गुरूवार, सितम्बर 19, 2019
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हिन्दू मुस्लिम रिश्तों पर श्री औरोबिन्दो के विचार

लेकिन सबसे संक्षेप में और सबसे सटीक रूप से श्री औरोबिन्दो ने इस बात को रखा था I और एक जगह नहीं, बार बार I जब वह political leader थे और अखबार का सम्पादन करते थे, उस समय का उनका एक आर्टिकल मुझे मिला १९०९ का “Swaraj And Musalmaans ” I उसमे बिलकुल संक्षेप में और सटीक रूप में लिखते हैं कि, हिन्दू मुस्लिम समस्या का समाधान क्या है ? और १९०९ में यह समस्या दुसरे रूप में थी I लेकिन उसका essential character यही था I और उनके कई निबंध हैं जिससे आपको पता चलेगा कि बंगाल में स्वाधीनता आंदोलन को कुचलने के लिए, मुस्लिम गुंडों का इस्तेमाल किया I इसपर श्री औरोबिन्दो के कई article और सम्पादिकी है I और यह एक known fact था कि वह, जैसे police के साथ-साथ मुस्लिम गुंडों का इस्तेमाल करते थे I स्वतंत्रता आंदोलन के लोगों को कुचलने के लिए I उसी सिलसिले में श्री औरोबिन्दो कहते है कि यह जो समस्या हैं, हिन्दू-मुस्लिम, communal unrest की, या हिंसा की, अविश्वास की वह कहते हैं कि इसको हमे स्पष्ट रूप से देखना चाहिए I इसमें कोई चतुराई नहीं करनी चाहिए I

हमे मुसलामानों को उसी तरह अपना भाई और भारत माता की संतान समझना चाहिए जैसे हम है I  और इसीलिए उनके साथ सबसे पहली बात बराबरी से व्यवहार करने चाहिए I दूसरी बात यह, कि यह नहीं हो सकता हैं कि वे धर्मान्तरण करते रहेंगे और हम नहीं कराएंगे I अगर धर्मांतरण होगा तो दो तरफ़ाखुला हो जाना चाहिए I आप धर्मान्तर करेंगे? हम भी धर्मान्तरा कराएँगे I अगर वह नहीं होना चाहते नहीं होंगे, लेकिन हम मुसलमानों तक, इसाईओं तक अपनी, अपना धर्म सन्देश या ज्ञान सन्देश हम ले जाये, उसी तरह जैसे missionary लोग ले जाते है I और इस बात को सचेत रूप से करने में कोई दिक्कत नहीं है, और यह करना चाहिए I श्री औरोबिन्दो कहते है, इसके बाद यह मुसलामानों पर हैं कि अगर politics में वह भाई की तरह वह हमारे साथ आना चाहते हैं, हम उन्हें गले लगाएंगे और अगर वह पहलवान की तरह आना कहते हैं तो हमे उनके साथ लड़नेके लिए तैयार रहना पडेगा ी ये श्री सुरोबिन्दो ने स्पष्ठ रूप से कहा हैं I

और तीसरी बात जो उन्होंने कही है वह इसी से मिलती-जुलती हैं जिस निष्कर्ष पर मैं पहुंचा हूँ I उनोने कहा कि हमे मुसलमानो के सामने इस्लाम और मोहम्मद का उन्होंने term लिया तहत “more just “, justier interpretation या justier facts उनके सामने रखने चाहिए I या दुसरे अर्थ में मुसलामानों को अपने धर्म के प्रति वास्तव में, अपने धार्मिक इतिहास के प्रति नयाँ की दृष्टि से, हिन्दू दृस्टि से उनके सामने बात रखने की कोशिश करनी चाहिए और इस काम को dutifully करना  चाहिए ी और औरोबिन्दो conclude करते हैं, यह अलग-अलग जगह पर उन्होंने बातें कही हैं, लेकिन यह महत्वपूर्ण है I उन्होंने कहा हैं कि मुसलमानों को harmless, यह उनके शब्द हैं, मुसलमानों को harmless बनाने का इसके आलावा कोई उपाय नहीं, के उनके अपने मज़हबपर विश्वास थोड़ाकम किया जाये I

यह सब एक ही दिशा में हमे point out करते हैं I कि यह बात सही है जो हमारे secular , leftist लोग कहते हैं कि आप इतने मुसलामानों का क्या करेंगे ? हम कुछ नहीं करेंगे I जिस तरह से वह मुसलमान बने – और मुझे एक युवा सन्यासी ने कहा – और मुझे उनकी बात सटीक ले – उन्होंने कहा देखिये, ये जितने लोग मुसलमान बने थे, कोई स्वेच्छा से मुसलमान नहीं बने था I उसने प्रचंड शक्ति के दबाव में और आतंक में और प्रभाव में वह मुसलमान बने थे I आप उसकी तुलना में प्रचंड नहीं लेकिन एक मज़बूतशक्ति बांके खड़ेहो जाएये तो काफी लोग अपने-आप आपकी ओर चले आएंगे I

और स्वामी श्रद्धानन्द की जीवनी में कुछ उदहारण जो मुझे मिले हैं, मैंने पाया हैं, कि ऐसा हुआ था I जब उन्होंने शुद्धि कार्यक्रम शुरू किया और चलने लगा तो दिल्ली में उनके पास मुल्तान और लाहौर से मुसलमान एते थे I स्वामी जी हम भी आना कहते थे I हमारे पूर्वज एक विवशता में मुस्लिम बने थे I और हम उस मार्ग को त्यागना कहते है I तो मुझे ऐसा लगता हैं कीं, जिस बात को, जिस बात पर हम स्वयं संकोचग्रस्त रहते हैं, वास्तव में वही मार्ग है I और वह ऐसा मार्ग हैं जो की दुनिया में दुसरे लोग आसानी से समझते है I क्युकी यह उन्ही का मार्ग है i

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