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पश्चिमी देशों के पास भारत के राष्ट्रवादी चरित्र पर सवाल उठाने का कोई अधिकार या आधार क्यों नहीं है

https://youtu.be/jUy3hj6nb3k?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 यदि आप 2000 ईसवी के मानचित्र को देखें, तो आयरलैंड अलग हो गया है। कोई भी देश 1800 ईसवी, 1500 ईसवी, 1000 ईसवी, में देश नहीं है। 1000 ईसवी पूर्व छोड़ दें क्योंकि उनमें से कोई भी 1000 ईसवी पूर्व नहीं था। यदि आप राजनीतिक सीमा के आधार पर परिभाषित

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यूरोप में 1500 ई. तक राष्ट्र राज्यों की अनुपस्थिति

https://www.youtube.com/watch?v=6-PC0g2BfyY&t=19s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 यह भारत के विशाल भौगोलिक क्षेत्र पर लगभग 475 ई. के आसपास का गुप्त साम्राज्य का एक नक्शा है। अगर आप देखें तो यहाँ ‘भारत’ एक बड़े साम्राज्य के रूप में परिभाषित है,  हालांकि बीच में कुछ राज्य भी हैं। 475 ई. के यूरोप के मानचित्र को देखें। पश्चिमी यूरोप

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ब्रिटिश आक्रमणकारियों ने भारत को कैसे लूट लिया – विल ड्यूरेंट का ‘द केस फॉर इंडिया’

https://www.youtube.com/watch?v=d9xHoMorfzs?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   हम यह जानना चाहते हैं कि भारत में गरीबी का क्या कारण है? मैं 2 कार्यों को इंगित करना चाहूंगा, यह एंगस मैडिसन है जो नीदरलैंड्स में एक ऐतिहासिक अर्थशास्त्री है। उन्होंने वर्तमान युग के मोड़ से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं का अध्ययन किया 2003 तक एक तरह से, वह दिखाता

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अर्थनैतिक दक्षिणपंथियों के क्रियाकर्म किस प्रकार से राष्ट्रविरोधी हैं?

https://www.youtube.com/watch?v=ruB7DY2exhA?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   अब दूसरी बात यह है की अर्थनैतिक रूप से दक्षिणपंथी लोग भी राष्ट्रविरोधी है। मैं मानता हूँ कि उदारवादी अर्थशास्त्र सतत विकास का विरोधी है। मुझे लगता है कि अयन रैंड जिन चीज़ों के बारे में बात करते है वह बिलकुल बकवास है; पर दक्षिणपंथा गरीब-विरोधी है ऐसा लगने लगा

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राष्ट्र की भूमिकाएं क्या हैं और राष्ट्र को अपने नागरिकों को पूर्ण स्वतंत्रता क्यों नहीं देनी चाहिए

https://www.youtube.com/watch?v=t01QNlsf4rA?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   हम यह मानते है कि स्वतंत्रता, आज़ादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण रूप से महत्वपूर्ण है। हम यह भी कहते हैं कि पूर्ण स्वतंत्रता और पूर्ण आज़ादी अराजकता के सिवा और कुछ नहीं है | अगर सभी को इजाजत दी जाती है के वह अपनी अपनी इच्छा के अनुसार कुछ

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एक सच्ची, शुद्ध और अच्छी जाति व्यवस्था कभी थी ही नहीं

https://www.youtube.com/watch?v=bYkcqwKvxU0?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   दक्षिणपंथी विचारों में एक और समस्या यह भी है की यदि यहाँ आप एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करते ही नहीं हैं, वह विषय है जातिप्रथा | दक्षिणपंथी मंडलियों में जाति की चर्चा सिर्फ इस बारे में होती रहती है की वैदिक काल में जाति का मतलब क्या

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सावरकर मानते थे कि एक राष्ट्र का उदय एक आधुनिक औद्योगिक समाज में ही संभव है

https://www.youtube.com/watch?v=79YwxJ0Y9R8?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1   अभी मैं जिस विषय पे चर्चा करूँगा वह है,दक्षिणपंथियों में एक बड़ा दोष यहहै कि हम कहां से आयेवहभूल गए हैं | सावरकर की सोच, जो मेरे हिसाब से दक्षिणपंथियों में एक व्यवस्थित राजनीतिक विचार है, उसका उद्देश्य किसी ग्रामीणयूटोपिया का संरचना करना नहीं है। यह एक कृषिमूलक यूटोपिया के

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भारत में वामपंथी और दक्षिणपंथियो का विकास

https://www.youtube.com/watch?v=CyIBOkWYJr0?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 जब ब्रिटिश आए, उन्होंने कुछ शुरू किया था। उन्होंने भारत का व्यवस्थित रूप से अध्ययन करना शुरू किया | उन्होंने भारत का एक व्यवस्थित अध्ययन शुरू किया था, जिसे हम सभी भारततत्त्व या इंडोलोजी के रूप से जानते हैं। और अंग्रेजों ने अपने स्वयं के दृष्टिकोण से, अपने तरीके से,

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आखिर ‘रुढ़िवादी’ शब्द का तात्पर्य क्या है?

https://www.youtube.com/watch?v=5mDQokkMVW0?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 जब हम खुद को रूढ़िवादी कहते हैं तो वास्तव में उसका क्या तात्पर्य है? मेरा मानना है की हम इससे चार चीज़ें दर्शाते है | सबसे पहले कि हम तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर हमारे विचारों को खड़ा करते है। हम किसीकाल्पनिक दुनिया में रहने वाले उदारवादी नहीं हैं, हम

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