बुधवार, जुलाई 15, 2020
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प्राचीन भारत में तर्क की कला

 

अब हम बात करतें हैं तर्क कि, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग हुआ करता था I आप इस चित्र को देख सकतें हैं आदि शंकराचार्य की जो तर्क कर रहें हैं मंदाना मिश्र के साथ, और इस तर्क का पंच कौन हैं ? उभय भारती जो एक जानी-मानी विद्वान हुआ करती थी I तो भारत में इस प्रकार ज्ञान का प्रसार किया जात था I ऐसा नहीं था कि एक व्यक्ति ने कह दिया और सबने उसे मान लिया I हर विचार धारा को चुनौती दी जाती थी, वाद-विवाद हुआ करते थे, जिसमे सब भाग लेते थे, श्नाकराचार्य और अन्य गुरुओं ने इसी प्रकार अपनी विचार धारा का प्रसार किया I वे केरल से लेकर कश्मीर तक तर्कों में भाग लिया करते थे, इस विषय में मैं बाद में बात करूंगी I

अब मैं आपके सामने कुछ तर्क की शर्तें बतातीं हूँ जिनसे आपको पता चल जाएगा कि तर्क की कला कितनी विक्सित हुआ करती थी, और वोह कितने मज़बूत आधार पर हुआ करती थी I आप युही किसी के साथ तर्क करने नहीं जा सकते थे I यह अनिवार्य हुआ करता था कि आप तर्क की शर्तों को आछी तरह से समझे I यह भी अनिवार्य हुआ करता था कि आप विपक्ष के तर्क को समझें जिसे पूर्व-पक्ष कहा जाता था I निम्नलिखित कुछ परिभाषित शब्द हैं : –

साध्य – वाद जिसे विक्सित और प्रमाणित करना था

सिद्धांत – प्रस्ताव, मत या फिर निष्कर्ष

हेतु, उदाहरण, प्रत्वक्ष, अनुमान, प्रमाण – इस प्रकार के पदों का उपयोग किया जाता था I यह एक बौधिक प्रक्रिया हुआ करती थी, यह सारा तर्क-वितर्क कि प्रक्रिया, और सबसे रोमांचक बात यह थी कि, उनके पास मापदंड हुआ करते थे जिसके अनुसार अंक दिए या लिए जातें थे I कुछ दिनों पूर्व मुझे यह सारी बातें अपनी पुत्री को बतानी पड़ी जिसे लगता था कि उसके स्कूल में जिस प्रकार के विवाद हुआ करते थे, वे उच्च श्रेणी के थे, मुझे उसे समझाना पड़ा कि प्राचीन भारत में इससे भी उच्च श्रेणी के विवाद हुआ करते थे I

तो वे कुछ इस प्रकार के पदों का उपयोग किया करते थे जब उन्हें अंक काटने पड़ते थे, जब वे प्रस्ताव को हानि पहुंचाते थे I

प्रतिज्ञना -हानि – प्रस्ताव में परिवर्तन लाना I

प्रतिज्ञना -अंतरा – प्रसात्व का विरोध करना I

प्रतिज्ञना-विरोधना – प्रस्ताव का त्याग करना I

प्रतिज्ञना-संन्यास – तर्क में परिवर्तन करना I

हेतावंतारा – दुर्बोध का प्रयोग करना

अविज्ञनार्था – बेतुका बहस करना

अपार्थाका – विषय को टालना I जब आप विषय से बचने का प्रयास करोगे तो आप बेतुके तर्क देना प्रारंभ करोगे, जिसके लिए आपके अंक कट सकते हैं, इस प्रकार कई विषयों पर अंक दिए या लिए जाते थे, केवल वासुबंधू ही नहीं बल्कि अनेक पुस्तक लिखे गए हैं वाद-विवाद पर I

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