इंजीलवाद और हिन्दुओं की रक्षा भाषण के अंश मुख्य चुनौतियाँ

भारत में बलपूर्वक धर्मान्तरण हेतु ईसाई चर्च द्वारा नरसंहार

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भारत में ईसाइयत का प्रचार कैसे हुआ यह एक बहुत आश्चर्यजनक तथ्य है ईसाई मिशनरी भारत में शरणार्थी के तौर पर आए थे। सीरिया के ईसाई मालाबार के अंदर अपने ही धर्म के लोगों से प्रताड़ित होते थे।

उस समय विश्व में ज्यादातर जगहों पर खासकर यूरोप में ईसाई धर्म का ही वर्चस्व था और इसलिए वह भारत आए। राजा चेरामन ने केवल शरण ही नहीं दिया अपितु अपने धर्म का स्वतंत्रता पूर्वक पालन करने का केवल अधिकार ही नहीं दिया आपको जानकर खुशी होगी कि भारत में पहला चर्च एक हिंदू राजा ने बनवाया था। उन्हें बहुत सम्मान दिया गया लेकिन 1498 में वास्कोडिगामा आता है। आप लोग गोवा गए होंगे वहां वास्को के नाम से बहुत सारी जगह है। वह यहां पर सिर्फ पर्यटन के लिए नहीं आया था। वक्त पुर्तगाली राजा के आदेश पर भारत की खोज में निकला था। पुर्तगाली राजा को पोप ने आदेश दिया था कि भारत को ढूंढो और वहां धर्मांतरण करो। वह तोपों के साथ घूमने के लिए नहीं आया था। आश्चर्य की बात यह है कि जब वह अपनी सेना लेकर भारत आया तो जिन सीरिया के ईसाइयों को हमने शरण दिया था वह वास्कोडिगामा के साथ खड़े हो गए। वह सब मिलकर नरसंहार करते हैं और धर्मांतरण करते हैं। यह कुछ मात्रा में होता रहा लेकिन 1542 में जब सेंट जेवियर आते हैं, सेंट शब्द उनके लिए ही ज्यादा प्रयोग किया जाता है जिन्होंने ज्यादा धर्मांतरण किए हैं। सबसे अधिक अत्याचारी इनके यहां सबसे अधिक पूज्य व्यक्ति रहा है।

जब सेंट जेवियर भारत आते हैं, तो थोड़े दिन में उनके साथ फौज आती है और उसके बाद हिंसा का नंगा नाच शुरू हो जाता है। वह गोवा इनक्विजिशन की स्थापना करते हैं (धर्म न्यायालय)। गोवा इनक्विजिशन की स्थापना करने का उद्देश्य है यही था कि जो ईसाई बनने से इंकार करता है, उस इनक्विजिशन के माध्यम से उसको सजा मिलेगी। सब को सजा मौत की मिलती थी और मौत भी बहुत प्रताड़ित तरीके से किया जाता था।

दो तीन उदाहरण मैंने दिए है, आज उन्हें तथ्यों के साथ दिखाया जा सकता है उनकी तस्वीरें उपलब्ध है। समय की कमी के कारण मैं आज इस विषय पर विस्तार से नहीं जा रहा। पूरी पुस्तक गोवा इनक्विजिशन में हुए अत्याचारों के ऊपर 2 लोग छाप चुके हैं।पांडिचेरी की तरफ हम चलते हैं। वहां 50-60 मंदिर एक साथ तोड़ दिए जाते हैं और वह दृश्य देखकर सेंट जेवियर कहता है कि आज मेरी आंखों में ठंडक पड़ गई है। भाइयों बहनों ढाई सौ साल तक इस गोवा इनक्विजिशन के कारण समस्त दक्षिण भारत सीसकता रहा, रक्त के आंसू रोता रहा।

आज आप जाएं वहां पर केवल पर्यटन स्थल ही नहीं घूमे थोड़ा अंदर में भी देखें। आपको वहां पर एक हथकतरा खंब दिखाई देगा। यह खंबा सेंट जेवियर के समय का है। जो ईसाई बनने से इनकार करता था, उस खंबे के पीछे उसके हाथ बांध करके उसे खड़ा कर देते थे । महीने डेढ़ महीने तक उसे खाना पानी नहीं दिया जाता था और फिर उसके बाद उससे पूछा जाता था कि क्या वह ईसाई बनने के लिए तैयार है। अगर वह धर्मांतरण के लिए तैयार नहीं होता था तो उसके हाथ काट दिए जाते थे दोनों और इसीलिए उस खंभे का नाम हथकतरा खंभ पड़ा पड़ा।

वहां एक बाग है पास में, मैं कुछ दिन पूर्व गया मुझे बताया गया कि उसे वहां का जलियांवाला बाग कहते हैं । गांव के सब लोगों को उस बाग में एकत्रित किया गया और पूछा गया कि धर्मांतरण करते हैं कि नहीं गांव के लोगों ने मना कर दिया और वहां सब लोगों को गोलियां मार दी गई। चारों तरफ सिपाही खड़े थे तो लोग बचके नहीं भाग सके, सब को गोलियों से मार दिया गया। वह बाग आज भी उपस्थित है वहां पर।

चाहे पुर्तगाली आए हो, चाहे फ्रेंच आए हो, चाहे डच आए हो, चाहे अंग्रेज आए हो, चाहे ईस्ट इंडिया कंपनी आई हो यह सब अपना ईसाई साम्राज्य के विस्तार के लिए ही हिंसा का प्रयोग करते रहे । सब प्रकार के षड्यंत्र करते रहे। बस एक बहुत बड़ा दुर्भाग्य है भारत के साथ पूरी दुनिया में जहां कहीं भी ईसाइयों ने अत्याचार किए हैं वहां के लिए पोप बार-बार माफी मांग रहे हैं। क्यों ? क्योंकि वहां का समाज राष्ट्रीय स्वाभिमान के साथ खड़ा है और वह कहते हैं कि हम आपके साथ तब जुड़ेंगे जब आप हमारे ऊपर किए गए अपने अत्याचारों के लिए माफी मांगेंगे। कभी मैक्सिको के लिए, कभी चिल्ली के लिए कभी अफ्रीकन देशों के लिए कई पोपो ने बहुत बार माफी मांगी है।

लेकिन भारत में जो अत्याचार किए उसके लिए माफी मांगने की बात छोड़ो उनको स्वीकार तक नहीं किया कारण भारत में जो ईसाई थे या है वह सभी राष्ट्रीय स्वाभिमान से ओतप्रोत नहीं है। ईसाइयों के अंदर ऐसे लोग भी हैं जिनके देश भक्ति पर कोई संदेह नहीं कर सकता। राष्ट्र के प्रति समर्पण उनके मन में अगर मेरे से कम होगा मैं यह सोचता हूं तो मेरे से बड़ा कोई बेवकूफ नहीं होगा। ऐसे लोगों की एक बहुत बड़ी संख्या है, लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर जो ईसाई है वह पहले खुद को ईसाई और बाद में भारतीय मानते हैं और इसीलिए वह पोप से क्षमा मांगने को नहीं कहते हैं।

1 Comment
  1. आलोक 2 वर्ष ago
    Reply

    लच्छेदार झूठ..

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