइता दामू ला लग्नानी कोइता” I दामू उपमा हैं एक हिन्दू की I तो मुझे दामू की शादी में जाना हैं, इसीलिए मुझे नदी के पार जाना हैं I” मुझे एक सुरक्षित जगह पर जाना हैं, “मका साहिबा वाट कलना I” मुझे नदी के पार जाने से रोका जा रहा हैं I हे नाविक मुझे उस पार ले जाओ I “घे, घे, घे, घे रे, घे रे साहिबा” और दूसरा गायक कहता हैं, “मैं नहीं ले जाऊंगा क्योकि मुझे पुर्तुगालिओं से डर लगता हैं I” तो पूरे गाने में में यही कहा जाता हैं, कि मैं तुम्हे अपनी चूड़ियाँ दूँगी, अपनी नथनी दूँगी, अपने पैरों के नुपुर दूँगी, मैं तुन्हें अपना सारा सोना दूँगी, लेकिन हे नाविक मुझे उस पार ले जाओ I मुझे अपने धर्म की रक्षा करनी हैं I इस गाने का सही अर्थ यह हैं I लेकिन आज कल यह एक ख़ुशी का गीत बन गया हैं I लेकिन इसमें बहुत करुना का भाव हैं I

और फिर १६६९ में पुर्तुगाली सम्राट का सबसे दुष्टतम और भयानक आदेश आया I सम्राट का आदेश था कि हिन्दू घरों के अनाथ शिशुओं को केथोलिक समाज के धर्माध्यक्ष को सौंप देना चाहिए, ताकि वे इसाई धर्म में परिवर्तित किये जा सके, उनकी सिक्षा इसाई सम्प्रदाय के अनुसार हो सके I इस आदेश में यह भी निद्रिष्ट किया गया था कि, यह क़ानून केवल उन शिशुओं पर लागू होता हैं जिनके माता-पिता, दादा-दादी इत्यादि कोई भी जीवित नहीं हैं I पहली बात यह कि यह आचरण भी ठीक नहीं, जो भी हो, एक निर्देश था I लेकिन असल में होता यह था कि यदि किसी कि माता, या फिर दादा या फिर नानी की मृत्यु भी घर में हो जाती थी, तो शिशु को उठा लिया जाता था और इसाई धर्माध्यक्ष को सौप दिया जाता था I और वे क्या करते थे ? सबसे पहले शिशु की शिखा काट देते थे, इससे यह होता था कि शिशु चाहकर भी घर वापस नाहिं जा सकता था, क्योकि उन दिनों के धर्म्परायानता के चलते उस शिशु को समाज से बहिस्कृत किया जाता था, यहाँ तक कि उसका परिवार, बंधू-बांधव उसे अस्वीकार करते थे I परिणामस्वरूप शिशु के पास और कोई विकल्प शेष नहीं रहता था I फिर शिशु को कुछ खाने को दिया जाता था, और फिर कहा जाता था कि अब शिशु ने ईसाईयों के साथ भोजन किया हैं I इसीलिए अब से वोह भी इसाई हो गया, और अभी आप कुछ नहीं कर सकते I यदि एक ४ वर्ष, ५ वर्ष, ६ वर्ष के शिशु का इस प्रकार धर्मपरिवर्तन किया जाता तो स्वाभाविक रूप से उस शिशु पर स्नेह के कारण उसके माता-पिता, परिवारजन इसाई बन जाते थे I

आप किसी माता को यह नहीं सकते ना, कि अब आपका बच्चा इसाई बन गया हैं, अब उसे छोड़ दो I माता चाहेगी कि वो अपने शिशु के पास रहें, इसीलिए वो भी इसाई बन जाती थी I तो इस प्रकार कई लोगों का धर्मपरिवर्तन किया जाता था I और फिर कई लोगों को संपत्ति का लालच देकर धर्म परिवर्तित किया जाता था I हिन्दू धर्म के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती हैं तब उसकी पुत्री को अपने पिता की संपत्ति में अधिकार नहीं होता I क्योकि उसे कन्या धन दिया जाता हैं I पुर्तुगालियो ने कहा कि जब कोई हिन्दू व्यक्ति कि मृत्यु होती हैं, यदि उसकी पुत्री, या उसकी विधवा इसाई बन जाती है तो उसे अपने पिता की या पति की सारी संपत्ति प्राप्त होगी I यदि पुत्री और पत्नी अस्वीकार करें, और पुत्र इसाई बन जाए तो उसे सारी संपत्ति प्राप्त होगी, यदि कोई पुत्र नहीं है तो उनके आत्मीय यदि इसाई धर्म को अपनाते हैं, तो उनकी संतान को छोड़ो सारी संपत्ति उन्ही को प्राप्त होगी I तो इस प्रकार इसाई धर्म अपनाना लाभदायक बनाया गया I

एक और बात, यदि आप किसी हिन्दू के दास हो, या फिर मुसलमान, उन दिनों गोवा में दासत्व हुआ करता था, यदि कोई दास इसाई बन जाता था, तब वोह दास नहीं कहलाता था I तो इसी कारण कई लोगों ने दासत्व से मुक्ति हेतु इसाई धर्म को अपनाया I तो इस प्रकार इसाई धर्म का प्रचार किया गया I कई बार वे ब्रेड के टुकड़ों को या फिर गौमांस को सामूहिक जलाशय में डाल देते थे, जैसे कोई कुआ, तालाब, पौखरा इत्यादि, और जब लोग उस जल को ग्रहण करते, तो वे कहते, अब आपने इस जल को ग्रहण किया है, जिसमे गौमांस था I अब आप हिन्दू नहीं रहे, आपका समाज आपको स्वीकार नहीं करेगा, इसीलिए आपके पास एक ही विकल्प हैं, इसाई बन जाना I

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