भाषण के अंश श्री अरबिंदो

हिन्दू मुस्लिम रिश्तों पर श्री औरोबिन्दो के विचार

लेकिन सबसे संक्षेप में और सबसे सटीक रूप से श्री औरोबिन्दो ने इस बात को रखा था I और एक जगह नहीं, बार बार I जब वह political leader थे और अखबार का सम्पादन करते थे, उस समय का उनका एक आर्टिकल मुझे मिला १९०९ का “Swaraj And Musalmaans ” I उसमे बिलकुल संक्षेप में और सटीक रूप में लिखते हैं कि, हिन्दू मुस्लिम समस्या का समाधान क्या है ? और १९०९ में यह समस्या दुसरे रूप में थी I लेकिन उसका essential character यही था I और उनके कई निबंध हैं जिससे आपको पता चलेगा कि बंगाल में स्वाधीनता आंदोलन को कुचलने के लिए, मुस्लिम गुंडों का इस्तेमाल किया I इसपर श्री औरोबिन्दो के कई article और सम्पादिकी है I और यह एक known fact था कि वह, जैसे police के साथ-साथ मुस्लिम गुंडों का इस्तेमाल करते थे I स्वतंत्रता आंदोलन के लोगों को कुचलने के लिए I उसी सिलसिले में श्री औरोबिन्दो कहते है कि यह जो समस्या हैं, हिन्दू-मुस्लिम, communal unrest की, या हिंसा की, अविश्वास की वह कहते हैं कि इसको हमे स्पष्ट रूप से देखना चाहिए I इसमें कोई चतुराई नहीं करनी चाहिए I

हमे मुसलामानों को उसी तरह अपना भाई और भारत माता की संतान समझना चाहिए जैसे हम है I  और इसीलिए उनके साथ सबसे पहली बात बराबरी से व्यवहार करने चाहिए I दूसरी बात यह, कि यह नहीं हो सकता हैं कि वे धर्मान्तरण करते रहेंगे और हम नहीं कराएंगे I अगर धर्मांतरण होगा तो दो तरफ़ाखुला हो जाना चाहिए I आप धर्मान्तर करेंगे? हम भी धर्मान्तरा कराएँगे I अगर वह नहीं होना चाहते नहीं होंगे, लेकिन हम मुसलमानों तक, इसाईओं तक अपनी, अपना धर्म सन्देश या ज्ञान सन्देश हम ले जाये, उसी तरह जैसे missionary लोग ले जाते है I और इस बात को सचेत रूप से करने में कोई दिक्कत नहीं है, और यह करना चाहिए I श्री औरोबिन्दो कहते है, इसके बाद यह मुसलामानों पर हैं कि अगर politics में वह भाई की तरह वह हमारे साथ आना चाहते हैं, हम उन्हें गले लगाएंगे और अगर वह पहलवान की तरह आना कहते हैं तो हमे उनके साथ लड़नेके लिए तैयार रहना पडेगा ी ये श्री सुरोबिन्दो ने स्पष्ठ रूप से कहा हैं I

और तीसरी बात जो उन्होंने कही है वह इसी से मिलती-जुलती हैं जिस निष्कर्ष पर मैं पहुंचा हूँ I उनोने कहा कि हमे मुसलमानो के सामने इस्लाम और मोहम्मद का उन्होंने term लिया तहत “more just “, justier interpretation या justier facts उनके सामने रखने चाहिए I या दुसरे अर्थ में मुसलामानों को अपने धर्म के प्रति वास्तव में, अपने धार्मिक इतिहास के प्रति नयाँ की दृष्टि से, हिन्दू दृस्टि से उनके सामने बात रखने की कोशिश करनी चाहिए और इस काम को dutifully करना  चाहिए ी और औरोबिन्दो conclude करते हैं, यह अलग-अलग जगह पर उन्होंने बातें कही हैं, लेकिन यह महत्वपूर्ण है I उन्होंने कहा हैं कि मुसलमानों को harmless, यह उनके शब्द हैं, मुसलमानों को harmless बनाने का इसके आलावा कोई उपाय नहीं, के उनके अपने मज़हबपर विश्वास थोड़ाकम किया जाये I

यह सब एक ही दिशा में हमे point out करते हैं I कि यह बात सही है जो हमारे secular , leftist लोग कहते हैं कि आप इतने मुसलामानों का क्या करेंगे ? हम कुछ नहीं करेंगे I जिस तरह से वह मुसलमान बने – और मुझे एक युवा सन्यासी ने कहा – और मुझे उनकी बात सटीक ले – उन्होंने कहा देखिये, ये जितने लोग मुसलमान बने थे, कोई स्वेच्छा से मुसलमान नहीं बने था I उसने प्रचंड शक्ति के दबाव में और आतंक में और प्रभाव में वह मुसलमान बने थे I आप उसकी तुलना में प्रचंड नहीं लेकिन एक मज़बूतशक्ति बांके खड़ेहो जाएये तो काफी लोग अपने-आप आपकी ओर चले आएंगे I

और स्वामी श्रद्धानन्द की जीवनी में कुछ उदहारण जो मुझे मिले हैं, मैंने पाया हैं, कि ऐसा हुआ था I जब उन्होंने शुद्धि कार्यक्रम शुरू किया और चलने लगा तो दिल्ली में उनके पास मुल्तान और लाहौर से मुसलमान एते थे I स्वामी जी हम भी आना कहते थे I हमारे पूर्वज एक विवशता में मुस्लिम बने थे I और हम उस मार्ग को त्यागना कहते है I तो मुझे ऐसा लगता हैं कीं, जिस बात को, जिस बात पर हम स्वयं संकोचग्रस्त रहते हैं, वास्तव में वही मार्ग है I और वह ऐसा मार्ग हैं जो की दुनिया में दुसरे लोग आसानी से समझते है I क्युकी यह उन्ही का मार्ग है i

Leave a Reply

You may also like

इस्लामी आक्रमण मध्यकालीन इतिहास

गुरु गोबिंद सिंह: योद्धा, संत, कवि व दार्शनिक – जिन्होंने भारत के सारे ग्रंथों का निचोड़ दिया | कपिल कपूर

post-image

गुरु गोविन्द सिंह जी के mention के बगैर आप इंडिया की history of ideas कंप्लीट नहीं कर सकते| गुरु गोविंद सिंह जी ने भागवत पुराण को ‘भाखा दियो बनाए’, जो उन्होंने कृष्णावतार लिखा वह उन्होंने पूरे भागवत पुराण को पंजाबी में भाखा में लिखा, रामअवतार लिखा, अकाल स्तुति लिखी, जितना ज्ञान भारत का था उसका जो latest retelling हुआ…retelling… वह सारा वह गुरु गोविंद सिंह जी ने किया| 4 बेटे मरवा दिए, father मरवा दिए, 40 की आयु में मर गए,इतने ग्रंथों की रचना की, इतना social reform किया और धर्म के लिए जान दे दिया, कुर्बानी कर दी| दो बच्चे छोटे- पांच आठ साल के जिंदा दीवार में चुनवा दिए गए और जब उनको खबर मिली तो उनकी आंखों में नमी आई तो किसी ने कहा गुरु जी अगर आप दुख बनाओगे तो…

Read More
क्या आप जानते हैं? प्राचीन इतिहास भारतीय बुद्धि भाषण के अंश

हिन्दू देवी-देवता और संस्कृत जापानी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं – बिनोय के बहल – भारत का भित्तिचित्रण

post-image

हमने जापान में संयोग से इन दोनों वेणुगोपाल को देखा। वहाँ मुझे लगा कि आप यह जानने के लिए उत्सुक हो सकते हैं कि हिन्दू देवी-देवताओं की जापान में उतनी ही पूजा होती है जितनी कि भारत में। आपको वास्तव में यह जानकर आश्चर्य होगा कि यहां जापान में एकमात्र सरस्वती मां के सैकड़ों मंदिर हैं जिसमें 250 फुट ऊंचा मंदिर भी है और सरस्वती मां के मंदिर भारत में देखने को नही मिलते। लक्ष्मी माता की यहां पूजा होती है। बहुत सारे देवी-देवता हैं, इतने सारे शिव हैं, ब्रम्हा हैं, यहां तक की यमराज का मंदिर है।

वास्तिवकता में आपको ये जानकर भी आश्चर्य होगा कि हवन या होमा जिसको जापानी भाषा में “गोमा” कहते है, वो जापान के 1200 से अधिक मंदिरों में हर दिन संस्कृत मंत्रोच्चार द्वारा किया…

Read More
प्राचीन इतिहास भाषण के अंश

आज का वर्तमान ग्रीस अपनी पुरातन सभ्यता और संस्कृति को क्यों नहीं बचा सका?

post-image

ग्रीस जिसे हम यूनान के नाम से भी जानते हैं, 1900 ईसवी में अंततः ग्रीस का फिर से उदय हुआ। यदि हम पुरातन सभ्यताओं की याद करें तो ग्रीस और इजिप्ट का नाम भी याद आता है, परंतु ग्रीस के इतिहास पर नजर डालें तो सबसे पहले ग्रीस पर रोमन साम्राज्य का कब्जा हुआ था। परिणामस्वरूप ग्रीस ईसाई धर्म में परिवर्तित हुआ और अपनी सभ्यता संस्कृति खो बैठा।

रोमन राजा ने ग्रीस के धर्म के सभी ग्रीक देवताओं पर प्रतिबंध लगाया तथा ओलिंपिक खेलों को बंद करा दिया, क्योंकि ग्रीस ओलिंपिक पर बड़ा खर्च करता था। मंदिरों को तोड़ा गया, परम्परायें नष्ट होती चली गई और ग्रीस पूर्णतया ईसाई बन गया।

समय के साथ ग्रीस की पुरातन सभ्यता नष्ट होती चली गई। सवाल ये है कि ग्रीस पुनर्जीवित कैसे हुआ? 18वीं सदी में यूरोप ने ग्रीक ज्ञान का अवतरण किया ताकि अरब देशों के माध्यम से पुरातन यूनानी ज्ञान को प्राप्त…

Read More
इतिहास इस्लामी आक्रमण भारतीय इतिहास का पुनर्लेखन भाषण के अंश मध्यकालीन इतिहास

गुरु तेग बहादुर का धर्मार्थ प्राण त्यागने से पहले औरंगजेब के साथ संवाद

post-image

गुरुदेव बोले, “300 वर्ष पहले हमारे देश में औरंगजेब नाम का निर्दयी राजा था। उसने अपने भाई को मारा, पिता को बंदी बनाया और स्वयं राजा बन गया। उसके उपरांत उसने निश्चय किया कि वो भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाएगा।”
“क्यों गुरुदेव?”
“क्योंकि उसने सोचा कि यदि दूसरे देशों को इस्लामिक राष्ट्र बनाया जा सकता है, तो भारत को क्यों नहीं जहां पर उस जैसा मुसलमान राजा राज करता है। उसने हिंदुओं पर भारी जजिया टैक्स लगाया और हिंदुओं को अपमानित परिस्थितियों में रहने पर विवश किया, अतः वो हिन्दू धर्म का त्याग कर दें। औरंगजेब ने अपने सैनिकों को प्रत्येक दिन ढेर जनेऊ लाने को कहा और उस ढेर जनेऊ को रोज तराजू में तुलवाता था। ये हिंदुओं का जनेऊ होता था जो या तो इस्लाम स्वीकार कर लेते थे या मार दिए जाते थे। बहुत हिंदुओं ने डर कर इस्लाम स्वीकार किया और बहुत…

Read More
इस्लामी आक्रमण क्या आप जानते हैं? भाषण के अंश मध्यकालीन इतिहास हिन्दू मन्दिरों का विध्वंस

भारत के उत्तरी भाग में बड़े मंदिर क्यों नहीं हैं, जैसे भारत के दक्षिणी भाग में हैं?

post-image

शीर्ष सिद्धांतकारों में से एक, शॉन लॉन्डर्स ने कहा कि स्मृति हमें बांधती है और हमें परिभाषित करती है। यह धर्म का एक आवश्यक आयाम है और मिलन कुंदेरा ने कहा है कि सत्ता के खिलाफ मनुष्य का संघर्ष वैसे ही है जैसे विस्मृति के खिलाफ स्मृति का संघर्ष। यह बहुत शक्तिशाली बात है। यह एक ऐसी स्मृति है जो हमें विस्मृति से रोकती है। स्मृति मरती नहीं है। स्मृति की यही सुंदरता है। मैं शायद इसके बारे में सीधे शब्दों में अपनी बच्चों से बात भी नहीं कर सकता, लेकिन मुझे पता है कि मेरी संतानें समझ जाएंगी कि मैं क्या संदेश देना चाहता था और वे इसपर चुप्पी साध लेंगे। स्मृति मौन के सहारे आगे बढती है। मुझे लगता है कि आप सभी इस तस्वीर को जानते हैं। है न? ठीक है। मेरे पास इसके बारे में एक कहानी है जिससे शायद पहली बार मुझे समझ में…

Read More
इस्लामी आक्रमण काश्मीर भारतीय इतिहास का पुनर्लेखन भाषण के अंश मध्यकालीन इतिहास

एक कश्मीरी शरणार्थी शिविर का नाम ‘औरंगज़ेब का स्वप्न’ क्यों रखा गया? – मनोवैज्ञानिक आघात का ऐतिहासिक संदर्भ पढ़ें

post-image

मैं एक कहानी आपसे साझा करूंगा, क्योंकि मुझे लगता है कि कहानी लोगों को यह बताने का सबसे अच्छा तरीका है कि मैं इस तक कैसे पहुंचा। किसी को पता है कि यह क्या है? यह कश्मीरी शरणार्थी शिविर है। मैं वहां काम कर रहा था, और मेरी पत्नी भी यहाँ है, हम दोनों लोगों के आघात पर काम करने के लिए शिविरों में जाते थे और ऐसे शिविर कई सारे थे। हमने अपना काम बांट लिया था। हम शिविर में जाते थे, उन लक्षणों पर चर्चा करते थे जिन्हें लोग महसूस करते थे। उनमें से ज्यादातर सो नहीं पाते थे। उनमें से अधिकांश को बुरे स्वप्न आते थे, उनमें से अधिकांश में ऐसे कई लक्षण थे। हम इस पर चर्चा करते थे, उन्हें व्यायाम, बातचीत द्वारा फिर से ठीक करने और फिर वापस आने में मदद करते थे।

बाहर आते समय एक दिन, एक बूढ़ा कश्मीरी आदमी, एक छोटा…

Read More
अखंड भारत क्या आप जानते हैं? प्राचीन इतिहास भाषण के अंश

भारत का नाम इंडिया कैसे पड़ा?

post-image

‘इंडिया’ शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई? शायद यह आपको ज्ञात हो| सबसे पहले ‘सिंधु’ शब्द से ‘हिंदू’ बना। फिर जैसे स्पेनिश में ‘ह’ अक्षर उच्चारण में गौण हो जाता है उसी प्रकार ‘ह’ का उच्चारण लुप्त होकर ‘इंदु’ बना। जब मैं बार्सिलोना में था, मैंने एक रेस्तरां का नाम ‘लो कॉमिडा हिंदू’ पाया। पर इसका उच्चारण वे ‘ह’ को गौण रखकर ‘इंदु’ ही कर रहे थे|  आप हजारों साल पहले भी इस प्रकार का संदर्भ प्राप्त हो सकता है| अलग अलग देश इसे ‘इंड’, ‘इंडिका’, ‘इंडिया’ इत्यादि जैसे नामों से पुकारते हैं|

Read More
प्राचीन इतिहास प्राचीन भारतीय शिक्षा भारत की चर्चा

भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली — मेहुलभाई आचार्य का व्याख्यान

post-image

भारतीय परंपरा में मनुष्य जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मूल्यों में से शिक्षा को सबसे उच्च का स्थान दिया गया है| पुरातन काल से भारतवर्ष समस्त विश्व के लिए ज्ञान का स्रोत रहा है और भारत के ज्ञान का सर्वप्रथम स्रोत हैं हमारे वेद| एक सुसंस्कृत व्यष्टि को समष्टि की नींव मानते हुए एक सुदृढ़ तथा विकसित समाज के निर्माण हेतु शिक्षा की अभूतपूर्व परिकल्पना भारत के ऋषियों, मनीषियों एवं गुरुओं ने ही की थी| इसी चिंतन ने जन्म दिया भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को|

क्या थी गुरुकुल शिक्षा प्रणाली? कितनी प्रकार की पद्धतियाँ होती थीं इस प्रणाली में? कहाँ से आरम्भ होती थी शिक्षा? क्या शिक्षा केवल विषय-ज्ञान तक सीमित थी या इसका कोई अलौकिक अभिप्राय भी था? जानिए श्री मेहुल आचार्य के व्याख्यान में|

श्री मेहुल आचार्य जी हमें बताते हैं की मानव व्यक्तित्व के संतुलित व बहुमुखी विकास के लिए तथा विकसित समाज…

Read More
%d bloggers like this: