गुरूवार, नवम्बर 14, 2019
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भारतीय इतिहास का भारत के दृष्टिकोण से पुनर्लेखन होना चाहिए — अमित शाह

Source: – @AmitShah / Twitter.

इस सभागार में इतिहास के कई विद्वान् बैठे हैं| बालमुकुन्द जी भी यहाँ बैठे हैं जो इतिहास संकलन के लिए प्रयास कर रहे हैं| मेरा सब से आग्रह है की भारतीय इतिहास का भारतीय दृष्टि से पुनर्लेखन बहुत जरूरी है| मगर इसमें हमें किसी को दोष देने की जरुरत नहीं है| किसी का दोष है तो हमारा खुद का दोष है कि हमने इस दृष्टिकोण से नहीं लिखा| इतने सारे बड़े-बड़े साम्राज्य हुए हैं – विजयनगर साम्राज्य (जिसका) सन्दर्भ ग्रन्थ हम आजतक नहीं बना पाए| मौर्य साम्राज्य (का) सन्दर्भ हम ग्रन्थ नहीं बना पाए| गुप्त साम्राज्य – आठों सम्राटों का इतना बड़ा कालखंड! हम सन्दर्भ ग्रन्थ नहीं बना पाए| मगध का इतना बड़ा 800 साल का इतिहास! हम सन्दर्भ ग्रन्थ नहीं बना पाए| विजयनगर का साम्राज्य, शिवाजी का संघर्ष और उनके स्वदेश के विचार को (भी)| एक छोटे से बच्चे के विचार के कारण पूरा देश आजाद हुआ| पुणे से लेकर अफगानिस्तान तक, ओडिशा तक, और पीछे कर्णाटक तक एक बहुत बड़ा साम्राज्य बना| (इस पर लिखने के बारे में) हम कुछ नहीं कर पाए|

सिख गुरुओं के बलिदान को भी हमने इतिहास में संजोने की हमने तस्तीव?? (सुध) नहीं ली| महाराणा प्रताप के संघर्ष और मुगलों के सामने हुआ संघर्ष की एक बड़ी लम्बी गाथा को हमने सन्दर्भ ग्रन्थ में परिवर्तित नहीं किया| और शायद वीर सावरकर ना होते तो सं 1857 की क्रांति भी इतिहास ना बनती| उसको भी हम अंग्रेजों की दृष्टि से ही देखते| वीर सावरकर ने ही सं 1857 की क्रांति को पहला स्वातंत्र्य संग्राम का नाम देने का काम किया| वरना आज भी हमारे बच्चे इसको विप्लव के नाम से ही जानते होते| ये परिवर्तन जो करना है, मैं मानता हूँ वामपंथियों को, अंग्रेज इतिहासकारों को या मुग़लकालीन इतिहासकारों को दोष देने से कुछ नहीं होगा| हमें हमारे दृष्टिकोण को बदलना पड़ेगा| हमें हमारी मेहनत करने की दिशा को केन्द्रित करना पड़ेगा|

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