मंगलवार, जुलाई 16, 2019
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भारत में इसाई मिशनरियों के विषय में डॉ. सुरेंद्र जैन का व्याख्यान

इससे जुड़ा हुआ दूसरा प्रश्न, जो सामान्यतः भारत में ही पूछा जाता है, और वह प्रश्न है कि अगर यह धर्मांतरण करते हैं तो आपको क्या आपत्ति है ? क्योंकि भारत का संविधान आर्टिकल 25 कहता है कि सभी को अपना धर्म मानने, उसका प्रचार करने, और उसे विस्तार करने की संपूर्ण आज़ादी देती है। इसलिए आप कैसे मना कर सकते हैं ? वह लोग अर्ध सत्य बोलते हैं। भारत का कोई भी संवैधानिक अधिकार पूर्ण नहीं है, उस पर कुछ शर्ते हैं। इस आर्टिकल 25 के जो बाद वाला हिस्सा है वह मेरे मिशनरी मित्र जानबूझकर सामने नहीं लाते और उनका समर्थन करने वाले लोग उसको छुपाते हैं।

कुछ दिन पूर्व एक बहुत बड़े चैनल के एंकर से मेरी इसी विषय पर वार्तालाप हो रही थी और उन्होंने भी आर्टिकल 25 का जिक्र किया और मैंने उनको बताया कि श्रीमान आप अर्ध सत्य बोल रहे हैं, बाकी का हिस्सा क्या है? बाकी का हिस्सा कहता है कि यह शर्तें नैतिकता, कानून का पालन और स्वास्थ्य। धर्म विस्तार के काम से समाज की शांति नहीं खत्म होनी चाहिए, अव्यवस्था नहीं होना चाहिए, लोगों के नैतिक मूल्यों का हनन नहीं होना चाहिए।
यह सब बातें आर्टिकल 25 का हिस्सा है, और इस अधिकार को और ज्यादा परिभाषित किया है स्टेन्स लोस Vs. स्टेट ऑफ उड़ीसा केस में। यह मुकदमा सुप्रीम कोर्ट के अंदर गया 1976 में और इस मुकदमे के अंदर यह बताया गया किसी धर्म का प्रचार करने का अधिकार धर्मांतरण करने की आज़ादी नहीं देता है। धर्मांतरण करने का अधिकार मुझे है मुझे अपने मत का पालन करने से कोई रोक नहीं सकता।

धर्मांतरण मैं अपनी मर्जी से कर सकता हूं कोई जबरदस्ती मुझे करवा नहीं सकता। और करने के लिए भी कई ऐसे मुकदमे हैं जो बताते हैं धोखाधड़ी से धर्मांतरण, प्रलोभन से धर्मांतरण और बलपूर्वक धर्मांतरण यह सब गैरकानूनी है। धोखे, लालच और बलपूर्वक अगर धर्मांतरण किया जाता है तो यह गलत है और आज मैं यह पूरे दावे के साथ वह कहता हूं जो महात्मा गांधी ने कहा था – भारतीय ईसाई चावल के लिए ईसाई बने है, मुट्ठी भर चावल के लिए ईसाई बने हैं। 99% ईसाई वह है जिनके पूर्वज हिंदू थे।

मैं आज दावे के साथ कहता हूं कि जो बनवासी जंगल के अंदर रहने वाले थे, जो अनुसूचित जाति के मेरे भाई जो दलित बस्तियों के अंदर रहने वाले थे, और जो गांव में रहने वाले अनपढ़ लोग थे मैं यह दावे के साथ कहता हूं कि वह चर्च में जाकर बाइबल समझ कर धर्म बदले हैं ऐसा बिल्कुल नहीं है। जो चुनौती में पिछले 20 सालों से दे रहा हूं, ऐसा एक भी व्यक्ति नहीं होगा जिन्होंने ऐसे धर्म परिवर्तन किया है। लोगों को धोखा दिया गया है किस तरह के उदाहरण सामने आते हैं नियोगी कमीशन में भी यह विस्तार से बताया गया है। विद्यालयों के बस लिए जा रहे हैं, रास्ते में बस खराब हो गई वाहन चालक को इशारा है ।

सब को कहा गया अपने अपने भगवान को याद करो। भगवान जी के हाथ में तो चाबी नहीं है, कोई रामजी चालू करो कोई शंकर जी चालू करो कि प्रार्थना करते हैं। अब मैं तुम्हें नया भगवान बताता हूं वह पादरी कहते हैं, कहो जीसस बस शुरू करो। वाहन चालक को संकेत मिलता है बस चालू होती है। जीसस की जय, सब का धर्मांतरण। सैकड़ों प्रकार है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को धोखा देते हैं यश चंगाई सभा धोखा नहीं है तो क्या है ? पुजारी मंत्र पड़ेगा जाप करेगा कोई पानी डालेगा ठीक हो जाएंगे लोग ? कोई ठीक नहीं होगा तो कहेंगे कि इसे जीसस पर विश्वास नहीं है इसीलिए यह ठीक नहीं हुआ । तुमने मदर टेरेसा को क्यों नहीं ठीक कर लिया ? जो पिछला पादरी था उसे तो पार्किंसन रोग था, उसे क्यों नहीं ठीक कर लिया पिछले पोप को ? करोड़ों डॉलर इन के इलाज पर खर्च हुए थे या तो इनको जीसस पर भरोसा नहीं था या वह दुनिया को धोखा देते हैं चंगाई सभा करके।

तो हम देखते हैं कि इन सब कारणों से ही यह जो धर्मांतरण है वह उचित नहीं है। एक बड़ा मजेदार बात है तुम कहते हो तुम्हें धर्मांतरण का संवैधानिक अधिकार है, तो फिर घर वापसी का विरोध क्यों करते हो ? आज तुमने मिस्टर एक्स को कहा वह तुम से प्रभावित होकर ईसाई बन गया कल को उसे समझ में आया कि उसकी जड़े तो यहां नहीं है, मेरी जड़े तो हिंदू धर्म के साथ है मैं वहां आना चाहता हूं । फिर क्यों उसका विरोध करते हो ? क्यों कहते हो कि विश्व हिंदू परिषद अगर घर वापसी का कार्यक्रम चलाएगा तो गृह युद्ध हो जाएगा ?

यह धमकी मुझे मिली है। मैंने परिचय बताया था उस समय में बजरंग दल में था, आसाम में था मैं उस समय वहां पर वी. के. नूह नाम के एक बिशप ने धमकी दी है की घर वापसी का कार्यक्रम अगर विश्व हिंदू परिषद ने नहीं रोका तो हम गृहयुद्ध करेंगे।

संपूर्ण मानवता आज इस धर्मांतरण के कारण त्रस्त है और यह ध्यान करना कि यह केवल धर्मांतरण नहीं है, यह एक युद्ध की घोषणा है। क्यों ? क्योंकि जो लोग धर्मांतरण करने जाते हैं उनका नाम देते हैं साल्वेशन आर्मी (मुक्ति सेना दल) वह सेना है तो सेना धर्म के काम करने नहीं जा सकती। संत जाएंगे हमारे यहां । अभी यहां स्वामी निश्चलानंद की चर्चा हो रही थी हमारी एक बहन आई हुई है रुचि, शांति के प्रतीक है एकदम निश्चल है जैसा नाम है वैसा ही स्वभाव है। और अभी बात चल रही थी कि अगर वह किसी को डांट लगा दे तो बहुत खुशकिस्मत है क्योंकि वह उसी को डांट लगाते हैं जिस को अत्यधिक प्यार करते हैं। वह कहीं पर धर्मांतरण करने के लिए नहीं जाते केवल प्यार और शांति का संदेश देने के लिए ही जाते हैं, सेना की जरूरत नहीं पड़ती है उनको। धर्म योद्धाओं (Crusaders) की भर्ती करते हैं, जरा देखिए इसमें लिखा हुआ है।

इनका भर्ती करने का एक पत्रक है – धर्म योद्धाओं (Crusaders) सावधान जीसस बोल रहे हैं उन्होंने आप को धर्म युद्ध करने का भार सौंपा है। ​क्रूसे्ड (Crusade) का मतलब धर्म युद्ध सीधे-सीधे युद्ध की घोषणा। किस तरह का साहित्य छापते हैं, घृणा युक्त साहित्य कितना भयंकर है वह और उस घृणा आयुक्त साहित्य का एक उदाहरण मैं आपके सामने प्रस्तुत करता हूं। एक उदाहरण है यह पोस्टर जो हैदराबाद में एक मिशनरी ने छापा है। पुराना है लेकिन आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है और इसके लिए उन्होंने आज तक माफी नहीं मांगी है। एक ब्राह्मण पुजारी किस के चरणों में जीसस के चरणों में, यही कल्याण का मार्ग है। क्या यह पुजारी का, हिंदू धर्म का अपमान नहीं है ? ऐसे और न जाने किस प्रकार के साहित्य छापते हैं और उनसे वर्ग संघर्ष होता है। अगर कहीं सूखा पड़ जाए, बाढ़ आ जाए तो क्या साहित्य छापते हैं की आत्माओं की फसल काटने का मौका दिया है तुम्हें जीसस ने। सेवा नहीं करना है बाइबल का प्रचार करना है, उनको ईसाई बनने के लिए प्रेरित करना है यही सबसे बड़ी सेवा है उनकी। इसीलिए तो पोप भारत की धरती पर आकर दिवाली के दिन चुनौती देते हैं ।

ध्यान रखना यह कौन सा धर्म है ? ‘पहली सहस्राब्दी मैं यूरोप पर विजय प्राप्त की’ । दूसरी सहस्राब्दी में अफ्रीका व तीसरी सहस्राब्दी में एशिया पर विजय प्राप्त करेंगे। मैं समझता हूं यह मानवता के विरुद्ध सबसे बड़ा अपराध है, सबसे बड़े युद्ध की घोषणा है, यह वर्ग संघर्ष निर्माण करते हैं और केवल वर्ग संघर्ष ही निर्माण नहीं करते अगर कोई इनके धर्मांतरण में कोई बाधा डालता है तो उसको मरवाने में भी संकोच नहीं करते। मैं केवल दो उदाहरण आपके सामने दूंगा त्रिपुरा के शांति काली जी महाराज, उड़ीसा के लक्ष्मणआनंद जी महाराज धर्मांतरण में बाधा डालते थे। मैं कुछ दिन पहले उनके आश्रम गया था वह खून के निशान, किस तरह से वह भागे हैं, भागे मौत के डर से नहीं है । काम बहुत बाकी था । छोटे-छोटे मासूम बच्चों के सामने उनका अंग अंग काटकर किस तरह से अलग किया गया यह काम करने वाले कोई हत्यारे हो सकते हैं, कोई धार्मिक नहीं।

लक्ष्य किस तरह का रखते हैं जोशुआ 2000, मिशन मैंडेट 2000, कुछ और भी चीजें हैं एक सुंदर राजन नाम के इनके हैं उन्होंने भी कुछ बोला। चर्च का विस्तार कैसे करेंगे । पहले हर एक पिन कोड पर एक चर्च बनाएंगे, उसके बाद हर गांव में बनाएंगे, उसके बाद इतनी दूरी पर बनाएंगे की एक चर्च के घंटे की आवाज दूसरी चर्च से सुनाई दे। जरा कल्पना कीजिए कि इस तरह की चीज है यह कर रहे हैं इसलिए जितने भी विश्व के मनीषी हैं, धर्मात्मा है वह यह चिंतन कर रहे हैं और धर्मांतरण के विषय पर चिंतित है। हमने कभी नहीं रोका किसी ईसाई को चर्च में जाने से। अभी केरल की एक सभा में मैंने स्पष्ट शब्द में कह कर आया कि अगर आपके पास चर्च कम पड़ती है तो मुझे बताइए मैं चर्च बना कर दूंगा। पहले चर्च भी एक हिंदू राजा ने बना कर दी थी। तुम जाओ, रविवार को छोड़ो हर रोज जाओ पूरा समय चर्च पर रहो कोई रोकता नहीं है। लेकिन तुम जहां एक भी ईसाई नहीं है वहां चर्च क्यों बनाओगे ?

क्या मुझे वेटिकन सिटी में हनुमान मंदिर बनाने की अनुमति दोगे ? वहां हिंदू रहता ही नहीं तो मैं क्यों बनाऊंगा ? हनुमान मंदिर हिंदुओं के लिए पूजा का स्थान है। वैसे ही चर्च सिर्फ ईसाइयों के लिए पूजा का स्थान है, यदि वह ऐसी जगह में चर्च बना रहे हैं जहां एक भी ईसाई नहीं है तो समझ लीजिए यह धर्मांतरण के युद्ध की घोषणा है। चर्च की घंटी ही नहीं वह युद्ध का नाद है जो वहां पर रहने वाले लोगों को त्रस्त करता है।

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