भारतीय इतिहास का पुनर्लेखन

भारतीय इतिहास का भारत के दृष्टिकोण से पुनर्लेखन होना चाहिए — अमित शाह

Source: – @AmitShah / Twitter.

इस सभागार में इतिहास के कई विद्वान् बैठे हैं| बालमुकुन्द जी भी यहाँ बैठे हैं जो इतिहास संकलन के लिए प्रयास कर रहे हैं| मेरा सब से आग्रह है की भारतीय इतिहास का भारतीय दृष्टि से पुनर्लेखन बहुत जरूरी है| मगर इसमें हमें किसी को दोष देने की जरुरत नहीं है| किसी का दोष है तो हमारा खुद का दोष है कि हमने इस दृष्टिकोण से नहीं लिखा| इतने सारे बड़े-बड़े साम्राज्य हुए हैं – विजयनगर साम्राज्य (जिसका) सन्दर्भ ग्रन्थ हम आजतक नहीं बना पाए| मौर्य साम्राज्य (का) सन्दर्भ हम ग्रन्थ नहीं बना पाए| गुप्त साम्राज्य – आठों सम्राटों का इतना बड़ा कालखंड! हम सन्दर्भ ग्रन्थ नहीं बना पाए| मगध का इतना बड़ा 800 साल का इतिहास! हम सन्दर्भ ग्रन्थ नहीं बना पाए| विजयनगर का साम्राज्य, शिवाजी का संघर्ष और उनके स्वदेश के विचार को (भी)| एक छोटे से बच्चे के विचार के कारण पूरा देश आजाद हुआ| पुणे से लेकर अफगानिस्तान तक, ओडिशा तक, और पीछे कर्णाटक तक एक बहुत बड़ा साम्राज्य बना| (इस पर लिखने के बारे में) हम कुछ नहीं कर पाए|

सिख गुरुओं के बलिदान को भी हमने इतिहास में संजोने की हमने तस्तीव?? (सुध) नहीं ली| महाराणा प्रताप के संघर्ष और मुगलों के सामने हुआ संघर्ष की एक बड़ी लम्बी गाथा को हमने सन्दर्भ ग्रन्थ में परिवर्तित नहीं किया| और शायद वीर सावरकर ना होते तो सं 1857 की क्रांति भी इतिहास ना बनती| उसको भी हम अंग्रेजों की दृष्टि से ही देखते| वीर सावरकर ने ही सं 1857 की क्रांति को पहला स्वातंत्र्य संग्राम का नाम देने का काम किया| वरना आज भी हमारे बच्चे इसको विप्लव के नाम से ही जानते होते| ये परिवर्तन जो करना है, मैं मानता हूँ वामपंथियों को, अंग्रेज इतिहासकारों को या मुग़लकालीन इतिहासकारों को दोष देने से कुछ नहीं होगा| हमें हमारे दृष्टिकोण को बदलना पड़ेगा| हमें हमारी मेहनत करने की दिशा को केन्द्रित करना पड़ेगा|

1 Comment
  1. naveen1941 3 वर्ष ago
    Reply

    I am not fluent in Hindi. I read the heading and the person who said it. We have been saying this since 1947. Poor Infinity Foundation conducted many conferences with the theme of Swadeshi Indology. Where is BJP on this issue? Are they going to tell the people just be satisfied with slogans and we will do something about it? Six years passed, in classrooms students are still reading theMarxist/Communist narrative of our history. Our books are falsely represented. Ramayanam, Mahabharatam, Puranas are banned from school curricula. When o when are you going to formulate and implement Sawdeshi Indology?

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