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संविधान का अनुच्छेद २५ २(अ) और क्यूँ इसकी व्याख्या मौलिक रूप से सदोष है

धर्म से जुड़ीस्वतंत्रता के सम्बन्ध में सरकार के अधिकार संविधान के अनुच्छेद २५ और २६ में विहित हैं। अनुच्छेद २५ निजी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा और अनुच्छेद २६ सम्प्रदायों की धार्मिक स्वतंत्रता...

हिन्दू अनुदान समिति का धन सरकारों द्वारा प्रयोग किया जा रहा है जो कि संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन है

हिन्दुओं के मंदिरों से लिया गया पैसा दो चीजों में लगाया गया है, ईसाईयों की जेरूसलम यात्रा और मुसलमानों की हज यात्रा। यह हिन्दुओं के पैसे से हो रहा है। यदि मैं ईसाई या...

हिन्दू धरम में ऋतूस्राव के देवता कौन हैं ?

अब ऐसी पद्धाथियाँ एक सकारात्मक बोध कराती हैं और उसपर यह कि हिन्दू मानतें हैं कि उनकी देवी भी रजस्वला होती हैं और उत्सव मनाएं जातें हैं उनके सम्मान में I एक त्यौहार हैं...

रजस्वला परिचर्या – आयुर्वेद के अनुसार ऋतुस्राव के समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं

आयुर्वेद कई नुस्खे देता हैं कि ऋतुस्राव के समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं जिसे रजस्वला परिचर्या I परिचर्या अर्थात् जीवन शैली I रजस्वला स्त्री को उन तीन दिनों में किस प्रकार की...

हिन्दू धर्मं को बचाने के लिए संविधान को बदलिए

एक और महत्त्वपूर्ण भारतीय परिस्थिति, मैं कहता हूँ, मैं एक स्वामी हूँ जो अहिंसा के प्रति प्रतिबद्ध हूँ I एक संयाशी कि प्रतिज्ञा होती हैं अहिंसा I वो केवल अहिंसा ही हैंI सर्वबुठेभ्याहाभायाम्दाथ्वा, मैं...

त्रिदोष की धारणा – आयुर्वेदिक औचित्य और तत्व ऋतुस्राव की पद्धति में

वस्तुतः जो ऋतुस्राव की क्रिया का अनुभव करतें हैं वोह शायद भूल गएँ हैं कि ऋतुस्राव की क्रिया में एक आयुर्वेदिक औचित्य, आयुर्वेदिक तत्व भी हैं जिसके बारें में वेदों, धर्मशास्त्रों में बताया गया...

शौच्य क्या हैं और वह इतना मत्वपूर्ण क्यों हैं

प्राण के स्तर पर पांच प्रकार के प्राण होतें हैं – प्राण, अपाना, व्याना, उदान, समना I आप आगे देखेंगे, आपको इन सबका वृत्तान्त ऑनलाइन मिल जाएगा योगिक मूल्ग्रंथों में इयातादी में I तो...

हिन्दू धर्म के अनुसार मानव व्यक्तित्व की पांच क्यारियाँ

आजकल, लगभद हमारे सारी, हमारा सारा ज्ञान आधुनिक विज्ञान के माध्यम से ही आता हैं I हम कहतें तो हैं कि हमारा विशेष प्राकृतिक शारीर हैं लेकिन अपने मन का एक स्वाधीन अस्तित्व होने...

जन्म का महात्म्य और हिन्दू धर्मं में गर्भपात को ब्रह्म्हाया क्यों माना गया हैं ?

जन्म इतना महतवपूर्ण क्यों हैं? हमारे हिन्दू सम्प्रदाय में जन्म देना एक पवित्र बात मानी गयी हैं, बहुत बड़े पुण्य की बात, एक धार्मिक क्रिया जिसका पुण्य बहुत महान हैं, क्यों ? क्योकि जन्म...

ऋतुस्राव आत्मा शुद्धिकरण की प्रक्रिया है

अशौच्य की धारणा ऋतुस्राव से सम्बंधित हैं I तीसरा, पर वोह यहीं पर, कहानी यहाँ पर समाप्त नहीं होती; नहीं ! नहीं ! नारी अब जीवन्तता का रंग बन गयी हैं, दोष से संलघ्न...

क्यूँ सर्वोच्च न्यायालय ने तमिल नाडु सरकार को मन्दिरों का प्रशासन अधिग्रहीत करने से रोका

मेरे अनुसार HRCE सम्बन्धित जितनी भी विधियाँ हैं वे सब इसी प्रपत्र से निकली हैं , पूरे देश में। पहले मैं आपको इसकी पृष्ठभूमिबताताहूँ।तमिल नाडू HRCE विधिनियम का एक कुख्यात अनुभाग है, अनुभाग ४५...

आन्ध्र प्रदेश सरकार के एक विधिनियम के विरुद्ध एक याचिका में क्या तर्क दिया गया

तो , ये तर्क जो याचिका कर्त्ताओं की ओर से दिया गया, वे याचिका कर्त्ता जो आन्ध्र प्रदेश के कानून को चुनौती दे रहे थे, उसकी संवैधानिकता को लेकर। ‘याचिका कर्त्ता के बुद्धिमान् अधिवक्ता...

नोन रीफाउलमेंट के सिद्धान्त का केवल ये तात्पर्य नहीं ‘शरणार्थियों को निमंत्रित करो, उनको भारत में स्थापित और यहीं उनका पुनर्वास करो’

जब मेरे पास ये उदाहरण है, जिसको देश के सर्वोच्च न्यायालय से सम्मति मिली है, तीन सतत निर्णयों में, तब मैं ये समझना चाहता हूँ कि मैं ऐसा क्या कह रहा हूँ जो तथ्य...

हिन्दू धर्म और राष्ट्रीयता – शंकर शरण द्वारा एक व्याख्यान

  समय बदल गया है, समय की मांग बदल गयी है,और जो नयी पीढ़ी आती है वह स्वयं सबकुछ तय नहीं करती; बहुत सी चीजे उसको बनी-बनायीं मिलती है | यह जो कैरियर ओरिएंटेडनेस...