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भगवान् शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ

https://www.youtube.com/watch?v=x2ko_RDhLFc?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   भगवान् शंकराचार्य जानते थे, कि उनके जाने के बाद भी, भारत के ऊपर शस्त्र युद्द, वैचारिक युद्द और सांस्कृतिक युद्द थोपे जायेंगे I जानते थे वोह इस बात को, इसीलिए, भगवान शंकराचार्य ने चार वेदों की रक्षा के लिए, भारत की चार दिशाओं में, चार आम्नाय मठो की स्थापना करी,

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भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

https://www.youtube.com/watch?v=T-pBRf9GU1g?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 छोटी सी आयु थी उनकी, जब घर छोड़ा था आठ वर्ष के थे वो I संन्यास के लिए निकले जब I नौ वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास लिया और उसके बाद में, भगवान् शंकराचार्य ने, वोह काम करके दिखाया, जो आज सोचा भी नहीं जा सकता हैं I भगवान्

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प्राचीन भारत में तर्क की कला

https://www.youtube.com/watch?v=tHu6EM_fu98?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   अब हम बात करतें हैं तर्क कि, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग हुआ करता था I आप इस चित्र को देख सकतें हैं आदि शंकराचार्य की जो तर्क कर रहें हैं मंदाना मिश्र के साथ, और इस तर्क का पंच कौन हैं ? उभय भारती जो एक जानी-मानी

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आदि शंकराचार्य – जीवन चरित्र एवं समयकाल समीक्षा (श्री अमित शर्मा का व्याख्यान)

The Srijan Foundation organized a talk of Sri. Amit Sharma at New Delhi. The topic of the talk was ‘Life Journey of Adi Shankaracharya and the Time of His Incarnation”. https://www.youtube.com/watch?v=udYJTmScgCQ&t=359s

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प्राचीन अतीत में यूनानियों ने भारतीय गणित के ज्ञान को उधार लिया था

https://www.youtube.com/watch?v=es5mva8sfnI?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   मैं हिप्पर्खस और त्रिकोणमिति के बारे में बात करना चाहूंगा इससे पहले कि सूर्य सिद्धांत में तार सारणियां हैं आर्यभट्ट बना है, यहां पर केवल एक 'टी' होना चाहिए, मैं माफ़ी माँगता हूँ, यह एक गलती है, 3.5 डिग्री सेगमेंट में साइन टेबल बनाये गये हैं जिनकी साइन और कोसाइन।

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पाइथागोरस और भारतीय ज्ञान के साथ उनका संबंध

https://www.youtube.com/watch?v=OfsYksCadmY?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   पाइथागोरस जो इस समय के फ्रेम में रहते थे, ये सज्जन, जो सभी पश्चिमी, अल्बर्ट बुर्की और ए एन। मार्लो और जी आर एस मीड हैं, उनमें से प्रत्येक का कहना है कि पायथागोरस भारत गए जहां उन्होंने अपने दर्शन, ज्ञान और अन्य चीजें सीखा। ये इंडिक लोगों को यह

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कीलडी और अरिकमेडू खुदाई से संकेत मिलता है कि दक्षिण भारतीय सभ्यता ५०० ईसा पूर्व से भी पुराना है

https://www.youtube.com/watch?v=I9B7Vfq16W4?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   हाल ही में हमें कीलडीकी कहानी के बारे में बताया गया है। कीलडीके पीछे एक रोमांचक कहानी मिली है। पुरातत्वविदों को मदुरै में खुदाई करना था हालांकि, मदुरै अन्य भारतीय शहरों की तरह ही है; बसे हुए, बहुत महंगा जमीन, पुरातत्व और इन जैसे चीज़ोंके लिए भूमि प्राप्त करने के

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भारत की तरफ का प्राचीन व्यापार मार्ग, भारत को व्यापार अधिशेष का लाभ और इसका असर रोमानी अर्थनीति पर

https://www.youtube.com/watch?v=RJtIDrHTYHU?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 अब ऐसा ही हाल पश्चिम हिंदमहासागर में भी हो रहा था जब भारतीय रोमानी साम्राज्य के साथ व्यापारी सम्बन्ध बढ़ाते हैं और इस रोमन साम्राज्य की जड़ें और उस समय के बारें में हमें पता चलता हैं एक नियमावली से जिसका नाम हैं “डी पेरिप्लुस ऑफ़ डी एर्य्थ्रेअन सी” और

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कंबोडिया और वियतनाम के खमेर और चरमे संस्कृतियों का भारत से सम्बन्ध

https://www.youtube.com/watch?v=Wx_i-4xI-UY?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 तो एक कहानी हैं जो सामूहिक रूप से काम्बोसिया और वियतनाम आदि देशों के अभिलेखों में देखि जाती हैं, और इसके बहुत समय बाद अंकोर और चरमे साम्राज्य उभरे, मगर वोह कहानी कुछ इस प्रकार हैं – एक भारतीय ब्राह्मण था जिसका नाम कौडिन्य था जो समुद्री यात्रा कर रहा

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हरप्पा का विनाश और दक्षिण भारत का विकास

https://www.youtube.com/watch?v=0dcrsU5v_Kk?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 २००० बी सी के करीब विश्व में एक बहुत बड़ा मौसमी परिवर्तन हुआ जिसके सबूत न सिर्फ पराग के सैंपल या अन्य वैज्ञानिक प्रमाणों में पाए गएँ हैं बल्की मेसोपोटामिया के अभिलेख में भी एक भयंकर अकाल का उल्लेख होता हैं I इसी समय सरस्वती नदी जो लगभग अब तक

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‘संस्कृतम् : आत्मा की भाषा’ — सम्पदानंदा मिश्रा द्वारा एक भाषण

https://www.youtube.com/watch?v=40uaJAGj3bc&t=1049s ओ३म् जीवने यावदा दानम् , स्यात् प्रदानं ततोधिकम् इत्येषा प्रार्थनास्माकं भगवन् परिपूर्यताम् , भगवन् परिपूर्यताम् त्वमेव माता च पिता त्वमेव , त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव , त्वमेव सर्वं मम देव देव सर्वे भवन्तु सुखिनः , सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ओं शान्तिश्शान्तिश्शान्तिः सर्वेभ्यो नमो नमः   आप सबको नमस्कार मुझे ये बोला

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सिन्धुघाटी सभ्यता और विष्णु भगवान्

Source: - Subhash Kak / Twitter. महाभारत में विष्णु के वराह अवतार को एकशृङ्ग कहा गया है। क्या इसीका चित्रण सिन्धु-सरस्वती काल के एकशृङ्गीय कृत्रिम पशु से किया गया है? pic.twitter.com/GJzRFOtTus — Subhash Kak (@subhashkak1) November 7, 2017  

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परिदृश्य का बदलना और बाढ़ मिथक

https://www.youtube.com/watch?v=hNkoOx2upGU&t=28s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 अभी हिंद महासागर का लैड्सस्पेक्स को हम निपटने के लिए जा रहे हैं,  एक चीज़ जो इसके बारे में याद रखती है,  कि यह  एक जीवित लैड्सस्पेक्स है,  यह मृत लैड्सस्पेक्स नहीं है, तटरेखाएं लगातार बदल रही हैं टेक्टोनिक और बढ़ते और स्थानांतरण शोरलाइन के कारण   और यह याद

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प्रारंभिक कलारूपों में रामायण का चित्रण

https://www.youtube.com/watch?v=mK01SiZTmN0&t=1s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 तो, अब हमें बहुत जल्दी कला पर चित्रित रामायण के दृश्य मिलते हैं। रामायण की पहली कला चित्रण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का एक टेराकोटा है। यह दिखाता है कि रावण ने सीता को ले जाने और सीता को अपने गहने फेंकने के लिए दिखाया है, उम्मीद करते हुए कि

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भारतीय इतिहास क्या वास्तव में सत्य है ?

https://www.youtube.com/watch?v=78jB3PrvUhg इस विषय का जन्म तब हुआ जब मैं अक्सर लोगों से, विशेषत: पढ़े लिखे लोगों से यह सुनता हूँ  कि, भारतीय किसी भी तरह से इतिहासिक लोग नहीं हैं। ऐसा क्यों है की, हम दुनिया के अद्वितीय लोगों में से हैं,  क्यों कि, – हम  हमारे अतीत के बारे में बिलकुल

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