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हिन्दू देवी-देवता और संस्कृत जापानी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं – बिनोय के बहल – भारत का भित्तिचित्रण

https://www.youtube.com/watch?v=Gt8HoqkFNp0?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 हमने जापान में संयोग से इन दोनों वेणुगोपाल को देखा। वहाँ मुझे लगा कि आप यह जानने के लिए उत्सुक हो सकते हैं कि हिन्दू देवी-देवताओं की जापान में उतनी ही पूजा होती है जितनी कि भारत में। आपको वास्तव में यह जानकर आश्चर्य होगा कि यहां जापान में एकमात्र

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आज का वर्तमान ग्रीस अपनी पुरातन सभ्यता और संस्कृति को क्यों नहीं बचा सका?

https://www.youtube.com/watch?v=0dTYG5UFW0Q&t=11s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 ग्रीस जिसे हम यूनान के नाम से भी जानते हैं, 1900 ईसवी में अंततः ग्रीस का फिर से उदय हुआ। यदि हम पुरातन सभ्यताओं की याद करें तो ग्रीस और इजिप्ट का नाम भी याद आता है, परंतु ग्रीस के इतिहास पर नजर डालें तो सबसे पहले ग्रीस पर रोमन

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भारत का नाम इंडिया कैसे पड़ा?

https://youtu.be/XYaiydUErHw?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 'इंडिया' शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई? शायद यह आपको ज्ञात हो| सबसे पहले 'सिंधु' शब्द से ‘हिंदू’ बना। फिर जैसे स्पेनिश में ‘ह’ अक्षर उच्चारण में गौण हो जाता है उसी प्रकार ‘ह' का उच्चारण लुप्त होकर ‘इंदु’ बना। जब मैं बार्सिलोना में था, मैंने एक रेस्तरां का नाम 'लो

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भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली — मेहुलभाई आचार्य का व्याख्यान

भारतीय परंपरा में मनुष्य जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मूल्यों में से शिक्षा को सबसे उच्च का स्थान दिया गया है| पुरातन काल से भारतवर्ष समस्त विश्व के लिए ज्ञान का स्रोत रहा है और भारत के ज्ञान का सर्वप्रथम स्रोत हैं हमारे वेद| एक सुसंस्कृत व्यष्टि को समष्टि की नींव

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वैदिक काल में जनपदों का भूगोल

https://youtu.be/X84seX-D-CE?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 भारतीयों में एक सामान्य भ्रांति है कि जनपद (प्राचीन भारत में राज्य या प्रशासनिक इकाई) केवल बुद्ध काल में हुआ करते थे वैदिक काल में नहीं। इसका तर्क यह दिया जाता है कि वेदों में जनपदों  का कोई वर्णन नहीं मिलता है। श्री मृगेंद्र विनोद इस भ्रांति का सिरे से

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भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

https://www.youtube.com/watch?v=x2ko_RDhLFc?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   भगवान् शंकराचार्य जानते थे, कि उनके जाने के बाद भी, भारत के ऊपर शस्त्र युद्द, वैचारिक युद्द और सांस्कृतिक युद्द थोपे जायेंगे I जानते थे वोह इस बात को, इसीलिए, भगवान शंकराचार्य ने चार वेदों की रक्षा के लिए, भारत की चार दिशाओं में, चार आम्नाय मठो की स्थापना करी,

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भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

https://www.youtube.com/watch?v=T-pBRf9GU1g?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 छोटी सी आयु थी उनकी, जब घर छोड़ा था आठ वर्ष के थे वो I संन्यास के लिए निकले जब I नौ वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास लिया और उसके बाद में, भगवान् शंकराचार्य ने, वोह काम करके दिखाया, जो आज सोचा भी नहीं जा सकता हैं I भगवान्

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प्राचीन भारत में तर्क की कला

https://www.youtube.com/watch?v=tHu6EM_fu98?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   अब हम बात करतें हैं तर्क कि, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग हुआ करता था I आप इस चित्र को देख सकतें हैं आदि शंकराचार्य की जो तर्क कर रहें हैं मंदाना मिश्र के साथ, और इस तर्क का पंच कौन हैं ? उभय भारती जो एक जानी-मानी

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आदि शंकराचार्य – जीवन चरित्र एवं समयकाल समीक्षा (श्री अमित शर्मा का व्याख्यान)

The Srijan Foundation organized a talk of Sri. Amit Sharma at New Delhi. The topic of the talk was ‘Life Journey of Adi Shankaracharya and the Time of His Incarnation”. https://www.youtube.com/watch?v=udYJTmScgCQ&t=359s

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प्राचीन अतीत में यूनानियों ने भारतीय गणित के ज्ञान को उधार लिया था

https://www.youtube.com/watch?v=es5mva8sfnI?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   मैं हिप्पर्खस और त्रिकोणमिति के बारे में बात करना चाहूंगा इससे पहले कि सूर्य सिद्धांत में तार सारणियां हैं आर्यभट्ट बना है, यहां पर केवल एक 'टी' होना चाहिए, मैं माफ़ी माँगता हूँ, यह एक गलती है, 3.5 डिग्री सेगमेंट में साइन टेबल बनाये गये हैं जिनकी साइन और कोसाइन।

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