गुरूवार, सितम्बर 19, 2019
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लगभग सभी अफ्रीकी देशों की सीमाएं यूरोपीय लोगों द्वारा अफ्रीकी लोगों की सहमति या भागीदारी के बिना तय की गई थीं

हम अफ्रीका और मध्य पूर्व को थोड़ा देखें। यदि आप 1500 ईसवीं में अफ्रीका को देखते हैं, तो कुछ साम्राज्य थे, लेकिन वर्तमान सीमाओं के साथ अब केवल नगण्य राजनीतिक सीमा मिलती जुलती है। केवल थोड़ा घाना या एक या दो और देशों का मेल होता है। अफ्रीका का बाकी मानचित्र बदल गया। यह कैसे बदल गया? आप में से कितने लोगों ने 1885 के बर्लिन सम्मेलन के बारे में सुना है? एक, दो, ठीक है। तो, अफ्रीका के लिए छीना झपटी चल रही थी। अफ्रीका के लिए छीना झपटी का क्या अर्थ है? यूरोपीय देश उपनिवेश स्थापित करने में शामिल थे, इसलिए उन्होंने अफ्रीका को खंगालने शुरू किया। इथियोपिया और लाइबेरिया को छोड़कर और सभी अफ्रीकी देशों की सीमा का निर्णय 1885 से 1899 के मध्य तक यूरोप में एक सम्मेलन में किया गया था जहाँ कोई भी अफ्रीकी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। यूरोपीय शक्तियों के बीच संपूर्ण अफ्रीकी मानचित्र काट दिया गया था। 13 यूरोपीय देश; संयुक्त राज्य अमेरिका और ओटोमन साम्राज्य इकट्ठे हुए, दीवार पर अफ्रीका का नक्शा टांगा गया, और मानचित्र देखकर फैसला किया गया कि आप इसे ले लो, मैं इसे लेता हूं।
कई बार शासक ने मानचित्र पर सीधी रेखा खींची और इस पक्ष को तुम्हारे लिए, उस पक्ष को मेरे लिए विभाजित किया। कोई चिंता नहीं, स्थानीय परंपराओं के लिए कोई जागरूकता नहीं। स्थानीय आदिवासियों के लिए, उस सभी जातीय समूहों के लिए, कोई परवाह नहीं। इन्होंने तय किया कि अफ्रीका का आकार कैसा होगा। अफ्रीका में आज भी संघर्ष चल रहा है क्योंकि ये अतार्किक सीमाएँ हैं और इन्हें प्राकृतिक जड़ों से काट दिया है।
एक और बात जो देखने लायक है वह है रवांडा देश में। उन्होंने जो किया, सबसे पहले, उपनिवेशीकरण शारीरिक बल द्वारा होता था, दूसरा उपनिवेशवाद मन का था, दूसरे उपनिवेशण में आपको नई पहचान दी गई थी। आपका इतिहास लिखा जाता था। रवांडा की तरह, हुतु और टुट्सु की पहचान लिखी गई थी। उन्हें युद्धरत गुटों के रूप में बनाया गया था जबकि पुराने समय में उनकी सीमाएँ आपस में मिलती जुलती थीं। जबकि पहले ज्यादा तय शादियां नहीं, आदान-प्रदान उन दोनों के बीच था। लेकिन जैसा कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी इतिहास लिखा था, परिणामस्वरूप रवांडा में एक बड़ा नरसंहार हुआ था। इस नरसंहार में हुतु और टुटुस खून के लिए लड़े थे।

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