अंग्रेजों ने भारत में अंग्रेज़ी भाषा को क्यों अधिरोपित किया

 

अंग्रजों ने अंग्रेज़ी भाषा को भारत पर क्यों लादा ? पहला कारन था सुविधा; अँगरेज़ सारे भारतीय भाषाओँ को नहीं सीख् सकते थे, और नाही उन्हें भारतीय भाषाएँ समझ में आती थी I उनके लिए यह बहुत सुविधाजनक बन गया कि उन्हें अंग्रेज़ी बोलने वाले नौकर चाकर मिल गए, अंग्रेजी बोलने वाले लोग मिल गए I तब उन्होंने तय किया कि अब उन्हें अंग्रेजी शिक्षण केंद्र प्रारंभ करने होंगे I लेकिंग उससे भी महत्वपुर्ण कारन था कि उन्हें सेना की आवश्यकता थी, जो अंग्रेजों के प्रति निष्ठावान हों I तब उन्होंने भारतीय सेना का निर्माण किया और तब उन्हें एहसास हुआ कि यदि यह लोग अपनी भाषा में इस्लामिक शिक्षा ग्रहण करते रहेंगे तब उपद्रव मच सकता हैं क्योकि मुसलमान कभी न कभी एहसास करेंगे कि अँगरेज़ काफ़िर की श्रेणी में आतें हैं, और तब वे उनसे किसी प्रकार का भी संपर्क नहीं रखना पसंद करेंगे I तब वे अंग्रेजों के प्रति निष्टावान नहीं रहेंगे I यही बात संस्कृत भाषा में पढ़ने वालों के साथ भी हो सकता था, जो आगे चलकर अंग्रेजों को दुष्ट और अशुद्ध लोग पाएंगे जिनमे धर्म नहीं, जो अधर्मी हैं I

अंग्रेजों ने एहसास किया स्थानीय भाषायों में शिक्षा ग्रहण करने का खतरा और फिर समाज का उतकृष्ट भाग, उन्होंने एहसास किया कि यदि उन्हें अंग्रेज़ी में शिक्षा दी जाए, तब अंग्रेजी भाषा से सुपरिचय और उस भाषा में लिखे शास्त्र समूह पढने के उपरांत भारतीय महान अंग्रेजों के बारे में उतने ही उत्साह से बात करेंगे जितने कि अँगरेज़ I वैसे यह मेरे वाद नहीं हैं, यह सारे कुछ मकाउले के बहनोई ट्रेवेल्यन ने लिखा हैं I उनका भारत के शिक्षा प्रणाली में बहुत बड़ा योगदान रहा हैं I उन्होंने आगे लिखा हैं कि अंग्रेजी भाषा से सुपरिचय होने से भारतीय महान अंग्रेजों के बारे में उसी उत्साह के साथ बात करेंगे जितना कि अँगरेज़, भारतीय ब्राह्मणों द्वारा सिखाया हुआ ज्ञान अस्वीकार करेंगे, देशवासी अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह नहीं करेंगे क्योकि उनका उद्धार अँगरेज़ करेंगे I यह एक बहुत अच्छी तरह से सोची-समझी प्रणाली थी, १५ वर्ष के अन्ग्लासिस्ट-  ओरिएनटलिस्ट विवाद के बाद आया मकाउलाय्स मिनट I

मकालुय मेमोरेंडम जिसे परिचालित किया गया ताकि इस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके कि भारत में किस प्रकार की शैक्षिक संस्थानों का गठन होना चाहिए I तब उन्होंने उस विवाद के बाद इंग्लिश एजुकेशन एक्ट १८३५ लागू किया I हम बात करेंगे मेरे कॉलेज के मिनट के बारे में I कहा जाता हैं, निश्चित रूप से आप में से कई लोगों को इसके बारे में पता हैं I कहा गया हैं – वर्त्तमान में हमे हर संभव प्रयास करना चाहिए एक ऐसे वर्ग की स्थापना करने का जो हमारे और लाखों देशवासियों, जिनपे हमे साशन करना हैं, के मध्य अनुवादक का काम कर सके, एक ऐसा वर्ग जिनका लहू और वर्ण है तो देसी लेकिन जिनके विचार, झुकाव, नैतिकता और समझ अंग्रेजी हो I इस वर्ग का काम होगा देसी भाषाओँ में पाश्चात्य वैज्ञानिक शब्दावली का प्रसार कर उन भाषाओँ को पाश्चात्य सोच को ग्रहण करने योग्य बनाना I इसके बाद ही इंग्लिश एडूकेषण एक्ट को पारित किया गया I

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