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वैदिक विश्वदृष्टि – एक परिचय: श्री मृगेंद्र विनोद से प्रश्नोत्तर

वैदिक विश्वदृष्टि पर बातचीत का उद्देश्य इस सत्र के माध्यम से वेदों के बारे में एक परिचयात्मक समझ प्रदान करना है, फिर इसके बाद निकट भविष्य में शायद अधिक विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। आगामी चर्चा निम्न विन्दुओं पर होगी: - 1. वेदांगों और मीमांसा के साथ वेद शाखा

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अरबी-फ़ारसी मुक्त हिन्दी: बाज़ारू खिचड़ी से आर्यभाषा तक — नित्यानन्द मिश्र का व्याख्यान

यद्यपि संस्कृतनिष्ठ और प्राकृतनिष्ठ हिन्दी बोलने और लिखने वाले अनेक लोग हैं, तथापि आजकल की लोकप्रिय हिन्दी उर्दू-हिन्दी की खिचड़ी है। नव-स्वतन्त्र भारत में “बाज़ार की भाषा” के नाम पर मिश्रित उर्दू-हिन्दी का समर्थन हुआ, और बॉलीवुड द्वारा अरबी-फ़ारसी शब्दों के प्राचुर्य वाली उर्दू का ही

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पैगंबरवाद का पूर्व पक्ष — नीरज अत्रि द्वारा एक व्याख्यान

पैगम्बरवादी मज़हबों के आने से पहले विश्व की विभिन्न सभ्यताओं का संक्षिप्त परिचय देने के पश्चात पैगम्बरवादी विचारधाराओं की तुलना भारतीय विचारधाराओं से की जाएगी। तुलनात्मक अध्ययन के मुख्य बिंदु हैं:- -- मानवजाति का विभाजन (मोमिन बनाम काफ़िर).-- समय का विभाजन (जाहिलयत बनाम नूर).-- पुनर्जन्म के प्रति विचार.--

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भारत में गांजा का महत्व — प्रिया मिश्रा द्वारा एक व्याख्यान

यूनान, चीन, मिस्र आदि प्राचीन सभ्यताओं में तथा यहूदी, ताओ, बौद्ध, सिख व इस्लाम जैसे धर्मों में गांजा या भांग नामक वनस्पति को बहुत महत्व दिया गया है और इसका प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता रहा है| तथापि गांजा के सबसे पुरातन उल्लेख भारत में मिलते हैं| सनातन धर्म

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इसाई पंथ और भारत – डॉ. सुरेन्द्र कुमार जैन का व्याख्यान

संपूर्ण विश्व में प्रेम व शान्ति का स्वरुप माने जाने वाले इसाई धर्म के विस्तार का इतिहास रक्त से सना है, ये तथ्य कम ही लोग जानते हैं| यूनान, रोम व माया जैसी कई प्राचीन संस्कृतियाँ इसाई मिशनरियों के हाथों जड़ से मिटा दी गयीं| अनगिनत देशों की भोली-भाली प्रजा

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आयुर्वेद का महत्व — जिज्ञासा आचार्या द्वारा एक व्याख्यान

प्राचीन काल से चली आ रही भारतीय आध्यात्म, ज्ञान और विज्ञान की अविरल परंपरा का एक अभिन्न अंग है आयुर्वेद| आयुर्वेद ऐसी प्रायोगिक चिकित्सा पद्धति है जिसे केवल वैद्यों-चिकित्सकों ने ही नहीं, परन्तु सामान्य जनों ने अपने जीवन में, विशेषकर अपने रसोईघरों में आत्मसात कर लिया| और यही कारण है

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भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली — मेहुलभाई आचार्य का व्याख्यान

भारतीय परंपरा में मनुष्य जीवन के सबसे महत्वपूर्ण मूल्यों में से शिक्षा को सबसे उच्च का स्थान दिया गया है| पुरातन काल से भारतवर्ष समस्त विश्व के लिए ज्ञान का स्रोत रहा है और भारत के ज्ञान का सर्वप्रथम स्रोत हैं हमारे वेद| एक सुसंस्कृत व्यष्टि को समष्टि की नींव

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सनातन परंपरा की पुनर्स्थापना में संत रामानन्दाचार्य जी की भूमिका – श्री देवांशु झा का व्याख्यान

The Srijan Foundation organized a talk of Sri. Devanshu Jha at New Delhi. The topic of the talk was 'सनातन परंपरा की पुनर्स्थापना में संत रामानन्दाचार्य जी की भूमिका” https://www.youtube.com/watch?v=I3IIj-gcCL8&t=1609s

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आदि शंकराचार्य – जीवन चरित्र एवं समयकाल समीक्षा (श्री अमित शर्मा का व्याख्यान)

The Srijan Foundation organized a talk of Sri. Amit Sharma at New Delhi. The topic of the talk was ‘Life Journey of Adi Shankaracharya and the Time of His Incarnation”. https://www.youtube.com/watch?v=udYJTmScgCQ&t=359s

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क्या भारत का हिन्दू रहना ज़रूरी है? : शंकर शरण जी का व्याख्यान

अगर भारत के 80% नागरिक मुसलमान हो जायें तो क्या भारत बचेगा? इसका सीधा जवाब यह है किअगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान व भारत में कोई अंतरनहीं रह जाएगा. परंतु अपने आप को बुद्धि-ज़ीवी कहने वाले लोग कहते है कि 'भारत के 100% मुस्लिम या इसाई हो जाने से

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