बुधवार, मार्च 27, 2019
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अयोध्या में निहांग सिख

 

दिनांक 28 नवम्बर, 1858 के एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) के अनुसार अवध के थानेदार ने एक प्राथमिकी दर्ज की जिसमें कहा गया था की बाबरी मस्जिद के अंदर 25 निहांग सिखों ने प्रवेश कर वहाँ हवन इत्यादि धार्मिक अनुष्ठान आरम्भ कर दिये। इसके बाद 28 नवम्बर 1858 को बाबरी मस्जिद के प्रबंधक ने एक शिकायत दर्ज करवायी, जिसमें कहा गया कि 25 निहांग सिखों ने बाबरी मस्जिद के अंदर पूजा एवं हवन करना शुरू कर दिया है और जगह-जगह मस्जिद की दीवारों पर चारकोल से राम-राम लिख दिया है। उनका कहना था कि हिंदुओं की राम जन्मभूमि तक आवाजाही हमेशा से रही है। एक ही परिसर में स्थित जन्मस्थान एवं मस्जिद में से जन्मस्थान, जो कि मस्जिद के बाहर था, में हिन्दू लम्बे समय से निरन्तर आते रहे हैं, लेकिन अब हिंदुओं/सिखों ने मस्जिद में प्रवेश कर वहाँ भी पूजा अर्चना करने आरम्भ कर दिया है।

जब राम जन्मभूमि प्रकरण को इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया तो ऊपर वर्णित घटना को एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में माना गया। यह प्राथमिक अब भी उपलब्ध है। यह महत्वपूर्ण इसलिए हे क्योंकि इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हिन्दू राम जन्मभूमि परिसर ही नहीं बल्कि मस्जिद के अंदर भी प्रवेश करते थे। यह अन्य मामलों से ठीक विपरीत था जिनमें यह दावा किया जाता है कि हिंदुओं की पहुंच ढाँचे या उसके परिसर तक थी ही नहीं। यह दस्तावेज आधिकारिक रूप से स्पष्ट करता है कि हिंदुओं की बाबरी मस्जिद के अंदर बेरोकटोक आवाजाही थी। पुलिस को निहांग सिखों को वहाँ से हटाने में कुछ सप्ताह तक प्रयास करने पड़े।

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