रविवार, अगस्त 9, 2020
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रक्षा, सांप्रदायिक सद्भाव और शासन के लिए कौटिल्य की रूपरेखा

यदि आप रक्षा क्ष्यमता देखेंगे, उदाहरणतः, कौटिल्य ने बंदरगाहों का निर्माण का सुझाव दिया, उनके पास एक बड़ी सेना भी थी, उंहोने कूटनीतिक पहल की और खुफ़िया जानकारी जुटाने और विश्लेषण इकाइयों की स्थापना की।  उदाहरण के लिए यहाँ चार प्रकार की लड़ाकू इकाइयों के अतिरिक्त एक बलशाली सेना तैयार किया।  इस में एक पैदल सेना, एक घुड़सवार सेना, रथसेना और हाथी सेना शामिल थी और  छह भिन्न श्रेणियों की सेना थी, जिन्हें मौलबाल, भर्तबल, श्रेणीबल, मित्रबल, अमित्रबल और अतीवबाल के नाम से जाना जाता है।  और यह ज़मीन और पानी के लड़ाकू में अर्थ शास्त्र में पृत्थक किया। यहाँ एक विवेचन यह भी है की उन दिनों समुद्र में भी रक्षा उपकरण थे।  यही विदेश नीति छह स्टार द्वार नीतियों को सशक्त बनाता है, जो की मेरे विचार से पहले भी लोगों ने अर्थशास्त्रा की प्राक व्याख्या में बताया है की और शासन विजिगीषु के सिद्धान्त पे किया गया जो की एक राज्य के विस्तार का क्रमाचार है ।

यदि आप दूसरे देशों पर विजय प्राप्त करते समय ऐसी कौन सी गतिशील वस्तुएँ हैं जिनका पालन आपको करना चाहिए। तभी यह सब  कौटिल्य द्वारा प्रसारित प्राथमिक विचारों में से एक था । इसमें सांप्रदायिक सद्भावना एक प्रमुख बिन्दु था।  उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि चाहे राजा या प्रजा किसी भी धर्म या भगवान की पूजा करे, वहाँ इसका आधार सांप्रदायिक सद्भाव था।  इस विचार का प्रचार उनके द्वारा पूरे देश में किया गया था और ऐसे कई दृष्टांत हैं, जैसे की कई बार वो अंधविश्वासी होते थे, अर्थशास्त्र में ऐसे बहुत से सूक्त हैं जो  जहां वे विशेष रूप से कहते हैं की “तारों को देखने से कोई लआभ नहीं, आपको धरातल की और देखना चिहिए की वहाँ क्या हो रहा है, और आप, ऐसे बहू से दृष्टांत है जह्न वो धर्म को राज्य से अलग करते हैं ।  जबकि वह धर्म पर एक सिद्धांत के रूप में ध्यान केंद्रित करते हैं परंतु वह यह भी सुनिश्चित करने का भी प्रयास करते हैं कि सभी को समान अधिकार और समान उपचार दिया जाए।  और यह सांप्रदायिक सद्भावना है जो की सामाजिक व्यवस्था का एक प्राथमिक आधार है जिस पर कौटिल्य ने ध्यान केंद्रित किया।  मजबूत तथा पुष्ट साधारण शासन ।  तो इसमें तीन मूलबूत विशेषताएँ थी, जिसमे से एक तो प्रबंध और मूलभूत सुविधाएं थी । उनका मानना था की  राज्य को किलों, सिंचाई कार्यों, व्यापार मार्गों, नए उपनिवेश व नई बस्तियों और नई खानों के निर्माण में निवेश करना चाहिए ।तो उनका यह विश्वास था की राज्य का दायित्व है की वह लोगों के लिए नए बुनियादी ढांचे का निर्माण करे । यही वह ठाट जिसपे वो निर्भरशील थे ।


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