शुक्रवार, सितम्बर 20, 2019
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अतिसंवेदनशील हिन्दुओं और धर्मांतरण

प्रशन  उठता हैं जैसा उन्होंने चीफ जस्टिस की चर्चा की, कि अगर भारत संविधान से चल रहा हैं तो कन्वर्शन का अधिकार हमे दिया हुआ है I हमारे संविधान ने I और इस संविधान में धर्म प्रचार का अधिकार दिया गया था, जिसको बाद में जब नेहरू जी से पुछा गया तो उन्होंने स्पष्ठ रूप से कहा कि जब हम धर्म प्रचार का अधिकार कहते हैं तो उसमे धर्मांतरण का अधिकार भी हैं प्रोसेलिटिज़ेशन I और वह clearly कहते हैं कि वो अधिकार देते हैं I

तो यह देखते हुए कि हिन्दू धर्म या बौद्ध धर्म, या जैन धर्म, जिसको आप इंडियन रेलिगिओनिस्ट आपने सुना चुकी वे लोग प्रोसेलितिसिंग नहीं हैं I तो जो लोग प्रोसेलिटिज़ेशन करते हैं, उनकी तुलना में यह बिलकुल वल्नरेबल हैं I जिसको कहा जाये शिकारी धर्मों के सामने ये असहाय है I और यह हिन्दू धर्म की मजबूतियां अपनी जगह हैं, लेकिन हमारे चिंतको ने इस बात को नोट किया था कि इस बिंदु पर हिन्दू धर्म वल्नरेबल हैं I हिन्दू धर्म वाले लोग वल्नरेबल हैं I क्यों ? क्योकि वह सामूहिकता में नहीं सोचते I उनका धर्म संघटित धर्म नहीं हैं I उसने अपने आस-पास बाढ़ा नहीं बनाया हैं कि यह हमारे हुए और दुसरे हुए I और यह हमारी एक अर्थ में विशेषता हैं लेकिन दुसरे अर्थ में हमारी राजनैतिक कठिनाइओं का भी कारण हैं I कि  हम धर्म के नाम पर संघठित नहीं हो सकते, क्योकि  हिन्दू धर्म अपने स्वाभाव से ही खुला हुआ है I वह इस तरह के संघटन बना नहीं सकता I

और इस तरह की कोशीशे लग भाग विफल होती रही है I और यह अलग विषय हैं, जो इतने सम्प्रदाय हैं और इतने लोग हैं, यह हमारी कमज़ोरी है या मज़बूती है I ये अलग विषय है , लेकिन यहाँ इतना ही नोट करना उपयुक्त होगा कि हमारी राजनैतिक कठिनाईओं का आधार हैं कि हिन्दू धर्म अपने चरित्र से ही स्वतंत्र है I सब लोग स्वतंत्र रूप से ईश्वर से अपना संपर्क रखा सकते है I किसी चर्च, किसी मुल्ला या किसी फादर की ज़रुरतयहाँ नहीं हैं, और यही हमारी कठिनाइयाँ भी बन जाती है I तो ऐसी स्तिथि में जैसे हम देख रहें हैं कि अगर   ३०% भारत सिकुड चूका है I और क्षेत्रफल के हिसाब से लगभग आधा भारत हिन्दुओं के हाथ से जा चूका है, और जो गति हैं उसमे दिखा रहा है कि शायद कोई। ..सिर्फ इस पर विवाद है कब यह होगा लेकिन हिन्दू अल्पमत में हो जायेंगे I और जब अलप मत में हो जायेंगे तो वहॉ होगा जो कश्मीर में हुआ, जो बांग्लादेश में हुआ, जो पाकिस्तान में हुआ I और बाहर भी, जो लेबनान में हुआ I

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