बुधवार, अगस्त 21, 2019
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असली अल्पसंख्यक कौन है?

सारे लोग मुस्लिम हो जाये, सारे लोग ईसाई हो जाये तो प्रॉब्लम क्या हैं? इसका सच पूछिए तो कोई सही जवाब देना बड़ा कठिन हैं, खास करके सचेत हिन्दुओं के लिए I फिर भी जब प्रशन हैं तो उसका उत्तर दिया ही जाना चाहिए I और वह उत्तर यह हैं कि, भारत उन महानतम सभ्यता हैं, जिसने सबसे प्रथम ज्ञान की पुस्तक दी थी, जो आज भी रिलेवेंट हैं I  यह दुनिया कि अकेली सभ्यता हैं जो न तो क्रिस्चियन हैं, न तो मुस्लिम है I इस अर्थ में वास्तव में अल्पसंख्यक सभ्यता हैं I  और जिस तरह से माइनॉरिटी की लोग चिंता करते हैं, यह भूल जाते हैं कि रियल माइनॉरिटी, विश्व के स्तर पर सिर्फ हिन्दू है I

हमारी जनसँख्या, हमर क्षेत्रफल, हमर इतिहास ऐसा हैं कि हम अभी तक विज़िबल हैं आज भी दुनिया में I लेकिन यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि भारत का कोई अंतर्राष्ट्रीय अल्ल्य नहीं हैं, भारत के लिए कोई इंटरनेशनल कैंपेनिंग या फंडिंग करने वाला नहीं है I और नॉट ओनली थिस, यह जो क्रिस्चियन कम्युनिटी है, मुस्लिम कम्युनिटी हैं, दोनों के कम से कम लीडर, लीडरान, सचेत रूप से समझते हैं कि वे एक्चुअली बहुसंख्यक हैं I  और यह सिर्फ समय की बात हैं कि वह भारत पर भी अपना बहुसंख्यक वाली स्तिथि बना लेंगे I

और अब, खास करके हमारे विद्वानों और पत्रकारों के कृपा से उन लोगों ने अपनी भाषा बदल दी हैं, वर्ना आज़ादी के पहले वह खुलके बोलते थे ी मुझे लगता है मौलाना। .. १९३६ की बात हैं डॉक्टर आंबेडकर ने अपनी पुस्तक में विस्तार से उनका उल्लेख किया है ी कोई शाम खान थे I मैं नाम भूल रहा हूँ ी  १९३६ के लगभग की बात हैं I उन्होंने खुल के कहा था, कि हिन्दुओं के शाशन करने की क्षमता क्या है? यह तो एक अल्पसंखयक समुदाय हैं I इन्हे सेशन करना नहीं आता है I यह आपसी लदायिओं में, या आपसी छुआ-छूत  में व्यस्त रहते हैं I किसी के घर का पानी पिके अछूत हो जाते है I मुसलमानों ने शाशन किया हैं और मुसलमान ही शासन करेंगे I और वह पोईंटेडलय यह शब्द बोलते हैं, कि हिन्दू माइनॉरिटी है I तो वह किसकी तुलना में अपने आप को मेजोरिटी समझ रहे थे ? वह अपने आप को वर्ल्ड उम्मा समझते है I इसलिए ये न केवल टेक्निकल बात हैं कि हिन्दू दुनिया के, भारत दुनिया का एक मात्र हिन्दू देश हैं I बल्कि वास्तव में यहाँ रहने वाले हिन्दुओं की अंतराष्ट्रीय हैसियत वह सुच मच एक माइनॉरिटी की है I तो जो लोग मिनोरिटिस्म के इतने पेहरोकार हैं, उनको यह बताया जाना चाहिए कि आपको जब दुनिया इतनी छोटी हो रही हैं, और दुसरे समुदाय अपने आप को वर्ल्ड कम्युनिटी के रूप में देखते हैं और इसके लिए लड़ाईकरते हैं, इसके लिए स्ट्रेटेजी बनाते हैं और खुले आम करते हैं ी

उन्हें यह कोई संकोच नहीं होता यह कहने में कि हमे यह..Plant the Cross । पोप आ करके दिल्ली में बोल चुके हैं I वाजपेयी जी जब प्रधान मंत्री थे I कन्वर्ट एशिया I एशियाई आगे ने पूरा हैडलाइन ही दिया था दो वर्ड का I कन्वर्टर एशिया I तो पोप दिल्ली में खड़े होक कहते हैं कि कन्वर्ट एशिया I और हिन्दुओं से यह आशा की जाती हैं कि वे उसका विरोध भी न करे I इस्पे चर्च ना करे I

तो यह जो मानसिकता हैं, यह जो अकादमिक स्तिथि हैं मेरे विचार से यह ज़्यादाखतरनाक हैं I जो स्टेटिस्टिक्स हम देखे रहे थे, वह ज़रूरखतरनाक हैं I लेकिन मेरे ख्याल से ये उससे ज़्यादाखतरनाक स्तिथि हैं, कि स्वयं हिन्दू परिवारों के जन्मे हुए लोग विभिन्न विचार धाराओं, मत वालों के प्रभाव में इसको कोई चिंता का विषय नहीं समझते I

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