शनिवार, जुलाई 4, 2020
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अरबी-फ़ारसी मुक्त हिन्दी: बाज़ारू खिचड़ी से आर्यभाषा तक — नित्यानन्द मिश्र का व्याख्यान

यद्यपि संस्कृतनिष्ठ और प्राकृतनिष्ठ हिन्दी बोलने और लिखने वाले अनेक लोग हैं, तथापि आजकल की लोकप्रिय हिन्दी उर्दू-हिन्दी की खिचड़ी है। नव-स्वतन्त्र भारत में “बाज़ार की भाषा” के नाम पर मिश्रित उर्दू-हिन्दी का समर्थन हुआ, और बॉलीवुड द्वारा अरबी-फ़ारसी शब्दों के प्राचुर्य वाली उर्दू का ही प्रचार-प्रसार होता आया है। क्या आज भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुकूल एक सभ्य आर्य भाषा के रूप में संस्कृतनिष्ठ और प्राकृतनिष्ठ हिन्दी में बोलचाल और लेखन संभव है?


वक्ता-परिचय: –

नित्यानन्द मिश्र आई.आई.एम. बेंगलूरु से शिक्षित एक वित्तीय विश्लेषक हैं। वे संस्कृत और हिन्दी के विद्वान् और एक लोकप्रिय लेखक हैं। उन्होंने ‘ॐ माला’ और ‘कुम्भ: पुरातन और नूतन का मेला’ सहित ग्यारह पुस्तकों का सम्पादन/लेखन किया है। वे हिन्दू धर्म, दर्शन, और संस्कृति पर लेखन करते हैं। आगे…


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