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शिव आगम का अवतरण कैसे हुआ?

  https://www.youtube.com/watch?v=3Tw4IaqZxeE&t=5s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 शिव आगम वे आगम हैं जो स्वयं महादेव द्वारा प्रकट किए गए थे। कामिका आगम, जो सबसे महत्वपूर्ण अगमों में से एक माना जाता है, में इसका वर्णन पाया जाता है। इसमें महादेव को पंचमुख के रूप में वर्णन किया गया है - सद्योजात, वामदेव, अघोरा, तद्पुरुष और ईशान। महादेव

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पुरातात्त्विक साक्ष्य हमें राम जन्मभूमि – बाबरी मस्जिद के बारे में क्या जानकारी प्रदान करते हैं?

सृजन संस्था ने अयोध्या राम मंदिर विवाद पर विचार विमर्श की एक श्रृंखला शुरू करने के उद्देश्य से डॉ मीनाक्षी जैन के साथ नई दिल्ली स्थित इनटेक परिसर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर श्रोताओं को सम्मानित वक्ता डॉ मीनाक्षी जैन के विचार सुनने का अवसर मिला। डॉ

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भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

https://www.youtube.com/watch?v=T-pBRf9GU1g?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 छोटी सी आयु थी उनकी, जब घर छोड़ा था आठ वर्ष के थे वो I संन्यास के लिए निकले जब I नौ वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास लिया और उसके बाद में, भगवान् शंकराचार्य ने, वोह काम करके दिखाया, जो आज सोचा भी नहीं जा सकता हैं I भगवान्

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हिन्दू धरम में ऋतूस्राव के देवता कौन हैं ?

अब ऐसी पद्धाथियाँ एक सकारात्मक बोध कराती हैं और उसपर यह कि हिन्दू मानतें हैं कि उनकी देवी भी रजस्वला होती हैं और उत्सव मनाएं जातें हैं उनके सम्मान में I एक त्यौहार हैं कामाख्या, आसाम का प्रसिद्द उत्सव I तो यह कामाख्या का उत्सव, शायद उसे अम्बुबाची कहतें हैं,

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त्रिदोष की धारणा – आयुर्वेदिक औचित्य और तत्व ऋतुस्राव की पद्धति में

वस्तुतः जो ऋतुस्राव की क्रिया का अनुभव करतें हैं वोह शायद भूल गएँ हैं कि ऋतुस्राव की क्रिया में एक आयुर्वेदिक औचित्य, आयुर्वेदिक तत्व भी हैं जिसके बारें में वेदों, धर्मशास्त्रों में बताया गया हैं I आयुर्वेद ऋतुस्राव को एक दैहिक प्रक्रिया मानता हैं जो त्रिदोषों के अधीन हैं I

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हिन्दू धर्म के अनुसार मानव व्यक्तित्व की पांच क्यारियाँ

आजकल, लगभद हमारे सारी, हमारा सारा ज्ञान आधुनिक विज्ञान के माध्यम से ही आता हैं I हम कहतें तो हैं कि हमारा विशेष प्राकृतिक शारीर हैं लेकिन अपने मन का एक स्वाधीन अस्तित्व होने को नकारतें है I वे कहतें हैं कि दिमागी गतिविधि ही सोचने-समझाने की शक्ति हैं, हिन्दू

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वर्ण, वेद व आधुनिक समाज — मोहित भारद्वाज द्वारा एक व्याख्यान

क्या हम स्वतंत्र हैं या पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित विश्व में जकड़ें हुए हैं ? क्या हमनें पूर्वजों की शिक्षा, भाषा और नैतिक मूल्यों को भुला दिया हैं? हम अपनी जड़ों से भटक गए हैं । हमें वापस लौटना हैं और 'वैदिक भारत' को पुनर्जीवित करना हैं। इस व्याख्यान में आपको

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‘संस्कृतम् : आत्मा की भाषा’ — सम्पदानंदा मिश्रा द्वारा एक भाषण

https://www.youtube.com/watch?v=40uaJAGj3bc&t=1049s ओ३म् जीवने यावदा दानम् , स्यात् प्रदानं ततोधिकम् इत्येषा प्रार्थनास्माकं भगवन् परिपूर्यताम् , भगवन् परिपूर्यताम् त्वमेव माता च पिता त्वमेव , त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव , त्वमेव सर्वं मम देव देव सर्वे भवन्तु सुखिनः , सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ओं शान्तिश्शान्तिश्शान्तिः सर्वेभ्यो नमो नमः   आप सबको नमस्कार मुझे ये बोला

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सिन्धुघाटी सभ्यता और विष्णु भगवान्

Source: - Subhash Kak / Twitter. महाभारत में विष्णु के वराह अवतार को एकशृङ्ग कहा गया है। क्या इसीका चित्रण सिन्धु-सरस्वती काल के एकशृङ्गीय कृत्रिम पशु से किया गया है? pic.twitter.com/GJzRFOtTus — Subhash Kak (@subhashkak1) November 7, 2017  

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प्रारंभिक कलारूपों में रामायण का चित्रण

https://www.youtube.com/watch?v=mK01SiZTmN0&t=1s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 तो, अब हमें बहुत जल्दी कला पर चित्रित रामायण के दृश्य मिलते हैं। रामायण की पहली कला चित्रण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का एक टेराकोटा है। यह दिखाता है कि रावण ने सीता को ले जाने और सीता को अपने गहने फेंकने के लिए दिखाया है, उम्मीद करते हुए कि

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रामायण पर प्रख्यात हस्तियों की राय

https://www.youtube.com/watch?v=KN7x5VidkIs&t=15s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 अब, भारतीय सभ्यता में रामायण के महत्व को कई धार्मिक नेताओं, जन विचारकों द्वारा उम्र के आधार पर, और रामायण क्या है पर जोर दिया गया है? यह नैतिकता का एक मैनुअल है; यह सही आचरण और सही मूल्यों में लोगों को निर्देश देना है यह एक राष्ट्रीय कोड है

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