इस्लामी आक्रमण मुख्य चुनौतियाँ

पलनी बाबा के भाषण और उपदेश – एक कट्टरपंथी उपदेशक के विचारों की एक झलक (भाग -1)

Source Article – HinduPost.in

आई.एस.आई.एस और अल-कायदा के इस युग में मुसलमानों के कट्टरपंथ की प्रक्रिया और तरीकों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। विचारक और राजनेता समान रूप से, आधुनिक प्रौद्योगिकी के साधनों, इंटरनेट और मोबाइल प्रौद्योगिकियों के साधनों द्वारा कच्चे तेल के पैसे से वित्त-पोषित सऊदी बहावी कट्टरपंथ को फ़ैलाने की गलती गलती करने को उत्सुक हैं।

पुराने कट्टरपंथीकरण कार्यक्रम, जो अन्य स्थानों और समयों में किए गए थे, के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

यहां, हम आपके लिए एक करिश्माई कट्टरपंथी उपदेशक पलानी बाबा द्वारा कट्टरपंथी विचारों को लाने का प्रयास के बारे में बताएँगे, जिन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पूरे तमिलनाडु की यात्रा की थी। हिंदू कट्टरपंथियों के एक समूह द्वारा संभवतः 1997 में उनकी हत्या कर दी गई थी।

हमारा प्रयास कई उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया गया है

एक जिहादी उपदेशक विचार की वैचारिक स्पष्टता और उद्देश्य की विशिष्टता बताने के लिए।

यह बताने के लिए कि पलानी बाबा जैसे किसी व्यक्ति से कट्टरपंथी दृष्टिकोण, जिसका मुख्य कार्य इंटरनेट और मोबाइल टेलीफोन से पहले के जमाने में था, जब तमिलनाडु के सुदूर क्षेत्रों में सड़क यातायात आज के तमिलनाडु की तरह विकसित नहीं हुए थे, और जब सामान्य आबादी कम साक्षर थी, सूचना माध्यमों से आपस में कम जुड़ी हुई और आज के तमिलनाडु की तुलना में कम समृद्ध थी, आज के किसी भी इंटरनेट जिहादी के जैसी ही थी।

हालाँकि, हमारे पास इस बात के वास्तविक साक्ष्य नहीं है कि किस तरह इस्लामिक कट्टरपंथी प्रचारकों ने किंग चीन के समय में काम किया, जैसे कि मा-मिंगजिन या पर अभी हाल के भारत का ‘मालाबार लहला’(मोपला नरसंहार) का हमारे पास रिकॉर्ड किए गए भाषण उपलब्ध हैं। यह इस्लामी कट्टरपंथी कार्यक्रमों के ऐतिहासिक निरंतरता को प्रदर्शित करने का काम करेगा।

यह प्रदर्शित करने के लिए कि इस्लामी कट्टरपंथ ऐसी चीज नहीं है जिसके पैदा होने के लिए भेदभाव, गरीबी और दुख की परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, बल्कि मुसलमानों के अपेक्षाकृत अच्छी तरह से एकीकृत समूह के बीच एवं शांति और समृद्धि के समय में इसके बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है।

यह साबित करने के लिए कि इस्लामिक कट्टरवाद इस्लाम से हटकर कोई अवधारणा नहीं है, न ही कोई अचानक घटने वाली घटना, बल्कि यह इस्लाम का बिलकुल आंतरिक और ऐतिहासिक स्वरुप है।

काल और संदर्भ

1980 के दशक में, ग्रामीण तमिलनाडु के बड़े हिस्से सड़क, रेडियो और समाचार पत्रों द्वारा बाहरी दुनिया से जुड़े थे। टेलीविजन सभी मध्यम-वर्गीय घरों में दिखाई पड़ जाता था, यहां तक ​​कि छोटे शहरों में भी, और सर्वव्यापी सार्वजनिक टेलीफोन – बोलचाल की भाषा में ‘एस.टी.डी बूथ’- मुख्यतः कृषिआधारित गांवों में भी फैलने लगा था।

 

तमिल मुस्लिम कुड्डालोर के दक्षिण में सुन्नियों का एक छोटा सा समुदाय था, और उत्तर में उर्दू बोलने वाले मुसलमानों का एक और छोटा समुदाय। अर्कोट के नवाब एक महज औपचारिक मुस्लिम नेता थे और शिया होने के नाते तमिल मुस्लिम समुदाय में एक उप-अल्पसंख्यक भी थे। 200 वर्षों के इतिहास में यहाँ कभी कोई इस्लामिक साम्राज्य अपनी जड़ें नहीं जमा पाया था। इसलिए, तमिलनाडु के बड़े हिस्से पर देशी हिंदू शासकों या तेलुगु और मराठी शासकों का शासन था।

सदियों से तमिल मुसलमान एक बड़े तमिल समुदाय का एकीकृत हिस्सा थे। उनके पोशाक, भोजन, शादी के रीति-रिवाज और भाषा हिंदुओं, जिनके बीच वे जीवन-यापन कर रहे थे, की बड़ी आबादी से काफी मिलती-जुलती थी। आज़ादी के समय के करिश्माई नेता, मुहम्मद इस्माइल, जिन्हें क़ैद-ए-मिलत के नाम से जाना जाता है, ने शैक्षणिक संस्थानों की विरासत और द्रविड़ पार्टियों के साथ सहयोग की नीति की एक मिसाल छोड़ गए थे। तब भी और अभी भी मुसलमान मुख्यतः छोटे व्यापारी और पेशेवरों हुआ करते थे और इनका अभिजात वर्ग का भी एक बड़ा आकर था – विशेष रूप से वकील और शिक्षकों का।

80 के दशक तक कई युवाओं ने काम के लिए खाड़ी देशों की यात्रा करना शुरू कर दिया था, जहां वे कच्चे तेल के धन और अरब अभिजात वर्ग के धर्म के संपर्क में आए थे। वे अपने हिंदू पड़ोसियों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक समृद्ध हो गए, इसलिए तुलनात्मक रूप से गरीबी के कारण नाराजगी कट्टरता बढ़ने का कारण नहीं थी, जैसा कि आमतौर पर अन्य उदाहरणों में होता है।

व्यक्ति और उसके तरीके

इसी बीच एक करिश्माई प्रचारक – पलानी बाबा – का उदय होता है। उसके पूर्वजों, उसके प्रशिक्षण और शिक्षा के बारे में अधिक पता नहीं लगाया जा सका। यह संभव है उन कार्यों की खतरनाक प्रकृति को देखते हुए जो वह कर रहा था, वह अपने परिवार की सुरक्षा के लिए बहुत अधिक खुलासा नहीं करता हो । उसका भाषण तमिलनाडु के पश्चिमी कोंगु बेल्ट के एक अमीर ज़मींदार पृष्ठभूमि से होने का सुराग देते हैं। हालाँकि, ऐसा लगता है कि उसने भारत और खाड़ी देशो में बड़े पैमाने पर यात्रा की है। उसके भाषण राजनीतिक हैं और बड़े पैमाने पर मोमिन (इस्लाम माने वाले) को संबोधित किए गए हैं। उसका भाषण जनोत्तेजकता का सटीक उदाहरण है। बारी-बारी से, वह अपने दर्शकों को धमकाता है, अवमानना ​​करके उनके गुस्से को बढ़ाता है और फिर उन्हें माफ कर देता है जैसे पिता गलत बच्चों को माफ कर देते हैं। अंत में, वह स्वयं की मासूमियत पर कुछ शब्दों कहकर भाषण समाप्त करता है।

उसकी भाषा रोजमर्रा की सरल तमिल है पर मुस्लिम धर्मशास्त्रीय शब्दों का इसमें भारी उपयोग किया गया है। कई बार वह द्रविड़ राजनीतिक वक्ताओं को पसंद आने वाली नाटकीय अतिशयोक्ति, जिसे किसी भी तमिल राजनीतिक वक्ता को इस्तेमाल करना चाहिए, का वह उपयोग करता है और उसके दर्शक उसकी इस शैली के आदि हो चुके लगते हैं ।

उनके एक भाषण का संक्षिप्त अनुवाद इस प्रकार है। इसे थोडा क्रम में और संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है, क्योंकि मूल भाषण एक लंबे समय तक चलने वाला एकालाप है।

काफिरों पर

वह अविश्वासियों के वर्गीकरण से शुरू करता है – मुशरिकीन, मुनफिकीन और कुफ्र।

इबलीस (लूसिफ़ेर) अल्लाह की सर्वोच्च कृतियों में से एक था, लेकिन जब से वह अल्लाह को आदम से ऊपर  स्वीकार करने में असफल रहा, उसे दुत्कार दिया गया था। उसके दुत्कारे जाने का एकमात्र कारण था कि उसने अल्लाह के शासन को चुनौती दी थी।

इस प्रकार, एक मुसलमान जो मुस्लिम होने का दावा करता है, लेकिन अल्लाह या उसके रसूल के निर्देशों का पालन नहीं करता है, उसे मुनफ्फिक (ढोंगी) माना जाता है जो काफिर होने के बराबर ही है।

एक काफ़िर या मुशरिक एक शैतान के तरह ही है और सदा के लिए लानत भोगने योग्य है। एक मुनफिक का हश्र इससे बेहतर नहीं हो सकता।

मुनफ्फिकिन पर

तमिल मुसलमानों के बीच निफ़ाक़ (पाखंड) फैलाने वाली बातें क्या-क्या हैं?

दुल्हन के परिवार से दहेज लेने की प्रथा, जो मुस्लिम रिवाज यानि मेहर (दुल्हन की कीमत) देने और मुस्लिम के साधारण निकाह करने के विश्वास के खिलाफ है।

औलिया(संतों) की कब्रों के लिए जुलूस का आयोजन। कोई वली की कब्र पर रुक सकता है, अल्लाह से खुद को वली बनाने की दुआ मांग सकता है, लेकिन खुद वली की इबादत करना या उसके अवशेष की इबादत करना शिर्क(बहुदेववाद) हैं।

मुशरिकों के लिए झाड-फूंक करना या उनके लिए दुआ मांगना, पैगंबर तक के लिए भी शिर्क है।

मजहब को लेकर विवाद ज़ारी रखना और इसे समुदाय के बाहर ले जाना झगड़ालू होने जैसा है। एक मुसलमान जो मजहबी सवालों पर झगड़ता है, वह एक काफिर के जैसा है (ध्यान दें कि यह पैगंबर के एक कथन की व्याख्या है – ‘यदि कोई दूसरे को काफिर कहता है, तो वह स्वयं उनमें से एक है ‘- साहिह मुस्लिम 80)। यह सोच सलाफी-तकफिरी स्कूल का आधार भी है, जो आई.एस.आई.एस जैसे समूहों की वैचारिक नींव है।

धर्मान्तरण पर

गांवों में अनुसूचित जाति के लोगों की पहचान करें जो गरीब हैं। मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार, अच्छे और सम्मानित मुस्लिम परिवारों के लड़कों से उनकी बेटियों की शादी करवाएं। फिर उनका इस्तेमाल पड़ोस के लोगों के धर्म परिवर्तन के लिए करें ।

वह बताता है कि कैसे जयललिता को धर्मांतरण विरोधी कानून को वापस लेने के लिए मजबूर किया गया था। फिर वह बताता है कि कैसे उसने और उसके जिहादियों के झुंड ने एक ही गांव में कई परिवारों को धर्मपरिवर्तन के लिए कलेक्टर से पुलिस सुरक्षा प्रदान करने के आदेश प्राप्त किए।

यह शायद एक खोखला भाषण है, जिसका वह अभ्यस्त था, लेकिन यह उदाहरण दर्शकों को खुद से कुछ करने का आत्मविश्वास देने में बहुत प्रभावी है।

उत्साहित होकर वह यह भी बताता है कि कैसे वह दंगे करने वाले अपने समूह के लड़कों को जमानत पर बाहर निकालता है, और कैसे वह एक विधायक और वरिष्ठ पुलिस अदिकारी को कानूनी दाव-पेंच में फंसाता है।

He has now moved from berating people on their compromises with Islam to reminding them of their duty in converting people, and helping them overcome their mental discomfort in carrying on conversion.

हालाँकि, यह भी बाढा-चढाकर पेश किया हुआ लगता है, लेकिन कुछ टीवी चैनलों और बिना इंटरनेट के युग में, वह सुनने में बहुत आश्वस्त लगता है, खासकर छोटे गांवों के लोगों के लिए।

वह अब लोगों को धर्मांतरित करने के उनके कर्तव्य की याद दिलाने के लिए इस्लाम के साथ उनके समझौते पर लोगों को बरगलाता है, और उन्हें धर्मांतरण करने की उनकी मानसिक हिचक को दूर करने में मदद करता है।

Next, he mentions how he had consolidated jamaats and mosque administration across districts. A simple rule he gives – mobilize 500 representatives for 5 lakh Muslims in a region. Any time there is trouble, go as 500 people to the authorities.

एकजुट होना और आंदोलन करना

देवीपत्तनम में, एक मुनीश्वरन मंदिर का अतिक्रमण किया गया था और फिर उसे एक मस्जिद में बदल दिया गया था। उसने बताया कि कैसे उनके मूल भूमि रिकॉर्ड चुराए गए थे और जिला अधिकारियों के लिए मूल स्वामित्व साबित करना असंभव कर दिया था।

इसके बाद, वह बताता है कि कैसे उसने कई जिलों के जामातों और मस्जिद प्रशासन को एकजुट किया। वह एक साधारण नियम देता है – एक क्षेत्र में 5 लाख मुसलमानों के लिए 500 प्रतिनिधि जुटाओ। किसी भी समय अगर परेशानी होती है तो अधिकारियों के पास 500 लोगों के साथ जाएं।

अंत में, वह निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की आवश्यकता पर बात करता है ताकि संसद में अधिक मुस्लिम प्रतिनिधि भेजने के लिए निर्वाचन क्षेत्र मुस्लिम बहुल बन सकें। उसने यह भी उल्लेख किया कि मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्र आरक्षित नहीं होने चाहिए।

हथियारों उठाने का आग्रह

अंत में, वह हथियार उठाने का पैगाम देता है, जिसमें चिर-परिचित दावे भी शामिल है कि 20 मुस्लिम पुरुष 200 काफिर पुरुषों से अच्छे हैं। वह तवक्कुल पर भरोसा (भगवान की योजना में विश्वास) करने का आग्रह करता है यानि मानव निर्मित कानूनों और संस्थानों को ‘भ्रष्ट’ घोषित करने और अधिकारियों के साथ केवल तब तक सहयोग करने की सामान्य इस्लामी शर्तें, जब तक कि यह इस्लाम के विपरीत नहीं है।

टिप्पणियाँ

आज इसके धर्मशास्त्र, शब्दावली और उपदेशात्मक शैली हमारे लिए परिचित है,  क्योंकि हम इस्लामी जगत से बखूबी परिचित हैं, लेकिन इसने उसके दर्शकों के कुछ हिस्सों को गहराई से प्रभावित किया होगा। वह आम समस्यायों, दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के साथ शुरू होता है, लेकिन ये अपने आप में एक बुरे नहीं, बल्कि अल्लाह की आज्ञाओं के खिलाफ जाने के कारण बुराई है की बात करता है। यहाँ से पूरे शरीर को ढकने वाले बुर्का और तौहीद पर जाने में ज्यादा दूरी नहीं है।

जैसा कि अन्य उदाहरणों में देखा गया है, जैसे कि क्विंग चीन में, बहुत कम समय के भीतर समाज में अच्छी तरह से घुली-मिली मुसलमानों की आबादी को कट्टरपंथी बनाना आसन है। इस्लाम की मूल शिक्षाएँ ही कट्टरपंथ के बीज को धारण करती हैं। इसके लिए बस करिश्माई नेताओं की जरूरत होती है।

समापन भाग में, हम एक अन्य भाषण का अनुवाद करेंगे, जो मोमिनों के बारे में कम पर एक काफिर राज्य,जो इस्लाम की निगाह में नाजायज है, के खिलाफ आक्रामकता के बारे में अधिक है।

Read Second Part Here.

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