सोमवार, जुलाई 22, 2019
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संस्कृत सबसे श्रेष्ठ वैज्ञानिक भाषा क्यों है?

Conventional language आप देखो its all object specific , ये क्या है अंग्रेजी में ? hand. ये क्या है ? ये क्या है ? बस । हमको किसीने बता दिया , पढ़ा दिया, हमने सीख लिया । पर आपको ये अधिकार नहीं है पूछने के लिये कि इसको hand क्यूँ कहा जाता है ? इसको nose क्यूँ कहा जाता है ? You are not allowed to ask this question. If you ask, you will be ridiculed. Or, if you are not ridiculed, you will not get a satisfactory answer. Sometimes, yes if we go back to the History of the development of the Language, we can find out some history about it some facts about it. Why it is called. पर बहुत हद तक हम उसको बता नहीं पायेंगे कि क्यों । पर संस्कृत में एक ऐसा शब्द नहीं है that which is object specific. कहने का मतलब है तो आप पूछेंगे कि संस्कृत में hand के लिये कोई शब्द नहीं है । nose के लिये नहीं है । chair के लिये नहीं है । table के लिये नहीं है । है , एक नहीं बहुत हैं । एक-एक object को लेकर  भी आपको कभी-कभी सौ से ज़्यादा शब्द मिलेंगे । तो फिर कैसे आप बोलते हैं कि ये object specific नहीं है ! इसलिये कि एक object के लिये अगर सौ शब्द हैं तो इन सौ शब्दों का अनुशीलन आप करिए । उसको उसका विश्लेषण । उसका analysis करिए । उस शब्द का धातु क्या है । और ये क्यों वाला जो प्रश्न है, आप हमेशा कर सकते हैं संस्कृत में हर शब्द के लिये । क्यों ऐसा है ? और आपको सही जवाब भी मिलेगा ।

अमरकोष देखा है आपने ? पढ़ा होगा । अमरकोश में हर वस्तु के लिये जितने शब्दों का प्रयोग होता है उसका लिस्ट है सूची बना कर उसको compile किया गया । जैसे कि अब देखो जल, जल के लिये पानी के लिये तीस शब्द हमको अमरकोश में मिलेंगे । अग्नि के लिये ३४ शब्द हैं । इस प्रकार किसी के लिये ५२ शब्द हैं किसी के लिये ६० शब्द हैं । कई प्रकार । जितने भी शब्द्दों का प्रयोग होता है , एक उसके के लिये पूरी की पूरी सूची अमरकोश में है । अंग्रेज़ी में बस एक ही शब्द बोला जाता है पानी के लिये water । उसके अलावा दूसरा शब्द नहीं है । यहाँ पे ३० शब्द हैं । और ये ३० शब्द का मतलब क्या है ? पानी को जल क्यों कहा जाता है ? अब आप प्रशन कर सकते हैं । और जल सिर्फ पानी ही नहीं है । अब ये जानना पड़ेगा कि पानी को जल क्यों कहा जाता है ? पानी को जल इसलिये कहा जाता है कि पानी का एक धर्म है liquid से solid बन जाना । जड़ बन जाना पानी का धर्म है । वो जड़ प्रकृति, जड़ स्वभाव पानी के अन्दर है । इसलिये उसको जल कहा जाता है । जल और जड़ में ज्यादा अन्तर नहीं है । ये पानी का धर्म है । पानी को वारि क्यों कहा जाता है ? वृणोति आवृणोति आच्छादयति मेघ के रूप में वो आच्छादित कर लेता है । ये भी पानी का एक धर्म है । इस प्रकार अग्नि को देखो ।

अग्नि को अग्नि क्यों कहा जाता है ? अग् धातु से निष्पन्न यह शब्द, अग् का मतलब है ऊर्ध्वगमन । अग्नि की जो शिखा है उसका स्वभाव है ऊर्ध्व, ऊपर की ओर जाना । कभी अग्नि की शिखा नीचे नहीं जायेगी । इसलिये अग्र शब्द भी उसी धातु से है । अग्र का मतलब है, जब अग्र आप कहते हैं, सामने देखते हो या ऊपर देखते हो । अग्नि को अनल क्यों कहा जाता है ? अनल का मतलब क्या है ? न अलं से अनल बना है । जैसे न अश्व अनश्व होता है, न अलम् अनल होता है । न अलम् मतलब पर्याप्त नहीं है । अग्नि is the ever dissatisfied one. पूरी की पूरी सृष्टि उसके मुख में आ जाये तो भी संतुष्ट नहीं है । अग्नि को कोई शांत नहीं कर पाया । कुछ भी पर्याप्त नहीं है । न अलम् न अलम । यही जब अनुभव हुआ, ये भी अग्नि का एक धर्म है स्वभाव है, तो नाम रखा अनल । तो इस प्रकार हम शब्दों का विश्लेषण करके देखेंगे । तो पानी के लिये अगर ३० शब्द हैं तो यह ३० शब्द पानी के ३० धर्मों के बारों ३० properties के बारे में है ३० qualities के बारे में बताता है । तो एक दृष्टि से हम शब्द ही नहीं सीख रहे हैं, हम पूरा का पूरा विज्ञान ही सीख रहे हैं । एक scientist को क्या चाहिए ?

किस ज्ञान है, एक scientist जब पानी को देखता है, एक आम आदमी जब पानी को देखता है, तो उसके अन्दर फर्क क्या होता है ? तो scientist जो-जो तत्त्व निकालता है, आमतौर पर लोग उसको नहीं कर पाते हैं । तो ये जो मुनि ऋषि लोगों का काम ये था, इस प्रकार बनाया इस भाषा को कि पूरा का पूरा विज्ञान इसी में है । हम पढ़ते वक्त अगर अग्नि के ३४ नाम हम जानें, तो अग्नि के ३४ properties के बारे में हमको पता होता है ।

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