शुक्रवार, सितम्बर 20, 2019
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इसाई पंथ और भारत – डॉ. सुरेन्द्र कुमार जैन का व्याख्यान

संपूर्ण विश्व में प्रेम व शान्ति का स्वरुप माने जाने वाले इसाई धर्म के विस्तार का इतिहास रक्त से सना है, ये तथ्य कम ही लोग जानते हैं| यूनान, रोम व माया जैसी कई प्राचीन संस्कृतियाँ इसाई मिशनरियों के हाथों जड़ से मिटा दी गयीं| अनगिनत देशों की भोली-भाली प्रजा का जबरन धर्मान्तरण किया गया और जो न माने उन्हें अत्यंत बर्बरता से प्रताड़ित कर मौत के घाट उतार दिया गया|

भारत में सर्वप्रथम इसाई शरणार्थी बन कर आये| परन्तु पुर्तगालियों के आगमन के साथ ‘गोवा इन्क्विज़िशन’ नामक क्रूरता का जो वीभत्स नरसंहार शुरू हुआ वो दिल दहलाने वाला था| उसके पश्चात् फ्रांसीसी, डच, अंग्रेज़, ये सभी विदेशी इसाई धर्म के विस्तार के लिए निर्दोष भारतवासियों पर अत्याचार करते रहे|

अपने सृजन व्याख्यान “इसाई पंथ और भारत” में श्री सुरेन्द्र जैन बड़ी स्पष्टता से हमें अवगत कराते हैं कि किस प्रकार आज़ादी के पश्चात् इसाई मिशनरी छल-बल, कपट, लालच और धोखाधड़ी द्वारा बे-रोकटोक धर्मान्तरण में जुटे हैं; किस प्रकार विदेशों से अपार धनराशि धर्मान्तरण के लिए आ रही है; किस प्रकार उनकी पूरी कार्य प्रणाली धूर्तता पर आधारित है; और कैसे उनके संदिग्ध, अवैध और काले कारनामे उनका वास्तविक चरित्र दर्शाते हैं|

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