Home > भारतीय इतिहास का पुनर्लेखन

स्वतंत्रता के बाद के युग में भारतीय इतिहास का राजनीतिकरण | संदीप बालकृष्ण | टीपू सुल्तान

https://www.youtube.com/watch?v=oe9cnzig9Lw&t=1s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 मैं इतिहास के एक अमेरिकी विद्वान द्वारा एक छोटी, बहुत ही हास्यपूर्ण उद्धरण के साथ शुरुआत करूंगा। वह राजनीति के बारे में यह कहते हैं और मैं उद्धृत करता हूं "राजनीति का पहला सबक इतिहास के पहले सबक को भूलना है"। तो मैं वही दोहराऊंगा, "राजनीति का पहला सबक इतिहास

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खलीफत आंदोलन और महात्मा गाँधी – शंकर शरण का व्याख्यान

खलीफत आंदोलन (1919-21) भारत में महात्मा गाँधी का पहला और सब से बड़ा राजनीतिक अभियान था। कांग्रेस नेतृत्व, मुस्लिम राजनीति, हिन्दू-मुस्लिम संबंध और भारत के भविष्य के लिए उस के बड़े गहरे और दूरगामी परिणाम हुए। उस घटना की शताब्दी के अवसर पर उस के सबक पर विचार करना जरूरी

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वैदिक विश्वदृष्टि – एक परिचय: श्री मृगेंद्र विनोद से प्रश्नोत्तर

वैदिक विश्वदृष्टि पर बातचीत का उद्देश्य इस सत्र के माध्यम से वेदों के बारे में एक परिचयात्मक समझ प्रदान करना है, फिर इसके बाद निकट भविष्य में शायद अधिक विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। आगामी चर्चा निम्न विन्दुओं पर होगी: - 1. वेदांगों और मीमांसा के साथ वेद शाखा

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भारतीय इतिहास का भारत के दृष्टिकोण से पुनर्लेखन होना चाहिए — अमित शाह

Source: - @AmitShah / Twitter. https://twitter.com/amitshah/status/1184809893041041409?s=12 इस सभागार में इतिहास के कई विद्वान् बैठे हैं| बालमुकुन्द जी भी यहाँ बैठे हैं जो इतिहास संकलन के लिए प्रयास कर रहे हैं| मेरा सब से आग्रह है की भारतीय इतिहास का भारतीय दृष्टि से पुनर्लेखन बहुत जरूरी है| मगर इसमें हमें किसी को दोष

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जिहाद और मुस्लिम धर्मविधान पर डॉक्टर बी.आर. अम्बेडकर के विचार

https://youtu.be/q6Ne9WtypyQ?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 एक मुस्लिम की अपनी मातृभूमि [भारत] के प्रति निष्ठा पर, अंबेडकर लिखते हैं: "नोटिस के लिए बुलाने वाले सिद्धांतों में इस्लाम का सिद्धांत है, जो कहता है कि ऐसे देश में जो मुस्लिम शासन के अधीन नहीं है, जहां भी मुस्लिम कानून और भूमि के कानून के बीच संघर्ष होता

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अंबेडकर की इस्लामिक समझ

https://www.youtube.com/watch?v=PBoVNta9oSo?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 हालाँकि, हम यह नहीं जानते किवे दुनिया के अन्य महान धर्मों जैसे इस्लाम के बारे में क्या सोचते थे। क्योंकि अम्बेडकर का यह पहलू हमारे सामान्य प्रवचन और पाठ्य पुस्तकों से छिपा हुआ है, इसलिए यह सर्वाधिकआश्चर्य की बात हो सकती है कि अम्बेडकर ने इस्लाम के बारे में अक्सर

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गुरु तेग बहादुर का धर्मार्थ प्राण त्यागने से पहले औरंगजेब के साथ संवाद

https://www.youtube.com/watch?v=DBFIiqysBIY?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 गुरुदेव बोले, "300 वर्ष पहले हमारे देश में औरंगजेब नाम का निर्दयी राजा था। उसने अपने भाई को मारा, पिता को बंदी बनाया और स्वयं राजा बन गया। उसके उपरांत उसने निश्चय किया कि वो भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाएगा।" "क्यों गुरुदेव?" "क्योंकि उसने सोचा कि यदि दूसरे देशों को इस्लामिक राष्ट्र

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एक कश्मीरी शरणार्थी शिविर का नाम ‘औरंगज़ेब का स्वप्न’ क्यों रखा गया? – मनोवैज्ञानिक आघात का ऐतिहासिक संदर्भ पढ़ें

https://www.youtube.com/watch?v=6a5moK26JAw&t=1s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 मैं एक कहानी आपसे साझा करूंगा, क्योंकि मुझे लगता है कि कहानी लोगों को यह बताने का सबसे अच्छा तरीका है कि मैं इस तक कैसे पहुंचा। किसी को पता है कि यह क्या है? यह कश्मीरी शरणार्थी शिविर है। मैं वहां काम कर रहा था, और मेरी पत्नी भी

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इसाई पंथ और भारत – डॉ. सुरेन्द्र कुमार जैन का व्याख्यान

संपूर्ण विश्व में प्रेम व शान्ति का स्वरुप माने जाने वाले इसाई धर्म के विस्तार का इतिहास रक्त से सना है, ये तथ्य कम ही लोग जानते हैं| यूनान, रोम व माया जैसी कई प्राचीन संस्कृतियाँ इसाई मिशनरियों के हाथों जड़ से मिटा दी गयीं| अनगिनत देशों की भोली-भाली प्रजा

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वैदिक काल में जनपदों का भूगोल

https://youtu.be/X84seX-D-CE?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 भारतीयों में एक सामान्य भ्रांति है कि जनपद (प्राचीन भारत में राज्य या प्रशासनिक इकाई) केवल बुद्ध काल में हुआ करते थे वैदिक काल में नहीं। इसका तर्क यह दिया जाता है कि वेदों में जनपदों  का कोई वर्णन नहीं मिलता है। श्री मृगेंद्र विनोद इस भ्रांति का सिरे से

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