बुधवार, मार्च 27, 2019
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गोवा के धर्मं न्यायाधिकरण में ‘ऑटो दा फे’ और अन्य यातनाओ के तरीके

 

चार्ल्स देल्लों ने धर्मं न्यायाधिकरण के महल को वर्णित करते हुए लिखा हैं, कि वह एक भयानक, भव्य, भवन था जिसमे २०० बंदीगृह हुआ करते थे, जो अंधकारमय और बिना किसि खिडकिओं के हुआ करता था I देल्लों के अनुसार उन दो जिज्ञासुओं के रहने के शिविर और उनका चैपल उसी महल में हुआ करता था I सारे जिज्ञासुओं को मनोनीत पुर्तुगल के सम्राट किया करतें थे, जिन्हें फिर रोम के बड़े पादरी स्थायी करार देते थे और उन्हें अर्च्बिसोप और वाइसराय की अपेक्षा अधिक सम्मान प्राप्त था I फिलिप्पे रेने वईके ने १९०३ में अपनी पुस्तक में लिखा हैं, कि धर्मं न्यायाधिकरण के उस महल में किये गए अत्याचारों ने इस प्रकार से लोगों के मस्तिष्क में भय पैदा कर दिया था कि स्थानीय लोग उस महल को धर्मं न्यायाधिकरण का भवन कहने से डरते थे, लेकिन उसे एक रहस्यमय नाम से पुकारतें थे, ‘होडले घर’ I

चार्ल्स देल्लों ने ऑटो डा फे का वर्णन दिया हैं, वह क्रूर अनुष्ठान जिसमे अपधर्म के दोषी लोगों को जीवित जलाया जाता था I जिन लोगों पर मुक्क़दामा चल रहा था उन्हें पहनने के लिए पीले रंग के वस्त्र दिए जातें थे, जिसपर संत एंड्रू का चित्र लाल रंग में वस्त्र के आगे और पीछे बना हुआ करता था I इन वस्त्रों को सम्वेनितोस कहते थे I जिन लोगों को अपराधी पाया गया था उनके वस्त्रों को समारा कहा जाता था, और उन वस्त्रों के आगे-पीछे उन अपराधियों के चित्र हुआ करते थे, और दोनों तरफ जलतें अंगारों के साथ पिषाचों का चित्र हुआ करता था जो यह दर्शाता था कि यह अभागे नरक की ओर जा रहें हैं I  जिंदा जलाने से पहले उन दोषियों से केवल एक प्रश्न पूछा जाता था I क्या तुम एक ईसाई की तरह मरना चाहतें हो कि नहीं ? यदि उन्होंने कहा कि वेह इसाई कि तरह मरना चाहतें हैं तब पहले उनका गला घोटा जाता था, अनुकम्पा के रूप में और फिर जलाया जाता था, और जो लोग इनकार करतें थे, उन्हें जिंदा जलाया जाता था I याद रहें धर्मं न्यायाधिकरण का अधिकार क्षेत्र जीवित और मृत, दोनों लोगों पर सामान रूप से लागू होता था I तो यदि किसी ने कहाँ कि यह मृत व्यक्ति, और यह विशेषतः अमीरों के साथ हुआ करता था I यदि कोई गवाह यह कह दे, कि एक व्यक्ति जिसकी मृत्यु ३ वर्ष पूर्व हो चुकी हैं, वह एक हिन्दू था, या यहूदी था, धर्मं न्यायाधिकरण को अधिकार था कि वे उस व्यक्ति के अवशेषों को पुनः निकालकर, उन अवशेषों पर मुकादमा चलाकर उन्हें दोषी करार दे सकते थे I उन अवशेषों को जलाया भी जा सकता था I और जैसे ही उन्हें दोषी करार दिया जाता था उस व्यक्ति की संपत्ति चर्च की हो जाती थी I ऐसा विशेषकर अमीरों के साथ हुआ करता था I अचानक, बड़े रहस्यमय तरीके से कई लोगों को यूनानी या हिन्दू पाया जाने लगा I

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