अखंड भारत काश्मीर भाषण के अंश

लद्दाख से बीजेपी सांसद जमयांग त्सेरिंग नामग्याल का धारा 370 को जम्मू-कश्मीर से हटाने को लेकर वक्तव्य

मैं डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे वीरों का, कुशोक बकुला रिंपोचे जैसे महान व्यक्तियों का, थुप्स्तान सेवांग जैसे लोग जिन्होंने लद्दाख को एक दिशा दिया कि हमें भारत के साथ रहना है, भारत का जयकार करना है, अपने देश के लिए मर मिटने को तैयार रहना है। यहां पर लोग हिस्ट्री का रेफरेंस दे रहे थे। मैं याद दिलाना चाहूंगा, चाहे 1965 हो या 1971 या 1999 का वार हो या 1948 का कबायली हमला हो, इतिहास खोल कर देखिए, लद्दाखी ने हमेशा बलिदान दिया है, हमेशा देश के लिए मर-मिटने को तैयार रहा है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज यहां पर मेरे साथी कश्मीर के ऑनरेबल मेंबर पूछ रहे थे की धारा 370 हटने से हम क्या-क्या खोएंगे? मैं बताना चाहूंगा। एक चीज जरूर खाएंगे- दो परिवारों का रोजी रोटी खोएंगे और कुछ नहीं। सिर्फ दो परिवार का रोजी रोटी खाएंगे। और कश्मीर का भविष्य उज्जवल होने वाला है। सभापति महोदय कारगिल का जिक्र किया जा रहा था यहां पर और सदन को मिस लीड करने का कोशिश किया जा रहा था। मैं करगिल से चुनकर आता हूं।

मैं गर्व से कहता हूं करगिल वालों ने यू॰टी॰ के लिए वोट किया है। मैं याद दिलाना चाहता हूं सदन को, 2014 के पार्लियामेंट्री इलेक्शन में यू॰टी॰ हमारे लद्दाख के इलेक्शन मेनिफेस्टो में था और मेजॉरिटी ने यू॰टी॰ के लिए वोट दिया। 2019 का इलेक्शन में फिर हमने यू॰टी॰ को इलेक्शन मेनिफेस्टो में लेकर आए और हमने दोनों डिस्ट्रिक्ट में, चाहे बुद्धिस्ट का हो चाहे मुस्लिम का हो, दोनों डिस्ट्रिक्ट में, लद्दाख हो, करगिल हो, हर क्षेत्र में हर लोगों के दरवाजे पर जाकर हमने लोगों को ‘यू॰टी॰ क्या है?’ यह समझाया। और लोगों ने बहुत बड़ी बहुमत के साथ, आज तक लद्दाख में जितना भी पार्लियामेंट्री इलेक्शन हुआ है, रिकॉर्ड मार्जिन के साथ यह सदन में आने का अवसर दिया। लोगों ने नरेंद्र मोदी जी के सरकार पर विश्वास किया। लोगों ने इस यूटी को स्वागत किया। आज करगिल की बात कर रहे हैं! क्या वह जानते हैं यह करगिल? मुझे सदन में यह कहने में कोई संकोच नहीं है।

तब के गृह मंत्री माननीय राजनाथ सिंह जी आप लेह पधारे थे। ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री डेलिगेशन जम्मू गए थे, कश्मीर गए थे, लद्दाख आए थे। तब के होम सेक्रेट्री के साथ पूरे लद्दाख के हर पॉलीटिकल पार्टी के- बीजेपी, कांग्रेस, पीडीपी, एनसी, लेह के। मैं कश्मीर की बात नहीं कर रहा हूं। वहां अलग वातावरण है। मैं लेह की बात कर रहा हूं। और साथ ही साथ हर रिलिजियस ऑर्गेनाइजेशन के चाहे ‘लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन’ हो, ‘अंजुमन इमामिया एसोसिएशन’ हो या ‘मोइन उल इस्लाम’ हो, ‘क्रिश्चियन एसोसिएशन’ हो, ‘हिंदू महासभा’ हो, सबने एक ही आवाज में कहा कि हमें यू॰टी॰ ही चाहिए। राजनाथ सिंह जी पूछ रहे थे ‘और क्या चाहिए?’ हमने कहा और कुछ नहीं चाहिए बस यू॰टी॰ चाहिए।

हमने यह कहा था। ….आज सुनने की क्षमता रखिए…. अभी तो ट्रेलर है…. अध्यक्ष जी, लेकिन उस वक्त एक दुर्घटना हमारे साथ घटी। आज मैं इस सदन को अवगत करना चाहूंगा। तब के लेह में एन॰सी॰ के ड्रीस्टिक प्रेसिडेंट, पीडीपी के डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट, जिन्होंने यू॰टी॰ के मेमोरेंडम को साइन किया, उन लोगों को आपके कश्मीर के एनसी और पीडीपी ने प्रेस रिलीज जारी करके अपने पार्टी से बाहर निकाल दिया! आज डेमोक्रेसी की बात करते हैं! लोकतंत्र की बात कर रहे हैं! क्या वह था आपका लोकतंत्र? लोगों का आवाज बंद करना? दबे कुचले रखना? अध्यक्ष जी, मैं कल 11 बजे राज्यसभा की चर्चा शुरू होने से अभी तक सुन रहा था। बहुत लोगों ने इक्वालिटी की बात की। धारा 370 जाएगा तो जम्मू कश्मीर में इक्वालिटी नहीं रहेगा, यह होगा, वह होगा। मैं सदन से पूछना चाहता हूं, आपके माध्यम से इस सदन में मैं उनको पूछना चाहता हूं, जो ऐसा वक्तव्य देते हैं- आप ने भारत सरकार से फंड लेते समय जम्मू, कश्मीर, लद्दाख तीनों क्षेत्रों के लिए फंड लेते जाते हो। जब लद्दाख में विकास के लिए आते हो तो पूरे लद्दाख का फंडा कश्मीर में खा जाते हो।

क्या यह आपका इक्वालिटी है? जम्मू कश्मीर में 2 कैपिटल है। एक समर कैपिटल और एक विंटर कैपिटल। मैं पार्टिकुलरली मेंशन करके आप को कह रहा हूं। दो सिविल सेक्रेटेरिएट है वहां पर। आप डाटा देखिए। सिविल सेक्रेटेरिएट में लद्दाख के कितना मुलाजिम हैं? क्या यह है आपका इक्वालिटी? अगर आपका 1000 एंप्लॉयमेंट क्रिएट करते हो, जॉब क्रिएट करते हो, जम्मू वाले तो खैर लड़ झगड़ कर कुछ ले लेते हैं, लेकिन लद्दाख वाले को 10 नौकरियां भी आप नहीं देते। क्या यह है आपका इक्वालिटी? हसनैन मसूदी जी यूनिवर्सिटीज की बात कर रहे थे। मैं उनके साथ कांग्रेस वालों को याद दिलाना चाहता हूं। आपने 2011 में कश्मीर में सेंट्रल यूनिवर्सिटी दिया। जम्मू में आपने सेंट्रल यूनिवर्सिटी दिया। जम्मू वालों ने लड़-झगड़ कर लिया, दिया नहीं, लड़ झगड़ कर लिया। लेकिन उस वक्त में स्टूडेंट यूनियन का लीडर था। हमने जम्मू में जितने पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट थे उनको इनके खिलाफ काली पट्टी बांधकर हमने सेंट्रल यूनिवर्सिटी का मांग किया।

लद्दाख में एक भी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट इन्होंने नहीं दिया। क्या यह है आपका इक्वलिटी? हाल ही में यूनिवर्सिटी दिया तो नरेंद्र मोदी जी ने दिया। मोदी है तो मुमकिन है। सही में…. कल राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गला फाड़-फाड़ कर कह रहे थे कि लद्दाख के साथ क्या होगा? लद्दाख के साथ क्या होगा? मैं जानना चाहता हूं, महोदय, आप के माध्यम से, जब आप 2008 में जम्मू कश्मीर के चीफ मिनिस्टर थे आपने वहां पर 8 नया डिस्ट्रिक्ट बनाया- ‘जिला’। चार आप ने कश्मीर को दिया तो जम्मू वालों ने लड़ाई किया। तो चार देना पड़ा। लद्दाख को आपने एक डिस्ट्रिक्ट भी नहीं दिया। क्या यह है आपका इक्वालिटी? आज आप कहते हैं इक्वालिटी! हमारे भाषा लद्दाखी भाषा जिससे भोटी कहते हैं। कश्मीरी अपने लिपि ना होने से भी आपने रिकॉग्नाइज किया, 8th शेडूल में डाल दिया। जम्मू की डोगरी, उन्होंने आंदोलन किया तो आपने उनको भी दे दिया।

लद्दाख की भाषा को आज तक आपने रिकॉग्नाइज नहीं किया। क्या यह है आपका इक्वालिटी? अध्यक्ष जी, सेकुलरिज्म और डेमोक्रेसी की बात किया जा रहा है। यहां पर मैं जानना चाहता हूं। कश्मीरी पंडितो को आपने इस धारा 370 का मिसयूज करते हुए लात मारकर रातों-रात निकाल दिया। क्या यह है आपका सेक्युलरिज्म? यह है आपका सेक्युलरिज्म? इसी धारा 370 को आप ने मिस यूज करते हुए कल वक्तव्य दे रहे हैं, गर्व से- “लद्दाख में पहले बौद्ध संख्या ज्यादा था आज मुस्लिम संख्या ज्यादा है”। मैं अफसोस के साथ कहना चाहता हूं यह आपने धारा 370 को मिस यूज करके जम्मू कश्मीर में आपने बुद्धिस्ट को खत्म करने का कोशिश किया। यह है आपका डेमोग्राफी मेंटेन? यह है आपका सेक्युलरिज्म? अध्यक्ष महोदय, यही इन परिवारों ने, मैं नहीं कहता हूं कि इन्होंने हम पर शासन किया, मैं कहता हूं ‘राज’ किया। यही परिवारों ने 1979 में लद्दाख को बंटवारा किया। बुद्धिस्ट मेजॉरिटी के साथ लेह डिस्ट्रिक्ट, मुस्लिम मेजॉरिटी के साथ करगिल डिस्ट्रिक्ट और हम दोनों भाइयों को लड़वाया। आज तक यह आपका सेक्युलरिज्म है – ‘फूट डालो राज करो’।

क्या यह आपका सेक्युलरिज्म है? आज करगिल का जिक्र कर रहे थे। जिक्र कर रहे थे कि करगिल बंद है। किसने कहा आपको करगिल बंद है? जानने की कोशिश कीजिए। लद्दाख से मैं चुनकर आ रहा हूं आप नहीं। आप बैठिए। आप आराम से बैठिए भाई साहब। आज तक आप लोगों ने बोला आज हमारा बोलने का मौका है। आप मोदी जैसा नहीं है। बैठिए। यह सिर्फ एक रोड और छोटा सा मार्केट को कारगिल समझ बैठे हैं। भाई साहब अगर आपको कारगिल देखना है तो जांस्कर जाइए, वाखा-मूलबेख-शरगोल जाइए, आर्यन वैली जाइए। दह- गरकोन देखिए। 70% कारगिल के एरिया जो हैं, वहां के लोग जो हैं, आज इस डिसीजन को वेलकम करते हैं। इस बिल का समर्थन करते हैं। अध्यक्ष जी आज यह वही वक्तव्य दे रहा है। मैं आपकी तरह किताबें पढ़कर नहीं आता हूं लेकिन ग्राउंड की रियलिटी महसूस करके आता हूं। अध्यक्ष जी, कारगिल में जो भी कह रहा है यही इन्होंने फोन करके करवा रहा है। उनको भी नहीं पता है वह लोग क्या कर रहे हैं।

उनको अपने भविष्य के लिए सोचना चाहिए। इनके जवान पर नहीं जाना चाहिए। यह अपने मुफ्त के लिए, अपने हित के लिए किसी को भी नचाएंगे। अध्यक्ष जी। बैठिए…. सुनने की क्षमता रखिए…. अध्यक्ष जी, आज से 66 वर्ष पहले, जनसंघ के संस्थापक, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1953 में जो उन्होंने संघर्ष किया- “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान” नहीं चलेगा, नहीं चलेगा। और इसी के संकल्प में, मैं गर्व के साथ कहता हूं, इनको नहीं पता लद्दाख वालों ने क्या किया आज तक। 2011 में…. आज यह कह रहे हैं कि हमारा झंडा जा रहा है…. झंडा जा रहा है। भाई साहब, आप का झंडा तो लद्दाख वालों ने 2011 में ही नाकारा है। लद्दाख हिल डेवलपमेंट काउंसिल ने रेजोल्यूशन पास किया 2011 में। कश्मीर का जो झंडा लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरमैन एग्जीक्यूटिव काउंसलर जो चेयरमैन और डिप्टी मिनिस्टर के रैंक के होते हैं, उनके घर पर लगता था। हमने उस झंडा को नकारा। हमने नेशनल एंब्लेम वाला वहां पर लगाया। क्योंकि हम भारत देश का अटूट अंग बनना चाहते हैं। यह है लद्दाख। क्योंकि हम मानते हैं:
“आन देश की, शान देश की, देश की हम संतान हैं
तीन रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी यह पहचान है।“

अध्यक्ष जी, बड़ी आयरनिकल बात है! पंचायत इलेक्शन में पार्टिसिपेट नहीं करेंगे, पर जब अपनी कुर्सी की बारी आएगी तो पार्टिसिपेट करेंगे। ग्रास रूट डेमोक्रेसी नहीं आने देंगे पर अपने घर की रोटी चलना चाहिए। ऐसी विचारधारा हम स्वीकार नहीं करेंगे। अध्यक्ष जी, जो बार-बार दो परिवार का जिक्र कर रहा हूं, यह परिवार जो हैं, “कश्मीर का मुद्दा, कश्मीर का मुद्दा” जो ढिंढोरा पीट रहा है वह समाधान चाहने वालों में से नहीं है। दे आर द पार्ट्स ऑफ प्रॉब्लम। वह इस प्रॉब्लम का, इस समस्या का पार्ट बन चुके हैं, अंग बन चुके हैं। नशे में हैं वह। वह आज भी समझ रहे हैं कि कश्मीर तो मेरा बाप का जागीर है।

नहीं रहा…. अध्यक्ष जी, मैं अंत में इसको कनक्लूड करने से पहले मैं भारत सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं, श्री नरेंद्र मोदी को जी धन्यवाद देना चाहता हूं, गृह मंत्री माननीय अमित शाह जी को और पूरे सहयोगी दल को और जिनका दल नहीं है पर इस बिल के फेवर में आने वाले हैं। उन लोगों को भी पूरे लद्दाख के निवासियों की ओर से धन्यवाद देना चाहता हूं। क्योंकि आज पहली बार इस भारत के इतिहास में लद्दाख के सेंटीमेंट्स को, एस्पिरेशंस को सुना जा रहा है। उस लद्दाख की जिसकी चीन के साथ, पाकिस्तान के साथ सीमाएं लगती हैं। उस लद्दाख के महत्व को समझ रहे हैं। इस सरकार में हम इस बिल को वेलकम करते हैं। और हम अंत में, जो अभी तक कंफ्यूज हैं उनको एक रिक्वेस्ट करना चाहते हैं:

“देश के लिए प्यार है तो जताया करो
देश के लिए प्यार है तो जताया करो
किसी का इंतजार मत करो
गर्व से बोलो जय हिंद
अभिमान से कहो भारतीय हैं हम
स्वाभिमान से कहो भारत माता की जय
और वर्तमान में करो इस बिल का समर्थन”
बहुत-बहुत धन्यवाद अध्यक्ष जी।

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