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इस्लामी आक्रमण और हिन्दू प्रतिरोध – राजीव सिंह का व्याख्यान

श्री राजीव सिंह बताएंगे कि मुहम्मद बिन क़ासिम से लेकर अब तक हैम ने हिन्दुतान का एक बड़ा भाग कैसे खोया और आधुनिक युग में उसे कैसे पुनः प्राप्त कर सकते हैं। https://www.youtube.com/watch?v=ApNvrBTka9c

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गौ आधारित अर्थव्यवस्था और प्रभावी चिकित्सा – सुनिल मानसिंघका का व्याख्यान

किसान, कृषि और पर्यावरण के लिए भारतीय गाय आधारित जीवन पद्धति विकसित करने की दृष्टि से वर्ष 1996 में गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र की शुरुआत हुई। श्री सुनील मानसिंगका गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र, देवलापार, नागपुर के संयोजक हैं| Go Vigyan Anusandhan kendra, kamdhenu Bhawan, Pt. Bacharaj Vyas Chowk, chitar oli, mahal,

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खलीफत आंदोलन और महात्मा गाँधी – शंकर शरण का व्याख्यान

खलीफत आंदोलन (1919-21) भारत में महात्मा गाँधी का पहला और सब से बड़ा राजनीतिक अभियान था। कांग्रेस नेतृत्व, मुस्लिम राजनीति, हिन्दू-मुस्लिम संबंध और भारत के भविष्य के लिए उस के बड़े गहरे और दूरगामी परिणाम हुए। उस घटना की शताब्दी के अवसर पर उस के सबक पर विचार करना जरूरी

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[Q/A] हलाल-अर्थव्यवस्था और झटका मांस आन्दोलन – रवि रंजन सिंह का व्याख्यान

Main Talk: https://www.youtube.com/watch?v=RUIaWa0tvRw रवि रंजन इसका आर्थिक पहलू बताते हैं कि किसी भी भोज्य पदार्थ, चाहे वे चिप्स क्यों न हों, को ‘हलाल’ तभी माना जा सकता है जब उसकी कमाई में से एक हिस्सा ‘ज़कात’ में जाए- जिसे वे जिहादी आतंकवाद को पैसा देने के ही बराबर मानते हैं, क्योंकि

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विश्व द्वारा अनदेखा किया गया बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों का नरसंहार – अक्षय जोग का व्याख्यान

बांगलादेश और म्यानमार के अल्पसंख्याको कें प्रति दुनिया का दृष्टीकोन पूरी तरहसे अलग है और अधिकांशरुपसे पक्षपाती है. म्यानमार के रोहिंग्या मुसलमान हत्याकांडपर आवाज उठानेवाले सेक्युलर, विचारवन्त और मानवाधिकार कार्यकर्ता, बांगलादेश मे हुए हिंदू और बौद्ध नरसंहार पर चूप है. यह प्रवृत्ती चुनिंदा मानवता कहलाती है. मुसलमान-बहुसंख्य बांगलादेशके बौद्ध शरणार्थी

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संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए वेंकटचलिया आयोग की रिपोर्ट: भाग 1 — अश्विनी उपाध्याय का व्याख्यान

संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना 22 फरवरी, 2000 को न्यायमूर्ति एमएन वेंकटचलैया की अध्यक्षता में सरकारी संकल्प द्वारा की गई थी। संदर्भ की शर्तों में कहा गया है कि आयोग पिछले 50 वर्षों के अनुभव के मद्देनजर जांच करेगा कि शासन की कुशल, सुचारू

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हलाल-अर्थव्यवस्था और झटका मांस आन्दोलन — रवि रंजन सिंह का व्याख्यान

रवि रंजन इसका आर्थिक पहलू बताते हैं कि किसी भी भोज्य पदार्थ, चाहे वे चिप्स क्यों न हों, को ‘हलाल’ तभी माना जा सकता है जब उसकी कमाई में से एक हिस्सा ‘ज़कात’ में जाए - जिसे वे जिहादी आतंकवाद को पैसा देने के ही बराबर मानते हैं, क्योंकि हमारे

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[Q/A] अरबी-फ़ारसी-मुक्त हिन्दी: बाज़ारू खिचड़ी से आर्य भाषा तक | नित्यानन्द मिश्र

Main Talk: - https://www.youtube.com/watch?v=1B7D8tRMBII यद्यपि संस्कृतनिष्ठ और प्राकृतनिष्ठ हिन्दी बोलने और लिखने वाले अनेक लोग हैं, तथापि आजकल की लोकप्रिय हिन्दी उर्दू-हिन्दी की खिचड़ी है। नव-स्वतन्त्र भारत में “बाज़ार की भाषा” के नाम पर मिश्रित उर्दू-हिन्दी का समर्थन हुआ, और बॉलीवुड द्वारा अरबी-फ़ारसी शब्दों के प्राचुर्य वाली उर्दू का ही प्रचार-प्रसार

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पैगंबरवाद का पूर्व पक्ष — नीरज अत्रि द्वारा एक व्याख्यान

पैगम्बरवादी मज़हबों के आने से पहले विश्व की विभिन्न सभ्यताओं का संक्षिप्त परिचय देने के पश्चात पैगम्बरवादी विचारधाराओं की तुलना भारतीय विचारधाराओं से की जाएगी। तुलनात्मक अध्ययन के मुख्य बिंदु हैं:- -- मानवजाति का विभाजन (मोमिन बनाम काफ़िर).-- समय का विभाजन (जाहिलयत बनाम नूर).-- पुनर्जन्म के प्रति विचार.--

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भारत में गांजा का महत्व — प्रिया मिश्रा द्वारा एक व्याख्यान

यूनान, चीन, मिस्र आदि प्राचीन सभ्यताओं में तथा यहूदी, ताओ, बौद्ध, सिख व इस्लाम जैसे धर्मों में गांजा या भांग नामक वनस्पति को बहुत महत्व दिया गया है और इसका प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता रहा है| तथापि गांजा के सबसे पुरातन उल्लेख भारत में मिलते हैं| सनातन धर्म

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