Tagged: भारतीय संस्कृति

नालंदा विश्वविद्यालय के बारें में चीनी विद्यार्थियों की राय

  मैंने उस जगह की यात्रा की हैं, लेकिन उसको जानने के लिए, या फिर यह जानने के लिए की वह कैसे दिखता था, आपको हुआन सांग और आय सिंग की आत्मा कथा पढ़नी...

भारत से चीन को ज्ञान का अंतरण

  अब हम बात करेंगे भारत से चीन के ज्ञानान्तरण के बारे में I संस्कृत भाषा में लिखित कई सारे हस्तलेख चीन ले जाए गए, चीनी विद्वानों के द्वारा या फिर भारतीय विद्वानों द्वारा...

प्राचीन भारत में तर्क की कला

  अब हम बात करतें हैं तर्क कि, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग हुआ करता था I आप इस चित्र को देख सकतें हैं आदि शंकराचार्य की जो तर्क कर रहें हैं...

कीलडी और अरिकमेडू खुदाई से संकेत मिलता है कि दक्षिण भारतीय सभ्यता ५०० ईसा पूर्व से भी पुराना है

  हाल ही में हमें कीलडीकी कहानी के बारे में बताया गया है। कीलडीके पीछे एक रोमांचक कहानी मिली है। पुरातत्वविदों को मदुरै में खुदाई करना था हालांकि, मदुरै अन्य भारतीय शहरों की तरह...

हिन्दू धरम में ऋतूस्राव के देवता कौन हैं ?

अब ऐसी पद्धाथियाँ एक सकारात्मक बोध कराती हैं और उसपर यह कि हिन्दू मानतें हैं कि उनकी देवी भी रजस्वला होती हैं और उत्सव मनाएं जातें हैं उनके सम्मान में I एक त्यौहार हैं...

रजस्वला परिचर्या – आयुर्वेद के अनुसार ऋतुस्राव के समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं

आयुर्वेद कई नुस्खे देता हैं कि ऋतुस्राव के समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं जिसे रजस्वला परिचर्या I परिचर्या अर्थात् जीवन शैली I रजस्वला स्त्री को उन तीन दिनों में किस प्रकार की...

त्रिदोष की धारणा – आयुर्वेदिक औचित्य और तत्व ऋतुस्राव की पद्धति में

वस्तुतः जो ऋतुस्राव की क्रिया का अनुभव करतें हैं वोह शायद भूल गएँ हैं कि ऋतुस्राव की क्रिया में एक आयुर्वेदिक औचित्य, आयुर्वेदिक तत्व भी हैं जिसके बारें में वेदों, धर्मशास्त्रों में बताया गया...

जन्म का महात्म्य और हिन्दू धर्मं में गर्भपात को ब्रह्म्हाया क्यों माना गया हैं ?

जन्म इतना महतवपूर्ण क्यों हैं? हमारे हिन्दू सम्प्रदाय में जन्म देना एक पवित्र बात मानी गयी हैं, बहुत बड़े पुण्य की बात, एक धार्मिक क्रिया जिसका पुण्य बहुत महान हैं, क्यों ? क्योकि जन्म...

हिन्दू धर्म और राष्ट्रीयता – शंकर शरण द्वारा एक व्याख्यान

  समय बदल गया है, समय की मांग बदल गयी है,और जो नयी पीढ़ी आती है वह स्वयं सबकुछ तय नहीं करती; बहुत सी चीजे उसको बनी-बनायीं मिलती है | यह जो कैरियर ओरिएंटेडनेस...

ओडिया – पूर्वी हिंदमहासागर में भारतीय नौसेना के अग्रगामी

अब कहीं न कहीं ओडिया ने महसूस किया कि, समुद्री तट के किनारे से सटकर जलयात्रा करना जटिल हैं और शायद जिसने ऐसी यात्रा कभी की हो, ने यह सुझाव रखा होगा कि दक्षिणपूर्वी...

कंबोडिया और वियतनाम के खमेर और चरमे संस्कृतियों का भारत से सम्बन्ध

तो एक कहानी हैं जो सामूहिक रूप से काम्बोसिया और वियतनाम आदि देशों के अभिलेखों में देखि जाती हैं, और इसके बहुत समय बाद अंकोर और चरमे साम्राज्य उभरे, मगर वोह कहानी कुछ इस...

रोहिंग्याओं समर्थकों के कृत्रिम तर्क और भारत एक राष्ट्र के रूप में

अब, उससे पहले एक बात है जिस पर हमें ध्यान देना चाहिये । हम एक राष्ट्र-राज्य में रहते हैं । यदि हम एक राष्ट्र राज्य में रहते हैं, राष्ट्र राज्य के सिद्धान्त के साथ...

वर्ण, वेद व आधुनिक समाज — मोहित भारद्वाज द्वारा एक व्याख्यान

क्या हम स्वतंत्र हैं या पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित विश्व में जकड़ें हुए हैं ? क्या हमनें पूर्वजों की शिक्षा, भाषा और नैतिक मूल्यों को भुला दिया हैं? हम अपनी जड़ों से भटक गए...

‘संस्कृतम् : आत्मा की भाषा’ — सम्पदानंदा मिश्रा द्वारा एक भाषण

ओ३म् जीवने यावदा दानम् , स्यात् प्रदानं ततोधिकम् इत्येषा प्रार्थनास्माकं भगवन् परिपूर्यताम् , भगवन् परिपूर्यताम् त्वमेव माता च पिता त्वमेव , त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव , त्वमेव सर्वं मम देव...