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हिंदू देवी देवता जापानी संस्कृति का अभिन्न अंग है | बिनॉय बहल

अनुवादिका - आशा लता चौधरी https://www.youtube.com/watch?time_continue=153&v=Gt8HoqkFNp0?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 जापान में हमने दो सुंदर वेणुगोपाल देखे । इस पर मैंने सोचा कि आप यह जानने के उत्सुक होंगे कि हिंदू देवी देवता जिस प्रकार भारत में पूजे जाते हैं, क्या उसी प्रकार आज जापान में भी पूजे जाते हैं। वस्तुतः आपको यह जानकर आश्चर्य होगा

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भारतीय महाकाव्य एशियाई महाद्वीप के अभिन्न भाग क्यों हैं? | बिनॉय बहल

अनुवादिका - आशा लता चौधरी https://www.youtube.com/watch?time_continue=12&v=gpetea4eD-Y?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 महाकाव्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनका बहुत अधिक आदर किया जाता है । वस्तुतः रामायण पर मेरी एक फिल्म है जिसका फिल्मांकन मैंने 10 देशों में किया था, सुजाता और मेरे लिए लोगों की उस निष्ठा को देखना बहुत सुखद था, जिससे वे रामायण का

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वैदिक विश्वदृष्टि – एक परिचय: श्री मृगेंद्र विनोद से प्रश्नोत्तर

वैदिक विश्वदृष्टि पर बातचीत का उद्देश्य इस सत्र के माध्यम से वेदों के बारे में एक परिचयात्मक समझ प्रदान करना है, फिर इसके बाद निकट भविष्य में शायद अधिक विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। आगामी चर्चा निम्न विन्दुओं पर होगी: - 1. वेदांगों और मीमांसा के साथ वेद शाखा

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शिव आगम का अवतरण कैसे हुआ?

  https://www.youtube.com/watch?v=3Tw4IaqZxeE&t=5s?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 शिव आगम वे आगम हैं जो स्वयं महादेव द्वारा प्रकट किए गए थे। कामिका आगम, जो सबसे महत्वपूर्ण अगमों में से एक माना जाता है, में इसका वर्णन पाया जाता है। इसमें महादेव को पंचमुख के रूप में वर्णन किया गया है - सद्योजात, वामदेव, अघोरा, तद्पुरुष और ईशान। महादेव

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पुरातात्त्विक साक्ष्य हमें राम जन्मभूमि – बाबरी मस्जिद के बारे में क्या जानकारी प्रदान करते हैं?

सृजन संस्था ने अयोध्या राम मंदिर विवाद पर विचार विमर्श की एक श्रृंखला शुरू करने के उद्देश्य से डॉ मीनाक्षी जैन के साथ नई दिल्ली स्थित इनटेक परिसर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर श्रोताओं को सम्मानित वक्ता डॉ मीनाक्षी जैन के विचार सुनने का अवसर मिला। डॉ

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भगवान् शंकराचार्य की उपलब्धियां

https://www.youtube.com/watch?v=T-pBRf9GU1g?cc_lang_pref=hi&cc_load_policy=1 छोटी सी आयु थी उनकी, जब घर छोड़ा था आठ वर्ष के थे वो I संन्यास के लिए निकले जब I नौ वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास लिया और उसके बाद में, भगवान् शंकराचार्य ने, वोह काम करके दिखाया, जो आज सोचा भी नहीं जा सकता हैं I भगवान्

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हिन्दू धरम में ऋतूस्राव के देवता कौन हैं ?

अब ऐसी पद्धाथियाँ एक सकारात्मक बोध कराती हैं और उसपर यह कि हिन्दू मानतें हैं कि उनकी देवी भी रजस्वला होती हैं और उत्सव मनाएं जातें हैं उनके सम्मान में I एक त्यौहार हैं कामाख्या, आसाम का प्रसिद्द उत्सव I तो यह कामाख्या का उत्सव, शायद उसे अम्बुबाची कहतें हैं,

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त्रिदोष की धारणा – आयुर्वेदिक औचित्य और तत्व ऋतुस्राव की पद्धति में

वस्तुतः जो ऋतुस्राव की क्रिया का अनुभव करतें हैं वोह शायद भूल गएँ हैं कि ऋतुस्राव की क्रिया में एक आयुर्वेदिक औचित्य, आयुर्वेदिक तत्व भी हैं जिसके बारें में वेदों, धर्मशास्त्रों में बताया गया हैं I आयुर्वेद ऋतुस्राव को एक दैहिक प्रक्रिया मानता हैं जो त्रिदोषों के अधीन हैं I

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हिन्दू धर्म के अनुसार मानव व्यक्तित्व की पांच क्यारियाँ

आजकल, लगभद हमारे सारी, हमारा सारा ज्ञान आधुनिक विज्ञान के माध्यम से ही आता हैं I हम कहतें तो हैं कि हमारा विशेष प्राकृतिक शारीर हैं लेकिन अपने मन का एक स्वाधीन अस्तित्व होने को नकारतें है I वे कहतें हैं कि दिमागी गतिविधि ही सोचने-समझाने की शक्ति हैं, हिन्दू

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वर्ण, वेद व आधुनिक समाज — मोहित भारद्वाज द्वारा एक व्याख्यान

क्या हम स्वतंत्र हैं या पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित विश्व में जकड़ें हुए हैं ? क्या हमनें पूर्वजों की शिक्षा, भाषा और नैतिक मूल्यों को भुला दिया हैं? हम अपनी जड़ों से भटक गए हैं । हमें वापस लौटना हैं और 'वैदिक भारत' को पुनर्जीवित करना हैं। इस व्याख्यान में आपको

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