गुरूवार, अप्रैल 2, 2020
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एक कश्मीरी शरणार्थी शिविर का नाम ‘औरंगज़ेब का स्वप्न’ क्यों रखा गया? – मनोवैज्ञानिक आघात का ऐतिहासिक संदर्भ पढ़ें

मैं एक कहानी आपसे साझा करूंगा, क्योंकि मुझे लगता है कि कहानी लोगों को यह बताने का सबसे अच्छा तरीका है कि मैं इस तक कैसे पहुंचा। किसी को पता है कि यह क्या है? यह कश्मीरी शरणार्थी शिविर है। मैं वहां काम कर रहा था, और मेरी पत्नी भी यहाँ है, हम दोनों लोगों के आघात पर काम करने के लिए शिविरों में जाते थे और ऐसे शिविर कई सारे थे। हमने अपना काम बांट लिया था। हम शिविर में जाते थे, उन लक्षणों पर चर्चा करते थे जिन्हें लोग महसूस करते थे। उनमें से ज्यादातर सो नहीं पाते थे। उनमें से अधिकांश को बुरे स्वप्न आते थे, उनमें से अधिकांश में ऐसे कई लक्षण थे। हम इस पर चर्चा करते थे, उन्हें व्यायाम, बातचीत द्वारा फिर से ठीक करने और फिर वापस आने में मदद करते थे।

बाहर आते समय एक दिन, एक बूढ़ा कश्मीरी आदमी, एक छोटा आदमी था जो फ़िरन पहने था, मिला। वह बहुत जंच रहा था। वह हमारे पास आया और बोला, “तुम यहाँ क्यों आते हो?”  मैंने कहा कि मैं यहां आता हूं क्योंकि मैं कश्मीरी लोगों के आघात पर काम करना चाहता हूं। वह मुस्कुराया, मेरी ओर देखा और कहा, “क्या आप हमारे आघात को समझ सकते हैं?” मैंने सोंचा, अब यह बातचीत पता नहीं कहां जा रही है। मैं नहीं चाहता कि वह जिस दिशा में बातचीत को ले जा रहा है, उसमें चला जाए। तो, मैंने कहा, “देखिये, हम अभी समझने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने पूछा, “आपकी कार्यशालाओं में लोगों की प्रतिक्रिया क्या है?” मैंने कहा, ” बहुत अच्छा नहीं है। मामूली है। लोग आते हैं, बैठते हैं, मुझे सुनते हैं, और वे चले जाते हैं।” फिर उसने फिर से अपना सवाल दोहराया, “क्या आप हमारे आघात को समझते हैं?” मैंने कहा, “ठीक है, मैं कोशिश कर रहा हूं, लेकिन अगर आप कुछ सुझा सकते हैं तो मैं समझ सकता हूं।”

हम शिविर से थोड़ी ऊंचाई पर थे। उन्होंने शिविर की ओर अपनी उंगली उठाई, और कहा, “क्या आप जानते हैं कि इस शिविर को क्या कहा जाता है?” मैंने कहा, “मुठी शिविर”। उन्होंने कहा, “नहीं। क्या आप जानते हैं कि हम इस शिविर क्या कहते हैं? “मैंने पुछा,” क्या? “उन्होंने कहा, “हम इसे औरंगजेब का स्वप्न कहते हैं।“मुझे इस बात ने अचंभे में डाल दिया। मैंने पूछा,” औरंगजेब का सपना!” उन्होंने कहा,” हां! हम इसे औरंगजेब का सपना कहते हैं, और क्या आप समझते हैं ऐसा क्यों? “मैंने कहा,” नहीं “। उन्होंने कहा,” फिर जाईये और खोज कीजिये। जब आप समझेंगे कि हम इसे ऐसा क्यों कहते हैं, तो शायद आपको लोगों से बेहतर प्रतिक्रिया मिलेगी।”

मेरे जैसे पाश्चात्य प्रशिक्षित बुद्धि के लिए, यह स्पष्ट अपमान था। यहाँ यह व्यक्ति मुझे बता रहा है! वैसे भी, मैं वापस चला आया। मैंने औरंगजेब के बारे में अध्ययन करना शुरू किया; मैं उसे अस्पष्ट रूप से किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में जानता था जो हिंदू विरोधी था, जो कट्टर था, इससे ज्यादा कुछ नहीं। लेकिन मैं यह जानने के लिए उत्सुक था कि एक स्कूल शिक्षक मेरे पास कश्मीरी पंडितों के शिविर की ओर ऊँगली दिखाते क्यों आया और ऐसा क्यों कहा कि इसे औरंगजेब का सपना कहा जाता है। मैंने औरंगजेब के बारे में अध्ययन किया। मुझे पता चला कि लगभग तीन सौ साल पहले, किसी ने औरंगजेब से कहा था कि यदि आप कश्मीरी पंडितों को इस्लाम में परिवर्तित कर सकते हैं, तो पूरा भारत बदल जाएगा। इसलिए, यदि आप कश्मीर को इस्लाम में परिवर्तित कर सकते हैं, तो पूरा भारत इसका अनुसरण करेगा। इसलिए, यह सुनकर उसने अपने गवर्नर को आदेश दिया कि इन सभी लोगों को परिवर्तित करें और उसके तरीकों की परवाह न करें।

और फिर, वे लोग पंडित कृपा राम, जो एक प्रमुख कश्मीरी नेता थे, के साथ नौवें गुरु- गुरु तेग बहादुर के पास गए और उनसे यह कहते हुए समर्थन मांगा कि “वह हमें नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आप हमारी सहायता कर सकते हैं?”। इसलिए, गुरु तेग बहादुर ने खुद को बलिदान करने का फैसला किया। वह औरंगजेब के पास गये। दोनों के बीच बातचीत हुई। उन्होंने धमकी दिए जाने के बावजूद धर्म बदलने से इनकार कर दिया। तब औरंगजेब ने आदेश दिया,  “उसे और उसके लोगों को मार डालो” … पर वह गुरु को परिवर्तित नहीं कर सका। इसलिए, हिंदू धर्म, जैसा कि आज हम एक धर्म के रूप में समझते हैं, बच गया । कई लोगों का कहना है कि वे(कश्मीरी) इसी वजह से बच गए।

जब मैंने इसे पढ़ा तो मैं बहुत ही प्रभावित हुआ। जब मैं फिर से शिविर में वापस गया, तो समूह वहां बैठा था, और मैंने उन्हें बताया कि ‘मैंने औरंगजेब के बारे में अध्ययन किया है। मैं समझता हूं कि उसने क्या किया।‘ और अचानक मैंने समूह में बदलाव देखा। यह मैं देख सकता था कि वे जीवित हो गए थे। उन्हें लगा कि हम एक-दूसरे से जुड़ पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब, आप हमें समझ पा रहे हैं”। उन्होंने कश्मीरी भाषा में कुछ कहा और पूरे एक के बाद एक कई खुलासे हुए। लोग अपने बारे में ऐसी बातें करने लगे जैसे पहले उन्होंने कभी नहीं बताया था। कुछ महिलाओं ने आगे आकर कहा कि ‘हमारा यौन शोषण किया गया था’, जिसके बारे में वे किसी और से कभी बात नहीं कर सकते थे।

वस्तुस्थिति बदली। इसने मुझे एक बहुत महत्वपूर्ण सबक सिखाया कि जो मैंने अपने जीवन में आघात को मानसिक लक्षणों के एक समूह के रूप में समझता था, अब मैं आघात को एक ऐतिहासिक घटक, एक ऐतिहासिक प्रकृति के रूप में समझना शुरू कर दिया। और तब से, जब भी मैंने दुनिया भर में काम किया है, मैंने पाया है कि आघात को इसके ऐतिहासिक संदर्भ में समझना होगा।

कई साल पहले मैं एक साक्षात्कार ले रहा था। यह एक सिख परिवार था और मुझे एक केस हिस्ट्री लेनी थी। मैंने वहां मौजूद बुजुर्ग व्यक्ति से पूछा, “मुझे आपका पारिवारिक इतिहास लेना है”। मुझे परिवार का इतिहास लेना है। उसने मेरी ओर देखा और कहा, “तुम क्या लिखना चाहते हो? बस लिखो, हम एक विभाजन पीड़ित परिवार हैं”। तो, मैंने कहा, “लेकिन मैं अभी भी लिखना चाहता हूं कि क्या हुआ।” वह कहते हैं, “नहीं, हम एक विभाजन पीड़ित परिवार हैं”। तो, उसके लिए पूरी अवधारणा ही यही थी कि उनका एक विभाजन पीड़ित परिवार है। हम अपने भीतर आघात सहन करते हैं और यह हमें ऐतिहासिक मार्ग से मिलता है।

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