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आदि शंकराचार्य – जीवन चरित्र एवं समयकाल समीक्षा (श्री अमित शर्मा का व्याख्यान)

The Srijan Foundation organized a talk of Sri. Amit Sharma at New Delhi. The topic of the talk was ‘Life Journey of Adi Shankaracharya and the Time of His Incarnation”. https://www.youtube.com/watch?v=udYJTmScgCQ&t=359s

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पाइथागोरस और भारतीय ज्ञान के साथ उनका संबंध

https://www.youtube.com/watch?v=OfsYksCadmY?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   पाइथागोरस जो इस समय के फ्रेम में रहते थे, ये सज्जन, जो सभी पश्चिमी, अल्बर्ट बुर्की और ए एन। मार्लो और जी आर एस मीड हैं, उनमें से प्रत्येक का कहना है कि पायथागोरस भारत गए जहां उन्होंने अपने दर्शन, ज्ञान और अन्य चीजें सीखा। ये इंडिक लोगों को यह

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राष्ट्र की भूमिकाएं क्या हैं और राष्ट्र को अपने नागरिकों को पूर्ण स्वतंत्रता क्यों नहीं देनी चाहिए

https://www.youtube.com/watch?v=t01QNlsf4rA?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   हम यह मानते है कि स्वतंत्रता, आज़ादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण रूप से महत्वपूर्ण है। हम यह भी कहते हैं कि पूर्ण स्वतंत्रता और पूर्ण आज़ादी अराजकता के सिवा और कुछ नहीं है | अगर सभी को इजाजत दी जाती है के वह अपनी अपनी इच्छा के अनुसार कुछ

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भारत में वामपंथी और दक्षिणपंथियो का विकास

https://www.youtube.com/watch?v=CyIBOkWYJr0?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 जब ब्रिटिश आए, उन्होंने कुछ शुरू किया था। उन्होंने भारत का व्यवस्थित रूप से अध्ययन करना शुरू किया | उन्होंने भारत का एक व्यवस्थित अध्ययन शुरू किया था, जिसे हम सभी भारततत्त्व या इंडोलोजी के रूप से जानते हैं। और अंग्रेजों ने अपने स्वयं के दृष्टिकोण से, अपने तरीके से,

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आखिर ‘रुढ़िवादी’ शब्द का तात्पर्य क्या है?

https://www.youtube.com/watch?v=5mDQokkMVW0?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 जब हम खुद को रूढ़िवादी कहते हैं तो वास्तव में उसका क्या तात्पर्य है? मेरा मानना है की हम इससे चार चीज़ें दर्शाते है | सबसे पहले कि हम तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर हमारे विचारों को खड़ा करते है। हम किसीकाल्पनिक दुनिया में रहने वाले उदारवादी नहीं हैं, हम

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हिन्दू धर्म के अनुसार मानव व्यक्तित्व की पांच क्यारियाँ

आजकल, लगभद हमारे सारी, हमारा सारा ज्ञान आधुनिक विज्ञान के माध्यम से ही आता हैं I हम कहतें तो हैं कि हमारा विशेष प्राकृतिक शारीर हैं लेकिन अपने मन का एक स्वाधीन अस्तित्व होने को नकारतें है I वे कहतें हैं कि दिमागी गतिविधि ही सोचने-समझाने की शक्ति हैं, हिन्दू

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