शनिवार, दिसम्बर 5, 2020
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हिन्दू मंदिरों को हिंदुओं के हवाले के लिए अनुच्छेद २६ में संशोधन

Translation Credits: Satyabrata Sharma.

और ऐसे ही अनेक तथ्यों के कारणों से फलीभूत प्रश्न हम यह पुछते हें अथवा मांग करते हें जो की प्राधिकार के उप अभियाचिका बिन्दु १ के अनुसार है जैसे की हम अनुच्छेद २६ का संशोधन करते हैं हिंदुओं के मंदिरों को हिंदुओं को प्रत्यावर्तन के लिए । आप स्मरण करें इस अनुच्छेद में एक उक्ति है जो कहती है किसि भी अन्य गैर मजहबी कार्यक्रम में राज्य सरकार हस्तक्षेप कर सकती है । हम यह मांग करते हें की इस अनुच्छेद के किसी भी निहीत भाग के प्रतिरोध में, कोई भी संस्थान जो की धार्मिक व मजहबी कारण हेतु स्थापित हुआ हो , राज्य सरकार उसका नियंत्रण तथा प्रबंधन और सम्पादन नहीं करेगा ।

      स्पष्टतया यह अधिकार राज्य सरकार का वापस लेना होगा ।  ऐसे अनेकों विधान, कर विधान, आपराधिक विधान हें जो की पर्याप्त हैं ऐसे किसी भी समस्याओं का संशुद्धि व कुप्रबंध से निदान देगा, हमारे पास ऐसा कोई भी सदृश्य अनुच्छेद नहीं है जो की व्यावसायिक हस्ती व संस्थान के लिये हो । इस प्रकार से पूर्वकथित और कुछ एक उप बिन्दु के साथ प्रयोग होना चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो  की राज्य सरकार के सारे अधिकारों का प्रत्याहार हो गया है । सारे प्रचलित विधान व कानून इस बिन्दु पे व्यापक हो जाते हैं । उदाहरण स्वरूप ऐसे अनेकों राज्यों में राज्य सरकार एचआरसी अधिनियम; हिन्दू धर्मार्थ धर्मोपदेश अधिनियम, जिसके तहत वो मंदिरों का आधिकारिक अधिग्रहण करते हैं । अतएव ऐसे दूसरे छोटे विधिसम्मत छिद्र कहते हें की, क्या विद्यमान अधिनियम ही कायम रहेंगे ? और ऐसे ही अनेक बिषय । इसीलिए हम इसे सुष्पष्ट कर देना चाहते हें की, ऐसा कोई भी अधिनियम मान्य नहीं होगा और साथ ही राज्य सरकार ऐसे अधिग्रहण के लिए कोई भी नियम व अधिनियम नहीं बनाएगी । यही तत्त्व है इस अभियाचना का । अन्ततः भबीष्य में, राज्य सरकार अपने ऐसे सारे अधिकारों का प्रत्याहार एवं  ऐसे सारे नियम व अधिनियम से रिक्त हो, और ऐसे किसी भी प्रकार के नियम व अधिनियम बनाने का क्ष्यमता से बंचीत रहे ।

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