शनिवार, दिसम्बर 15, 2018
Home > भारतीय बुद्धि > श्री कृष्णदेवराया के राज दरबार के अष्ठ दिग्गज

श्री कृष्णदेवराया के राज दरबार के अष्ठ दिग्गज

अष्ठ  दिग्गज का आशय है आठ हाथी I हमारे यहाँ ऐसी मान्यता है कि इस पूरे ब्रह्माण्ड का भार आठ हाथियों ने धारण किया हुआ है, जो आठ दिशाओं पर खड़े होतें हैं I  उन हाथियों के नाम इस प्रकार हैं – पुण्डरीका, वामना, अंजना और ऐरावत जो इंद्रा का वाहन है I कृष्णा देवराया के राज दरबार, के आठ कवियों को अष्ठ दिग्गज कहा जाता था I निःसंदेह प्रत्येक कवी की अपनी विशेष शैली हुआ करती थी I उनमे से सबसे विख्यात कवी थे अलसानि पेदन्ना, जिन्हे आंध्र कविता का पितामहा माना जाता था I अर्थात तेलुगु कविता के कुलपति माना जाता था I उनकी सबसे प्रमुख कृति है “मनु चरित्र” I एक चित्र भी है अलसानि पेदन्ना और कृष्णदेव राया की I कृष्णदेव राया उन्हें प्रायः पुरस्कृत किया करते थे I वे प्रायः स्वर्ण कंगन जीत लिया करते थे I  उस कंगन को राजा स्वयं अपने हाथों से उन्हें पहनाया करते थे I उनकी पालकी को प्रायः कंधा भी देते थे I अलसानि पेदन्ना के प्रति इस प्रकार का आदर हुआ करता था I इन आठ कवियों में सबसे प्रमुख कवी I

दुसरे विशेष कवी थे नंदी तिम्मन्ना जो अनंतपुर के रहने वाले थे I उन्हें “मुक्कु तिम्मन्ना” कहकर भी सम्बोधित किया जाता था, क्योकि उन्होंने नाक के बारे में एक कविता की श्रंखला लिख दी थी I तेलुगु में “मुक्कु” का अर्थ है नाक I उन्होंने नाक से सम्बंधित दोहे भी लिखे थे, यह एक और कारण  था जिसके लिए उन्हें “मुक्कु तिम्मन्ना” बुलाया जाता था I  उनकी सबसे प्रसिद्द रचना थी “परिजातापहारनम” जो सत्यभामा की कृष्णा से पारिजात वृक्ष के लिए हट करने पर आधारित है I एक और कवी थे मडैयागिरि मल्लन्ना जिन्होंने “राजशेखर चरित्रम” नाम की प्रसिद्द पुस्तक लिखी थी , जो अवन्ति राज्य के प्रसिद्द राजा की कहानी थी I एक और कवी हुए धूर्जटी कवी जो मूल रूप से भगवान् शिव पर ही लिखा करते थे I उनकी सुप्रसिद्ध रचना है “श्रीकालाहस्ती महात्यम” I श्रीकालाहस्ती आंध्र का एक सुप्रसिद्ध नगर है I एक और कवी थे अय्यालाराजू रामभद्रा जिन्हे पिल्लला रामभद्रुडु करके भी सम्बोधित किया जाता था I एक कवी हुए पिंगली सुराणा, जिन्होंने प्रसिद्द पुस्तक लिखी जिसका नाम है “कलापूर्णोदयम”, जिसमे पहली बार अतीतावलोकन का प्रयोग किया गया था I रामराजभूषणुडु जो नाही केवल एक कवी थे, अपितु एक अच्छे संगीतज्ञ भी थे I वे वीणा वाद्क भी थे I और फिर निःसंदेह तेनाली रामा जिनसे, आशा है, आप सभी परिचित है I हम उन्हें अवशय एक विदूषक के रूप में जानतें है, लेकिन वे एक साहियताकर भी थे I उन्होंने “पांडुरंगा महात्यम” नाम का ग्रन्थ लिखा हैं जो पुण्डरीक और विट्ठल की कहानी है, विट्ठल जिन्हे महाराष्ट्र में विठोबा बुलाया जाता है I इसे तेलुगु साहित्यिक समूह के पंचमहाकव्यों में एक माना जाता है I

तो यह अष्ट दिग्गजास श्री कृष्णा देवराया के सभा को सुशोभित किया करते थे I उनकी नित्य-प्रतिदिन बैठक हुआ करती थी, जिसे “भुवनविजयम” कहा जाता था I भुवनविजयम का अर्थ है पृथ्वी पर विजय प्राप्त करना I आज भी इस भुवनविजयम को रचा जाता है, जहां कवी मिलते हैं, अपनी कविता पढतें है I मूलतः कवी वाद-विवाद करते हैं, एक दुसरे से तर-वितर्क करते हैं I

Leave a Reply

%d bloggers like this: