बुधवार, सितम्बर 30, 2020
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हिंदू देवी देवता जापानी संस्कृति का अभिन्न अंग है | बिनॉय बहल

अनुवादिका – आशा लता चौधरी

जापान में हमने दो सुंदर वेणुगोपाल देखे । इस पर मैंने सोचा कि आप यह जानने के उत्सुक होंगे कि हिंदू देवी देवता जिस प्रकार भारत में पूजे जाते हैं, क्या उसी प्रकार आज जापान में भी पूजे जाते हैं। वस्तुतः आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जापान में केवल सरस्वती के सैकड़ों मंदिर हैं, उनमें सरस्वती का ढाई सौ फुट ऊंचा एक मंदिर भी है।  भारत में आपको सरस्वती के ऐसे मंदिर देखने को नहीं मिलेंगे । वहां लक्ष्मी की पूजा होती है । आप पाएंगे कि वहां इतने अधिक देवी देवता हैं, इतने अधिक शिव हैं, ब्रह्मा है।

आप देखेंगे कि वहां यम तक के इतने अधिक मंदिर हैं । वास्तव में आप यह जानकर विस्मित होंगे कि जापान के 12 सौ से अधिक मंदिरों में प्रतिदिन एक बार … अधिकांश में तो एक से अधिक बार संस्कृत मंत्रोच्चारण के साथ हवन या होम किया जाता है, जिसे जापान में गोम कहा जात है। सारे जापानी पुजारी संस्कृत में मंत्र उच्चारण कैसे कर लेते हैं ? जबकि उनमें से कई संस्कृत पढ़ नहीं सकते । यह हमें इस सर्वाधिक सुंदर बिंदु या तथ्य से परिचित कराता है कि जापानी वर्णमाला काना की रचना वस्तुतः संस्कृत ध्वनियों के आधार पर की गई थी। अतः यदि आप जापान के प्रारंभिक विद्यालय में जाएं तो आप बच्चों को अ आ इ  ई  उ  ऊ करते सुनेंगे जैसे कि भारत में आप देखते हैं।

जापान के पुजारी अपने सामने संस्कृत पुस्तकें रखते हैं, जिनमें संस्कृत मंत्र होते हैं और उसके साथ ही उच्चारण पर आधारित मंत्र काना में होते हैं। अतः यदि वे संस्कृत नहीं पढ़ सकते तो वे उन्हें काना में पढ़ते हैं और संस्कृत में उच्चारण करते हैं। अब यह संस्कृत कौन सी है। यह पांचवी छठी शताब्दी की संस्कृत लिपि सिद्धम है ।  तो यह वह  सिद्धम है जो भारत में विस्मृत हो चुकी है भारत में जिस सिद्धम  को किसी स्थान पर नहीं पढ़ाया जाता उसे जापान में संरक्षित किया गया है। यदि आप यू ट्यूब पर जाएं और उसमें जापान में पूजे जाने वाले भारतीय देवी-देवताओं को देखें तो इस विषय की मेरी फिल्म आपको संभवतः अच्छी लगे।भारत का प्रभाव संपूर्ण एशिया पर बहुत अधिक है ।


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