रविवार, अगस्त 18, 2019
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भारत के उत्तरी भाग में बड़े मंदिर क्यों नहीं हैं, जैसे भारत के दक्षिणी भाग में हैं?

शीर्ष सिद्धांतकारों में से एक, शॉन लॉन्डर्स ने कहा कि स्मृति हमें बांधती है और हमें परिभाषित करती है। यह धर्म का एक आवश्यक आयाम है और मिलन कुंदेरा ने कहा है कि सत्ता के खिलाफ मनुष्य का संघर्ष वैसे ही है जैसे विस्मृति के खिलाफ स्मृति का संघर्ष। यह बहुत शक्तिशाली बात है। यह एक ऐसी स्मृति है जो हमें विस्मृति से रोकती है। स्मृति मरती नहीं है। स्मृति की यही सुंदरता है। मैं शायद इसके बारे में सीधे शब्दों में अपनी बच्चों से बात भी नहीं कर सकता, लेकिन मुझे पता है कि मेरी संतानें समझ जाएंगी कि मैं क्या संदेश देना चाहता था और वे इसपर चुप्पी साध लेंगे। स्मृति मौन के सहारे आगे बढती है। मुझे लगता है कि आप सभी इस तस्वीर को जानते हैं। है न? ठीक है। मेरे पास इसके बारे में एक कहानी है जिससे शायद पहली बार मुझे समझ में आया कि आघात का क्या मतलब है। मेरे पिता पास के स्कूल में पढ़ाते थे। रायसीना.. रायसीना बंगाली स्कूल में। इसलिए बहुत बार हम बच्चे वहां जाते थे और खेलते थे और पंडित जी से प्रसाद लेते थे जैसे लाखों बच्चे पूरे देश में करते हैं। हम सभी खेलते थे, और हम खेलने के बाद पंडितजी से प्रसाद लेकर वापस घर चले जाते थे। मैं वहां के हर नुक्कड़-कोने को जानता था।

मुझे याद है एक दिन मैंने इस श्वेत जोड़े को अपने गाइड के साथ बहस करते देखा। गाइड उन्हें बता रहा था कि यह यहाँ का सबसे बड़ा मंदिर और सबसे सुंदर मंदिर है। पर वे अपनी किताबों और परामर्श के हवाले से कह रहे थे कि यह तो बहुत नया मंदिर है। इसे 1939 में बनाया गया था। हम कुछ और खूबसूरत मंदिरों को देखना चाहते हैं, जैसे हमने दक्षिण भारत में देखा था। जब गाइड ने कहा, नहीं, हमारे पास कोई नहीं है। योगमाया नाम का एक मंदिर है जो बहुत छोटा मंदिर है। तब उन्होंने कहा कि दिल्ली एक हिंदू शहर था। हमने मस्जिदों को देखा है जो कुछ सौ साल पुराने हैं, उदाहरण के लिए जामा मस्जिद लगभग 300 साल पुरानी है। हमने एक अन्य सुनेहरी मस्जिद को देखा है … यह मस्जिद है, लेकिन हमें कोई मध्ययुगीन मंदिर नहीं दिखता है। तो, क्या इसका मतलब यह है कि हिंदुओं ने कोई निर्माण नहीं किया, कोई मध्ययुगीन मंदिर नहीं बनाया? तो, गाइड ने कहा, हाँ! शायद ऩही। सदियों तक हमने कोई बड़ा मंदिर नहीं बनाया। मंदिर छोटे थे क्योंकि एक नियम था कि मंदिर के शिखर को नहीं देखा जाना चाहिए। फिर उन्होंने पूछा और मुझे अभी भी याद है- तो आपके कहने का मतलब है कि आप अपने ही देश में दोयम दर्जे के नागरिक थे? आपको यह कैसा लगा? मुझे नहीं पता कि यह प्रश्न पुरुष ने पूछा या महिला ने, कि आपको कैसा लगेगा जब आप आसपास देखेंगे कि आपके पास खुद का कोई मंदिर नहीं हैं जबकि दूसरों के बड़े-बड़े मंदिर हैं? आपको क्या लगता है कि लोगों को तब कैसा लगा होगा? गाइड ने कहा, मैं इसका जवाब नहीं दे सकता। इसलिए, वे चले गए। मुझे याद नहीं है कि बाद में क्या हुआ, वे उठे, वे चले गए लेकिन मैंने अपने पिता से इसपर चर्चा की।

मेरे पिता एक स्कूल शिक्षक थे और उन्होंने कहा कि हम ऐसी चीजों के बारे में बात नहीं करते हैं! इस बारे में बात मत करो। तो, मैंने कहा, “बाबा, क्या यह सच है कि हमने लगभग आठ-नौ सौ वर्षों तक कोई बड़ा मंदिर नहीं बनाया, क्योंकि इसे बनाने से लोग डरते होंगे कि अगर उन्होंने इसे बनाया, तो यह होगा।” .. उन्होंने कहा, “हाँ, शायद नहीं।” लेकिन फिर उन्होंने कहा, “इस बारे में बात मत करो। किसी के साथ इस पर चर्चा न करो “, और मैंने भी किया भी नहीं। हम अभी भी इतने डरे हुए क्यों हैं? जबतक मैं बड़ा हुआ तब तक यह बात मेरे मन में उठती रही। मैंने अपने एक दोस्त, एक प्रोफेसर से पूछा कि आप क्या सोचते हैं और क्यों? उन्होंने कहा, “यह शायद राष्ट्रवाद के कारण हुआ। राष्ट्रवाद की भावना जिसने हिंदुओं को मंदिर बनाने का साहस दिया।” और फिर उन्होंने कहा,” मैंने सुना है कि इसे बनाने वाले वास्तुकार खुशी से रो पड़े, जब उन्हें एहसास हुआ कि वे कई सदियों के बाद फिर से एक बड़े मंदिर का निर्माण कर रहे हैं।

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