शुक्रवार, सितम्बर 20, 2019
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वैदिक काल में जनपदों का भूगोल

भारतीयों में एक सामान्य भ्रांति है कि जनपद (प्राचीन भारत में राज्य या प्रशासनिक इकाई) केवल बुद्ध काल में हुआ करते थे वैदिक काल में नहीं। इसका तर्क यह दिया जाता है कि वेदों में जनपदों  का कोई वर्णन नहीं मिलता है। श्री मृगेंद्र विनोद इस भ्रांति का सिरे से खंडन करते हैं और इसके लिए उन्होंने वेदों में कही गई बातों को ही साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया।

शुक्ल यजुर्वेद के शतपथ ब्राहमण का संदर्भ देते हुए श्री मृगेंद्र कहते हैं कि वैदिक काल में कई जनपदों एवं बड़े राज्यों का विवरण दिया गया। कुरुक्षेत्र को केंद्र में रखते हुए, पूर्व की ओर कुरु और पांचाल प्रदेश थे। गंगा और यमुना के मध्य कुरु तथा गंगा के पार पूर्वी दिशा में पांचाल जनपद था। उत्तर दिशा में सृंजय एवं दक्षिण दिशा में मत्स्य जनपद थे। गंधार, केकय और मद्रा उत्तरी जनपद थे जबकि कोसल, विदेह और काशी पूर्वी जनपद थे।

कृष्ण यजुर्वेद के बौधायन धर्म सूत्र में अनुष्ठान विधि के वर्णन में विभिन्न क्षेत्रों जैसे सिंधु, सौवीर, सौराष्ट्र, आनर्त, अवंति, विदर्भ, मगध और अंग का उल्लेख मिलता है। इन क्षेत्रों को ‘संकीर्ण योनाया’ कहा गया जिसका अर्थ होता है आर्यावर्त के सीमांत जनपद।

बौधायन धर्म सूत्र में यात्रा सम्बंधित मानदंडों के विवरण में दूर दराज के क्षेत्रों जैसे आरत्ता, काराष्कर, पुण्ड्रा, बंगा और कलिंग का नाम आता है। अन्य क्षेत्रों का उल्लेख भारतीय साहित्य में मिल जाता है लेकिन आरत्ता के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह प्रदेश कहाँ और कब स्थित था?

आरत्ता आधुनिक ईरान देश का दक्षिणी पश्चिमी भाग था जिसके बारे में सुमेरियन ग्रन्थों में उल्लेख मिलता है। यह लगभग ईसा पूर्व 3000 वर्ष पहले था। वेदों में भी इसे एक जनपद के रूप में वर्णित किया गया। इसी प्रकार काराष्कर जो सम्भवतः आज के समय का काशगर (चीन) है को भी एक जनपद के रूप में बताया गया था। यह स्पष्ट है कि वेदों में न केवल आर्यावर्त के जनपद और सीमावर्ती जनपदों का उल्लेख है बल्कि बाहरी जनपदों का उल्लेख भी दिया गया है।

सृजन संस्था द्वारा आयोजित गोष्ठियों की श्रृंखला में श्री मृगेंद्र विनोद ने वेदों का संदर्भ देते हुए अपने व्याख्यान (आर्यावर्त का भूगोल – सिंधु सरस्वती सभ्यता) के द्वारा प्राचीन भारत में जनपदों की उपस्थिति को प्रमाणित किया।

आप उनके द्वारा दिया गया सम्पूर्ण व्याख्यान निम्नलिखित लिंकस पर जा कर सुन सकते हैं –

Part 1 — https://www.youtube.com/watch?v=jfW4iLBgxg8&t=296s

Part 2 – https://www.youtube.com/watch?v=8GA29oqlCko

Part 3 — https://www.youtube.com/watch?v=dqKOtc2gKTs&t=154s

हिंदी अनुवाद: महेश श्रीमाली

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