गुरूवार, अक्टूबर 1, 2020
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आज का वर्तमान ग्रीस अपनी पुरातन सभ्यता और संस्कृति को क्यों नहीं बचा सका?

ग्रीस जिसे हम यूनान के नाम से भी जानते हैं, 1900 ईसवी में अंततः ग्रीस का फिर से उदय हुआ। यदि हम पुरातन सभ्यताओं की याद करें तो ग्रीस और इजिप्ट का नाम भी याद आता है, परंतु ग्रीस के इतिहास पर नजर डालें तो सबसे पहले ग्रीस पर रोमन साम्राज्य का कब्जा हुआ था। परिणामस्वरूप ग्रीस ईसाई धर्म में परिवर्तित हुआ और अपनी सभ्यता संस्कृति खो बैठा।

रोमन राजा ने ग्रीस के धर्म के सभी ग्रीक देवताओं पर प्रतिबंध लगाया तथा ओलिंपिक खेलों को बंद करा दिया, क्योंकि ग्रीस ओलिंपिक पर बड़ा खर्च करता था। मंदिरों को तोड़ा गया, परम्परायें नष्ट होती चली गई और ग्रीस पूर्णतया ईसाई बन गया।

समय के साथ ग्रीस की पुरातन सभ्यता नष्ट होती चली गई। सवाल ये है कि ग्रीस पुनर्जीवित कैसे हुआ? 18वीं सदी में यूरोप ने ग्रीक ज्ञान का अवतरण किया ताकि अरब देशों के माध्यम से पुरातन यूनानी ज्ञान को प्राप्त किया जा सके। इस प्रकार उन्होंने ग्रीक संस्कृति के पुनर्निर्माण का निश्चय किया ताकि वो अपने ग्रीक मूल का दावा कर सकें, हालांकि उन्होने उस सभ्यता और संस्कृति को नष्ट कर दिया था। इस विषय में श्री सी.के. राजू का कार्य सराहनीय है। आपको श्री सी.के. राजू के काम को पढ़ना चाहिए जिसमें उन्होंने बताया है कि ग्रीस को बहुत जानकारी भारत तथा अरब से मिली और उन्होंने इसे सैद्धांतिक और नस्लीय रूप से सही करने के लिए ग्रीक को जिम्मेदार ठहराया जबकि इसका उद्गम ग्रीस से नहीं हुआ था। उदहारण स्वरूप गणितज्ञ यूक्लिड (उकलैदिस) का नाम, जिनको ज्यामिति का जनक कहा जाता है। इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि यूक्लिड नाम का कोई व्यक्ति कभी मौजूद था। फिर उन्होंने यूक्लिड नाम के व्यक्तित्व का निर्माण क्यों किया? वास्तिवकता में ये इजिप्ट का सिद्धांत था जिसे आडंबर का रूप दिया गया।

उन्होंने ग्रीक सभ्यता को पचा लिया था ताकि ग्रीक के ज्यान को अपना बताया जा सके। गणितज्ञ का बदलाव भी इसी कड़ी का हिस्सा था। श्री सी.के. राजू ने इस विषय में काफी काम किया है। श्री सी.के. राजू को अवश्य पढ़ना चाहिये जिसमें उन्होंने लिखा है कि गणित के शुद्ध होने के बाद अनुभव के आधार पर कुछ भी साबित नहीं किया जा सकता है। साहुल सूत्र का उपयोग करके यह नहीं कहा जा सकता है कि यह सही कोण है और यह सिद्धांत है। शुद्ध इसलिए कि यह पारलौकिक देवता से आ रहा है जो अतिरिक्त रूप से सांसारिक है इसलिए इसे शुद्ध करने की आवश्यकता है। इस पर बहुत बहस हुई और अंत में वो ये मानने के लिए बाध्य हुए। ग्रीस फिर से उभर कर आया क्योंकि यूरोप में ग्रीस के लिए ग्रीक राष्ट्रवादी आंदोलन शुरू हुआ। कुछ छात्र वहां गए और उनको ग्रीस के बारे में जानकारी हुई। उन्होंने उस ग्रीस को फिर से स्थापित करने का फैसला किया जिसकी पुरानी ग्रीस के साथ कोई निरंतरता नहीं है।

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